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लीवर रोगियों के लिए रोल मॉडल

नई दिल्ली में सीएलबीएस संस्था ने डॉक्टर्स डे पर डॉ. अशोक पंत को किया सम्मानित

 

समाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो हर काम को समर्पण भाव से करते हैं। यही समर्पण उन्हें समाज में एक नई पहचान दिलाता है, बल्कि अनगिनत लोगों के लिए प्रेरणास्रोत भी बन जाता है। ऐसे ही एक व्यक्तित्व हैं डॉ अशोक पंत। जिन्हें डॉक्टर्स डे पर सेंटर फॉर लीवर बायलेरी सर्विस (सीएलबीएस) संस्था के चेयरमैन डॉ सुभाष गुप्ता एवं कलाकार चित्रांगदा ने सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें लीवर ट्रांसप्लांट के बाद दस साल तक लंबे संतुलित और सामाजिक रूप से सक्रिय जीवन जीने की मिसाल स्थापित करने के लिए दिया गया। संस्था ने डॉ पंत को इस तरह के रोगियों के लिए एक रोल मॉडल माना। आज से 10 वर्ष पूर्व डॉ पंत लीवर सिरोसिस बीमारी की चपेट में आ गए थे। उनके लीवर ने 90 प्रतिशत काम करना बंद कर दिया था। तब अपोलो अस्पताल में उनका लीवर ट्रांसप्लांट किया गया। इसके लिए 4 जनवरी 2009 को अपोलो अस्पताल में उनके पुत्र डॉ शिवाशीष ने अपने लीवर का एक पार्ट अपने पिता को डोनेट किया ताकि उनके पिता एक बेहतर जिंदगी जी सकें। उनके लाडले पुत्र का योगदान एवं डॉक्टरों के प्रयास से सफल लीवर ट्रांसप्लांट हुआ। तब से डॉ पंत न सिर्फ स्वस्थ रहे, बल्कि इस पूरे एक दशक को उन्होंने सामाजिक सरोकारों के नाम कर दिया।

कई मौकों पर ‘दि संडे पोस्ट’ के इस संवाददाता से बातचीत में वह कहते रहे कि उन्हें एक नई जिंदगी मिली है और वह इसका पूरा उपयोग समाज की बेहतरी में करना चाहते हैं। वह इसमें सफल भी रहे हैं। लीवर की बीमारी से उभरने के बाद डॉ पंत ने यकøत संबंधित बीमारियों के लिए जन संचेतना पैदा करने एवं परामर्श के लिए एक स्वैच्छिक एवं निःशुल्क सेवा ‘विमर्श’ की स्थापना की। इसका ध्येय वाक्य था-न कामये राज्यं न स्वर्गं न च पुनर्भव / कामये दुःख तप्तानां प्राणिनां आर्तिनाशनम्। विमर्श नामक हेल्पलाइन स्थापित करने के पीछे का उद्देश्य ही लीवर की बीमारियों के प्रति जनसाधारण में जागरूकता प्रदान करने के साथ ही निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श देना एवं अंगदान के प्रति सकरात्मक वातावरण पैदा करना रहा है। वह पहल संस्था के राज्य निदेशक भी रहे। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की वैज्ञानिक प्रतिभाओं को निखारने का बेहतरीन काम किया। वह विज्ञान को स्कूलों से जोड़ने में सफल रहे। विज्ञान के प्रचार-प्रसार के लिए उन्होंने काफी मेहनत की। वैज्ञानिक चेतना पैदा करना हमेशा से उनकी प्राथमिकता में रहा है। वह युवाओं को वैज्ञानिक तरीके से सोचने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। उनका मानना है कि तमाम समस्याओं का समाधान विज्ञान में छुपा हुआ है। उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र के सहयोग से वह पिथौरागढ़ में पहला साइंस कम्युनिकेशन सेंटर स्थापित करने में सफल रहे। उनका एक सपना जनपद पिथौरागढ़ को वैज्ञानिक सिटी बनाने का भी है। साइंस कम्युनिकेशन सेंटर के माधायम से वह विद्यार्थियों, शोध छात्रों और जनमानस को विज्ञान से जोड़ना चाहते हैं जिसके लिए यह कम्युनिकेशन सेंटर मार्गदर्शन का काम करेगा। शिक्षा के क्षेत्र में डॉ पंत का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जनपद पिथौरागढ़ के जिला मुख्यालय स्थित देवसिंह कॉलेज को बतौर प्रधानाचार्य उन्होंने अपने प्रयासों से एक आर्दश विद्यालय के रूप में स्थापित किया।

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