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चमोली की मानसी और परमजीत ने वॉक रेस में सोने के तमगे हासिल कर पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया। हालांकि दिल्ली में आयोजित प्रथम ^खेलो इंडिया खेलो प्रतियोगिता की तैयारी के लिए इन दोनों को सुविधाएं न के बराबर मिलीं। सीमांत की इन प्रतिभाओं ने अभावों में जीते अपना लोहा मनवाया

राष्ट्रीय स्तर पर  खेलो इंडिया खेलो^ प्रतियोगिता में चमोली जिला ही नहीं] बल्कि उत्तराखण्ड का नाम रोशन करने वाले परमजीत सिंह बिष्ट और मानसी नेगी अपनी हम उम्र की प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा हैं। सीमित संसाधनों में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा से देश में नाम कमाने वाले ये युवा सीमांत चमोली जिले के गांवों से उभरकर आए हैं। इनकी सफलता पर साथी छात्र-छात्राओं] गुरुजनों सहित गांव और जिला जश्न में है।

तीन हजार मीटर वॉक रेस में गोल्ड मैडल लेने वाली मानसी नेगी ने तो चमोली की बालिकाओं को मानो कुछ अलग करने का हौसला दिया है। गोपेश्वर के नैग्वाड़ स्थित कन्या जूनियर हाईस्कूल में दसवीं की छात्रा मानसी नेगी चमोली के दशोली ब्लॉक के दूरस्थ गांव मजोठी की रहने वाली है। पेशे से मैकेनिक मानसी के पिता लखपत सिंह नेगी की २०१६ में मृत्यु हो चुकी है। मानसी की मां शकुंतला देवी गांव में ही खेती मजदूरी कर बेटी को आगे बढ़ने का हौसला देती रही। यही कारण है कि बेहद अभावों में भी उसके अंदर कुछ अलग करने का जज्बा हमेशा रहा। उसने तीन हजार मीटर वॉक रेस में प्रथम स्थान प्राप्त कर चमोली ही नहीं] बल्कि उत्तराखण्ड का भी नाम रोशन किया है। मानसी की प्रारंभिक शिक्षा कक्षा तीन तक अलकनंदा पब्लिक स्कूल मजोठी में हुई। इस स्कूल के बंद हो जाने के कारण उसने आठवीं तक की पढ़ाई नेशनल पब्लिक स्कूल और नवीं कन्या हाईस्कूल नैग्वाड़ में की है। मानसी का कहना है कि अगर इसी तरह सही मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के लिए संसाधन मिले तो वह दुनिया में भी नाम रोशन कर सकती है। वह इस सफलता का श्रेय मां सहित गुरुजनों को देती है और कहती है कि सभी ने उसे हौसला दिया।

नई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में पांच हजार मीटर वॉक रेस में प्रथम पायदान पर आकर गोल्ड मैडल लेने वाले ग्राम खल्ला] मंडल निवासी परमजीत सिंह बिष्ट इंटर कॉलेज बैरागना में कक्षा ११ के छात्र हैं। परमजीत के पिता जगत सिंह बिष्ट खल्ला में ही गांव की छोटी सी दुकान चलाते हैं। मां हेमलता देवी गृहणी हैं। अभावों की जिंदगी जीने वाले परमजीत को दौड़ लगाने की आदत द्घर से बैरागना स्कूल तक तीन किमी जाने के दौरान ही पड़ी थी। प्रतिदिन द्घर का काम निपटाने के बाद विद्यालय पहुंचने के लिए उसे दौड़ लगानी पड़ती थी।

शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने अपने देहरादून आवास पर खेलो इंडिया स्कूल गेम्स २०१८ में जनपद चमोली से ३००० मीटर पैदल वॉक में स्वर्ण पदक विजेता मानसी नेगी और ५००० मीटर पैदल वॉक में स्वर्ण पदक विजेता परमजीत सिंह बिष्ट से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित किया। इन दोनों के अलावा शिक्षा मंत्री ने उनके प्रशिक्षक गोपाल बिष्ट को भी सम्मानित किया। इस दौरान शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे को गोपेश्वर स्टेडियम की स्थिति अच्छी नहीं होने की जानकारी दी गई। तब अरविंद पांडे ने तत्काल खेल सचिव से फोन कर गोपेश्वर स्टेडियम को अभ्यास के अनुकूल बनाने के आदेश दिए। शिक्षा मंत्री ने खिलाडियों को पूर्ण विश्वास दिलाया कि प्रदेश सरकार उनकी हरसंभव मदद की जाएगी।

प्रथम खेलो इंडिया स्कूल गेम्स में परचम लहराने वाली इन दोनों गुदड़ी के लाल का क्षेत्रवासियों ने भव्य स्वागत किया। दिल्ली से देहरादून और वहां से अपने गृह जनपद लौटने पर मानसी नेगी और परमजीत बिष्ट को लोगों ने फूल-मालाओं से ढक दिया। चमोली पहुंचते ही गांव वालो और जनपदवासियों ने दोनों खिलाड़ियों को खुली गाड़ी पर पूरा शहर ?kqek;k। ढोल-नगाड़ों से इनका स्वागत किया। मानसी नेगी ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने और मां के साथ-साथ साथियों को भी दिया। उन्होंने बताया कि पिता के निधन के बाद मैं टूटने लगी थी] लेकिन मेरी मां ने मुझे मजबूत बनाया। यदि मैं तब टूट गई होती तो शायद आज यह सफलता हासिल नहीं कर पाती।

परमजीत बिष्ट ने कहा] ^हमने शुरू से ही अपने गेम्स पर फोकस किया हुआ था। यहां प्रशिक्षण के लिए संसाधन की कमी है। फिर भी हमारे गुरू ने हमें कम सुविधाओं और संसाधनों में भी लड़ना सिखाया।^ इसमें कोई दोराय नहीं है कि प्रदेश में खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं और संसाधन न के बराबर हैं। इसके बावजूद अलग-अलग खेलों में यहां के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर देश-दुनिया में नाम रौशन कर रहे हैं। जरूरत है] इन खिलाड़ियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की।

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