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कॉरपोरेट घराने के जनसंपर्क अधिकारी बन अपनी जीवन यात्रा शुरू करने वाले अमर सिंह एक दौर में कांग्रेस के खासे करीबी हुआ करते थे। फिर उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी संग अपने रिश्ते प्रगाढ़ कर उन्होंने स्वयं को खांटी समाजवादी घोषित कर डाला। इस दौरान वे भाजपा और संघ की साम्प्रदायिक नीतियों का घोर विरोध करते हैं। बदलते वक्त के साथ अब वे भगवा रंग में रंगने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। संघ के मुख्य पत्र ‘ऑर्गेनाइजर’ को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा और संघ के प्रति अपनी वफादारी का खुलकर इजहार करते हुए संघ से जुड़े संगठन सेवा भारती को आजमगढ़ स्थित अपनी पैतृक संपत्ति दान में देने और राष्ट्रहित में राष्ट्रनीति के लिए काम करने का ऐलान कर डाला है। हालांकि जानकारों की मानें तो अमर सिंह भले ही कितना प्रयास क्यों ना कर लें, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उन्हें पार्टी में लेने को कतई तैयार नहीं। सूत्रों का यह भी दावा है कि अमर सिंह का भाजपा प्रेम दरअसल जया प्रदा को भाजपा के टिकट में लोकसभा चुनाव लड़वाने की रणनीति का हिस्सा है।

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