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बेहतर शिक्षा के लिए बना डाली WhatsApp यूनिवर्सिटी

बेहतर शिक्षा के लिए बना डाली WhatsApp यूनिवर्सिटी

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी एक ऐसा नाम जिससे सोचकर आपको यह लगता है कि व्हाट्सएप पर कोई मजाक किया जा रहा है। यदि आप ऐसा सोच रहे हैं तो यह बिल्कुल गलत है। दरअसल, आजकल जिस रूप में व्हाट्सएप का प्रयोग अफवाहों और मजाक के आदान-प्रदान के लिए सबसे ज्यादा हो रहा है, लेकिन इसे अगर बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए प्रयोग अमल में लाया जाए तो सोचिए ये कितना कारगर साबित होगा। एक समूह ने ऐसा ही कर दिखाया गया है। इसमें ऐसे लोग शामिल हैं तो पेशे से शिक्षक हैं या फिर सामाजिक कार्यकर्ता।

अब सवाल उठता है कि आखिर ये व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी है क्या और कैसे चलाया जाता है? दरअसल, हल्द्वानी में सोशल मीडिया द्वारा विद्यार्थियों, परीक्षार्थियों तक किताबें पहुंचाने के लिए व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी और व्हाट्सएप गुरु एक अहम भूमिका निभा रहा है। हल्द्वानी के एमबीपीजी महाविद्यालय के हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर्स ने अपने साथियों के सहयोग से इस व्हाट्सएप गुरु की शुरुआत की है। इस मुहिम की थीम यह है कि पठन-पाठन के इच्छुक विद्यार्थी, परीक्षार्थी एवं किताब प्रेमी लोग व्हाट्सएप गुरु के सदस्यों के व्हाट्सएप पर अपने विषय का चयन करते हुए पुस्तक की मांग करेंगे, जिसे व्हाट्सएप गुरु के सदस्य व्हाट्सएप के माध्यम से ही उपलब्ध कराएंगे।

डॉक्टर संतोष मिश्र बताते हैं कि पाठ्यक्रम पढ़ रहे विद्यार्थी या प्रतियोगी परीक्षा में सम्मिलित हो रहे परीक्षार्थी या सामान्य किताब प्रेमी को इंटरनेट के भवसागर से अपने पसंद की किताब निकालना बहुत कठिन है। सर्च करने, खोजने और सटीक किताब तक पहुंचने में विद्यार्थियों, परीक्षार्थियों का बहुत समय बर्बाद होता है। ऐसे में जो लोग इन किताबों को पहले से पढ़ चुके हैं या उनके संग्रह में हैं, जरूरतमंद को तत्काल उपलब्ध करा सकते हैं। क्योंकि नई पीढ़ी व्हाट्सएप का इस्तेमाल सबसे अधिक कर रही है इसलिए वर्तमान समय में और भी जरूरी हो जाता है कि युवाओं को व्हाट्सएप के माध्यम से ही पाठ्य सामग्री, संदर्भ ग्रंथ, बेहतरीन पत्रिकाएं, साहित्य उपलब्ध कराए जाएं। जिनके अध्ययन से वे अपना कैरियर बना सकें और साथ ही भ्रमित होकर गलत तथ्य एक दूसरे को शेयर करके गुमराह होने से बचें रहें। दूसरा यह की आजकल हर आदमी के मोबाइल में ज्यादा-से-ज्यादा नेट मौजूद रहता है जिसका उपयोग वह यूट्यूब गाने या पिक्चर देखने में करता रहता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से जुड़ेगा तो नेट का सही उपयोग शिक्षा के लिहाज से किया जा सकेगा। इस मुहिम में फिजिक्स, बॉटनी, जूलॉजी, केमिस्ट्री, हिंदी, कानून, पर्यटन, इतिहास, बिजनेस समेत अनेक विषयों के जानकार उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश के अलावा बिहार इन अन्य जगहों से भी जुड़े हैं।

व्हाट्सएप  यूनिवर्सिटी और व्हाट्सएप गुरु में अब 30 से ज्यादा इच्छुक सदस्य मौजूद हैं। ग्रूप में हजारों पुस्तकें पहुंचाने के लिए तैयार हैं। आगे भी और अधिक सदस्यों के जुड़ने की संभावना है। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के जरिए अब तक लगभग 500 छात्र-छात्राओं को किताबें और स्टडी मेटेरियल दिया जा चुका है। यातायात व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे कमल कोरंगा और टूरिस्ट मैनेजमेंट के छात्र रहे प्रमोद मिश्रा भी व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की मुहिम का एक हिस्सा है। दोनों लोगों के पास प्रतिदिन 10 से 12 लोगों के मैसेज आ रहे हैं। कुछ शिकायतें भी आ रही है जिसमें यह सामने आ रहा है कि स्टडी मेटेरियल जल्दी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। लिहाजा यह कोशिश की जा रही है, कि कम्युनिकेशन गैप को दूर किया जाए। लाभार्थी तक स्टडी मैटेरियल जल्द-से-जल्द पहुंचाया जा सके। शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव और व्हाट्सएप पर तेजी से प्रसारित होते अनुपयोगी चीज़ो के चलते यह जरूरी हो गया था कि व्हाट्सएप का बेहतर उपयोग किया जाए। लिहाज़ा अब व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी औऱ व्हाट्सएप गुरु की मुहिम रंग लाने लगी है।

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