सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायधीश अरुण मिश्रा पिछले दिनों कई बार अदालत में क्रोधित होते नजर आए। सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण पर जस्टिस मिश्रा इतने नाराज हो उठे कि शंकरनारायण उनकी कोर्ट छोड़कर चले गए। बाद में गहरी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए जस्टिस मिश्रा ने खुली कोर्ट में वकीलों एवं अन्य सभी से माफी मांग ली। इन दिनों सुप्रीम कोर्ट में जजों के आपा खोने को लेकर खासी चर्चा हो रही है। 13 फरवरी को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कह डाला कि हम हमेशा गुस्से में रहते हैं। नवंबर 2016 में तो सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मार्केंडेय काटजू संग गोगोई की बहस इतनी बढ़ गई कि नाराज जज साहब ने कोर्ट के सुरक्षाकर्मियों को आदेश दे डाला कि वे काटजू को उनकी कोर्ट से बाहर कर दें। मुख्य न्यायधीश रहते जस्टिस दीपक मिश्रा 2017 में तब बेहद नाराज हो उठे जब ऐसे मामले में बहस के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने उन पर कुछ आरोप लगा डाले थे। ऐसे एक नहीं अनेक मामले हैं जहां सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों ने अपने गुस्से का सार्वजनिक प्रदर्शन किया। जानकारों की मानें तो वर्क प्रेशर और सोशल मीडिया में सुप्रीम कोर्ट की खुले आम आलोचना के चलते न्यायाधीश बेहद खिन्न हो अपना आपा खो बैठते हैं।

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