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जय प्रकाश नड्डा इन दिनों बड़े हैरान-परेशान बताए जा रहे हैं। भाजपा का जब उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था तब शायद ही उन्हें इल्म रहा होगा कि असली ताकत केंद्रीय गृहमंत्री के पास ही रहेगी। अब लेकिन उन्हें सच्चाई का एहसास हो चला है। जानकारों का दावा है कि भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री केवल अमित शाह की बात सुनते हैं। उदाहरण के लिए कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा का बयान है जिसमें उन्होंने अपने मंत्रिमंडल विस्तार बाबत पूछे जाने पर, कह डाला कि वे अमित शाह से वार्ता करने के बाद ही फैसला लेंगे। पहले जनसंघ फिर भाजपा के अस्तित्व में आने बाद के ऐसा पहली बार हो रहा है कि एक व्यक्ति के चारों तरफ सरकार और पार्टी सिमट कर रह गई हो। अटल-आडवाणी युग में एक बार अटल जी को हाशिए में डाल सारी शक्ति आडवाणी जी के हाथों में दिए जाने का प्रयास हुआ था, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाई थी। इस बार लेकिन भाजपा का मतलब अमित शाह हो गया है। खबर जोरों पर है कि अमित शाह का पार्टी संविधान में संशोधन के जरिए अध्यक्षकाल दो वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकता है। यह भी चर्चा होरों पर है कि यदि ऐसा नहीं होता तो भी नड्डा को अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा। विकल्प के तौर पर धर्मेन्द्र प्रधान का नाम चल रहा है। बेचारे नड्डा इन दिनों ऐसी चर्चाओं के चलते खासे व्यथित बताए जा रहे हैं।

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