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चुनावों में चाहे कोई जीते, कोई हारे, चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की मौज रहती है। 2014 में मोदी के मुख्य रणनीतिकार बन छाए पीके को राजनीतिक दलों की विचारधाराओं से कुछ लेना-देना नहीं रहता है। वे किसी चुनाव में भाजपा के रणनीतिकार बन जाते हैं, तो दूसरे ही पल वे विपक्षी दलों के साथ हो लेते हैं। हालांकि कई राज्यों में उनकी रणनीतिक मदद लेने वालों का सूपड़ा साफ हो गया। लेकिन दुकान अभी पीके की ठीक-ठाक चल रही है। खबर है कि तमिलनाडु में 2021 में प्रस्तावित राज्य विधानसभा चुनाव के लिए इस बार पीके को डीएमके प्रमुख स्टालिन अपना मुख्य रणनीतिकार बनाने जा रहे हैं। जानकारों की माने तो करोड़ों की फीस वसूलने वाले पीके संग स्टालिन की जल्द ही चेन्नई में मुलाकात तय है। हाल फिलहाल तक डीएमके के रणनीतिक सलाहकार सुनील के इस्तीफे बाद स्टालिन के पीके संग गठजोड़ का समाचार जोर पकड़ चुका है।

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