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पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के संबंध राजभववन से कभी भी सौहार्दपूर्ण नहीं रहे। खासकर उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता केशरीनाथ त्रिपाठी को जब पश्चिम बंगाल राजभवन की जिम्मेदारी सौंपी गई, ममता बनर्जी सरकार के राजभवन संग रिश्ते बेहद खराब हो गए थे। त्रिपाठी के बाद राज्य के गवर्नर बनाए गए जगदीप धनकड़ के साथ तो ममता सरकार की पटरी बिल्कुल ही मेल नहीं खा रही। हालात इतने खराब हैं कि राज्य सरकार के इशारे पर राज्य की नौकरशाही गवर्नर को सामान्य प्रोटोकाॅल तक नहीं दे रही है। गत् सप्ताह जब राज्यपाल राज्य विधानसभा पहुंचे तो उनके लिए तय गेट पर ताला डला मिला। राज्यपाल को पैदल ही दूसरे गेट से विधानसभा में इन्ट्री लेनी पड़ी। राज्य सरकार धनकड़ को सरकारी हेलीकाॅप्टर भी नहीं उपलब्ध करा रही है। धनकड़ भी ईंट का जवाब पत्थर से देने में यकीन रखते हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण सरकारी बिल राजभवन में ही लटका रखे हैं। खबर है कि इसमें से विधेयक जल्द ही वे अपनी आपत्तियों के साथ वापस भेजते जा रहे हैं। ममता के लिए यह बड़ा सिरदर्द है क्योंकि विधानसभा चुनाव में अब मात्र एक बरस रह गया है। ऐसे में यदि राज्यपाल अपनी सहमति नहीं देते हैं तो जनता जनार्दन को लुभाने वाली कई योजनाएं धरी रह जाएंगी।

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