कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शुमार गुलाम नबी आजाद इन दिनों संकट में हैं। कारण है पार्टी अध्यक्ष का उन पर से घटता विश्वास। पार्टी सूत्र इसके दो कारण गिना रहे हैं। पहला है आजाद का जनाधारविहीन नेता होना। उनकी असल ताकत गांधी परिवार का करीबी होना रहा है। लेकिन राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस अब बदल रही है। राहुल पहले ही सोनिया गांधी के करीबी जनार्दन द्विवेदी और दिग्विजय सिंह को हाशिए में डाल चुके हैं। अब खबर है कि एनसीपी नेता तारिक अनवर की कांग्रेस में रिएंट्री होने जा रही है जो आने वाले समय में गुलाम नबी आजाद के स्थान पर उत्तर प्रदेश के प्रभारी भी बनाए जा सकते हैं। आजाद के प्रभारी रहते पहले तो पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उत्तर प्रदेश में सपा संग ऐसा समझौता कर डाला जिसके चलते कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर हो गया। इस समझौते को परवान आजाद ने ही चढ़ाया था। इसके बाद लोकसभा के लिए गोरखपुर उपचुनाव में पार्टी ने विपक्षी गठबंधन को नकारते हुए अपना प्रत्याशी खड़ा कर डाला जो मात्र पंद्रह हजार वोट पा अपनी जमानत जब्त करा बैठा। उत्तर प्रदेश में प्रभारी रहते गुलाम नबी आजाद की कार्यशैली से खफा राहुल अब जल्द ही आजाद के पर कतर सकते हैं।

You may also like