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कांग्रेस की अब मात्र पांच राज्यों में सत्ता बची है। इनमें से भी केवल दो राज्य, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में उसकी अपनी सरकार और अपने सीएम हैं बाकी तीन राज्यों, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और झारखण्ड में वह गठबंधन सरकार की जूनियर पार्टनर मात्र है। झारखण्ड में कांग्रेस के 18 विधायक हैं जिन पर लंबे अर्से से भाजपा डोरे डाल हेमंत सोरेन सरकार को गिराने में जुटी रहती है। इन 18 में दो विधायक ऐसे हैं जिन्होंने चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस की सदस्यता ली थी। बाबूलाल मरांडी के पार्टी से अलग हुए इन दो विधायकों में से एक बंधु तिर्की की सदस्यता पर खतरा मंडराने लगा है क्योंकि उन्हें आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में तीन साल की सजा रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने सुना दी है। अब यदि इस सजा पर हाईकोर्ट से स्टे नहीं मिला तो तिर्की जेल भी जाएंगे और विधायकी से भी हाथ धो बैठेंगे। भाजपा के कुछ नेता प्रयास कर रहे हैं कि कांग्रेस विधान दल में फूट डाल कर सोरेन सरकार को अल्पमत में ला दिया जाए ताकि विधानसभा में शक्ति परीक्षण हारने के बाद सोरेन को इस्तीफा देना पड़े और बैक डोर से ही सही राज्य में भाजपा की सरकार बन जाए। रांची के सत्ता गलियारों में बड़ी चर्चा है कि आने वाले दिनों में कुछ बड़ा ‘खेला’ होने जा रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री सोरेन और कांग्रेस आलाकमान निशि्ंचत है कि उनके विधायकों को भाजपा ‘बरगला’ नहीं पाएगी किंतु एहतियात दोनों ही बरत रहे हैं और ऐसे विधायकों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

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