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वकील भुप्पी के भरोसे हरियाणा कांग्रेस

हैरान-परेशान और पस्त कांग्रेस नेतृत्व को हरियाणा में दमदार प्रदर्शन के लिए आखिरकार रोहतक की जिला अदालत में कभी वकालत करने वाले अपने पुराने नेता भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की शरण में जाना ही पड़ा। राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाने वाले हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर के तेवरों को नजरअंदाज कर सोनिया गांधी ने जाट नेता हुड्डा के हाथों कमान सौंप बड़ा जोखिम उठाया है। तंवर ने खुली बगावत का ऐलान कर पार्टी छोड़ दी तो किरण चौधरी और रणदीप सुरजेवाला जैसे दिग्गज महज तमाशबीन बन बैठे हैं। ऐसे में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शैलजा और हुड्डा के कंधों पर पार्टी की डूबती नैय्या पार लगाने की जिम्मेदारी आ पड़ी है। खबर है कि पार्टी आलाकमान हरियाणा से खासा निराश है। पार्टी सूत्रों की मानें तो ज्यादा से ज्यादा बीस सीटों पर पार्टी जीत की उम्मीद लगाए बैठी है। यह भी चर्चा है कि स्वयं हुड्डा भी मैदान में उतरने से पहले ही हार की आशंका से त्रस्त और हताश हैं। दो टर्म लगातार हरियाण के सीएम रह चुके हुड्डा हालांकि धुआंधार प्रचार करते घूम रहे हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक भाजपा के पचहत्तर पार के दावे पर दांव लगाते नजर आ रहे हैं। यदि पार्टी का प्रदर्शन खराब होता है तो तय है कि पहले स्लेम गेम शुरू होगा फिर हुड्डा कांग्रेस से इस बहाने विदाई से लेंगे कि समय रहते उनकी बात न मानने का खामियाजा हार का असल कारण है।

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