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मिसाल: कहानी उन लड़कों की जिन्होंने जले चेहरों को बनाया खूबसूरत

मिसाल: कहानी उन लड़कों की जिन्होंने जले चेहरों को बनाया खूबसूरत

‘छपाक’ फ़िल्म से उन लड़कियों में एक नई ऊर्जा आई है जो एसिड अटैक में अपना चेहरा ही नहीं समाज में खुद को पहचान दिलाने के जदोजहद में लगी हैं। ये कहानी सिर्फ लक्ष्मी अग्रवाल की नहीं उन तमाम लड़कियों की है जो इस दर्द से खुद को उबारी ही नहीं बल्कि अपनी अलग पहचान बनाई। यह कहानी उन लड़कों की भी है जो एसिड विक्टिम महिलाओं के साथ कदम-से-कदम मिलाकर समाज के सामने एक नई मिसाल बने।

इसी समाज में रविशंकर सिंह, जयप्रकाश और गौरव जैसे लड़के भी हैं। ये वो लड़के हैं जो एसिड से जल चुकी चेहरे की जगह उनके दिल की खूबसूरती को देखा। उन्हें जीने की वजह दी, उड़ना सिखाया, सजना-सवरना सिखाया। ये वो लड़के हैं जो एसिड से जल चुके चेहरे की जगह उनके दिल की खूबसूरती को देखा। एसिड अटैक सर्वाइवर के स्वाभिमान को जिंदा किया।

मिसाल: कहानी उन लड़कों की जिन्होंने जले चेहरों को बनाया खूबसूरत

ललिता बेन आजमगढ़ की रहने वाली थी उनके जिंदगी में रविशंकर सिंह नाम का एक लड़का था। रवि से ललिता की बातचीत एक मिस कॉल से शुरू हुई थी। और दोनों अच्छे दोस्त बन गए। तीन महीने की बातचीत में ही दोनों ने शादी करना तय कर लिया था। लेकिन एक दिन ललिता के कजिन और उनमें एक छोटी-सी कहासुनी हो गई जिससे गुस्सा होकर उनके कजिन ने उसके चेहरे पर एसिड फेंक दिया। इस हादसे से वो टूट गई थी, ललिता अपने चेहरे के कारण रवि से दूरी बनाने लगी, लेकिन रवि को जैसे ही पता चला उसने एक पल के लिए भी ललिता को अकेला नहीं छोड़ा। ललिता की अब तक 30 सर्जरी हो चुकी है, लेकिन रवि ललिता के हिम्मत को कभी मरने नहीं दिया। रवि किसी मिसाल से कम नहीं, जिन्होंने बिना किसी शर्त के प्यार को तरजीह दी।

मिसाल: कहानी उन लड़कों की जिन्होंने जले चेहरों को बनाया खूबसूरत

दूसरी कहानी जयप्रकाश और सुनीता की है। दोनों स्कूली दोस्त थे। स्कूल से निकलने के बाद धीरे-धीरे दोनों अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गए। सुनीता बेंगलुरु चली गईं। तीन साल बाद जयप्रकाश को उनके जन्मदिन पर सुनीता ने फोन किया, फिर कुछ समय तक बात हो कर फिर से छूट गई। 2011 में जयप्रकाश को अचानक एक मित्र का फ़ोन आया कि सुनीता का एक्सीडेंट हुआ है, वह कोयम्बटूर में एडमिट है। जयप्रकाश जब हॉस्पिटल पहुंचा तो देखा कि सुनीता का चेहरा पूरी तरह से जल चुका है। एसिड ने सुनीता का चेहरा पूरी तरह से क्षत-विक्षिप्त कर डाला था। जयप्रकाश को उसी क्षण एहसास हुआ कि वे सुनीता से आत्मा के तल पर जुड़े हुए हैं।उन्होंने सुनीता खत लिखकर शादी के लिए प्रपोज किया।वह हंसी लेकिन उसने न नहीं कहा। शुरू में जयप्रकाश की माँ हैरान थी लेकिन उसके पिताजी ने साथ दिया और आखिरकार ये दोनों साथ आए। 2012 में सुनीता की दर्जनों सर्जरी हुई, वह उसके साथ हर कदम पर खड़ा रहा। 26 जनवरी, 2014 को सुनीता ने 3 गुलाबों के साथ जयप्रकाश को प्रपोज किया, उसी दिन उनकी सगाई हो गई। और शादी भी। अब दोनों के आत्मीया और आत्मीक जैसे दो प्यारे बच्चे हैं। जयप्रकाश कहते हैं, “प्रेम किसी चेहरे या थोपे गए हालात या बाहरी सुंदरता के बारे में नहीं है। यह आत्माओं का संबंध है।”

मिसाल: कहानी उन लड़कों की जिन्होंने जले चेहरों को बनाया खूबसूरत

मोहिनी जो जयपुर की रहने वाली थी। अपने दफ्तर के लिए जा रही थीं। नई जॉब का दूसरा ही दिन था। वो खुश थीं और जल्दी में थीं। रास्ते में एक मनचलें लड़के ने उन पर तेजाब की पूरी बॉटल उड़ेल दी। मोहिनी चीखती रही, खुद को आशिक कहने वाला वो लड़का भाग गया। उसका पूरा चेहरा गल गया। मोहिनी को अस्पताल ले जाया गया। उनकी जान तो बच गई लेकिन कई सर्जरी के बाद भी चेहरा मूल स्वरूप में नहीं आ सका। मोहिनी खुद को घर में कैद कर ली, अपना चेहरा देखने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। आस-पास के लोग उनके माँ-बाप को सुनाने लगे कि एक जिंदा लाश को ढो रहे है। मोहिनी जीना नहीं चाहती थी। लेकिन कुछ सालों बाद मोहिनी ने अपना स्कार्फ निकालकर फेंक दिया। ये उसके माँ-बाप का प्यार था या उनकी ख़ुद की इच्छा-शक्ति, वो उठीं और शीशे में खुद को निहारा।

एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया है कि उन्हें लगा कि ये चेहरा ही सिर्फ मोहिनी नहीं है। मोहिनी इसके अलावा भी बहुत कुछ है। उन्होंने सोच लिया कि अब इस चेहरे की सच्चाई को स्वीकार कर आगे बढ़ने का वक़्त आ गया है। उन्होंने एक टेली-कम्युनिकेशन कंपनी में काम शुरू कर दिया। वो आगे बढ़ती गईं। एक दिन उनके पास एक नंबर से कॉल आया। दूसरी तरफ एक लड़के की आवाज थी। लड़के ने एक सेकंड हैंड फोन लिया था, उस फोन में मोहिनी का नंबर सेव था। यह बात लड़के ने मोहिनी को बताई दोनों में दोस्ती हो गई, अक्सर वे दोनों बातें करते यह सिलसिला महीने से तीन साल का होने चला दोनों को समय का पता ही नही चला। एक दिन मोहिनी ने गौरव को सब बता दिया। गौरव को मोहिनी की जिंदादिली पसंद थी। मोहिनी से मिले और घुटनों पर बैठ शादी के लिए प्रपोज कर दिया। फिर दोनों की शादी हो गई। आज उन दोनों का एक प्यारा-सा बच्चा है।

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