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प्रशासनिक अधिकारी यदि समाज की चिंता करने लगें तो देश को विकसित होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। प्रदेश ही नहीं देश के कई नौकरशाहों पर भ्रष्टाचार और कामचोरी का आरोप लगता रहा है। मगर इनके बीच कई अधिकारी ऐसे भी हैं] जो ईमानदारी एवं बिना भेदभाव के काम करते हैं। साथ ही वे अपने पद से इतर समाज के काम में जुटे रहते हैं। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश f?fYM;ky के बाद यहां की एसडीएम भी अपने पद से इतर समाज के लिए काम कर रही हैं। रुद्रप्रयाग में एसडीएम सदर पद पर तैनात मुक्ता मिश्र जिले के गरीब युवाओं के लिए अब उम्मीद बन गई हैं। अपने प्रशासनिक कार्यों के बाद मुक्ता समय निकालकर युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रतिष्ठित विद्यालयों की प्रवेश परीक्षा की फ्री तैयारी करा रही हैं।

मुक्ता की इस पहल से इंटर पास गरीब नौनिहालों की भी उम्मीदें बंधने लगी हैं। पिछले चार माह से वह राजकीय इंटर कॉलेज रुद्रप्रयाग में सुबह आठ से दस बजे तक नियमित कोचिंग कक्षाएं ले रही हैं। मूलतः चमोली जिले के देवाल गांव की रहने वाली मुक्ता मिश्र २०१४ बैच की पीसीएस अधिकारी हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर देवाल से हुई। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। वह एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार में जन्मीं। इनका बचपन साधारण पहाड़ी परिवार में बीता। संसाधनों की कमी के बावजूद इन्होंने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया।

अब मुक्त गरीब एवं निम्न मध्यवर्गीय परिवार के बच्चों को ऊंचाईयों तक पहुंचाने के लिए आगे आई हैं। वह ऐसे परिवार के बच्चों की कोचिंग ले रही हैं। वह बताती हैं] ^समय बहुत बलवान होता है। समय का हमेशा सही उपयोग करने से कठिन से कठिन कार्य संभव हो जाते हैं। रुद्रप्रयाग में एसडीएम सदर के पद पर तैनात होने के बाद जिलाधिकारी मंगेश f?fYM;ky की प्रेरणा से मैंने गरीब बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने का मन बनाया। इंटर पास करने के बाद छात्रों के लिए जिले में कोई भी ऐसा संस्थान नहीं है] जहां वे सिविल सर्विस] इंजीनियरिंग] मेडिकल आदि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें। खासकर गरीब छात्र तो तैयारी के बारे में सोच भी नहीं सकते।^

पहाड़ के छात्र सिविल सेवा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें] इसके लिए ही राजकीय इंटर कॉलेज रुद्रप्रयाग में कोचिंग की फ्री कक्षाएं शुरू कीं। वर्तमान में रुद्रप्रयाग शहर के अलावा अगस्त्यमुनि] तिलवाड़ा और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों के ५० से अधिक नौनिहाल यहां कोचिंग ले रहे हैं। एसडीएम मुक्ता के अनुसार पहाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है] जरूरत  उन्हें प्रेरित करने की है। कोचिंग के माध्यम से वह यही कर रही हैं। हालांकि] अभी यह शुरुआत है। नतीजा आने में समय लगेगा। प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच इसके लिए समय निकालने पर  मुक्ता कहती हैं] ^सुबह आठ से दस बजे के बीच का समय मेरा अपना होता है। क्यों न इसे समाज के हित में लगाया जाए। रुद्रप्रयाग निवासी सौरभ बिष्ट का कहना है कि मैं बीते तीन माह से नियमित कोचिंग ले रहा हूं। मुक्ता मैडम जिस तरह से कोचिंग दे रही हैं] उससे काफी लाभ मिल रही है। उन्होंने अच्छी किताबें भी उपलब्ध कराई हैं।

इससे तैयारी में आसानी हो रही है। अगस्त्यमुनि िनवासी अरविंद कठैत का कहना है कि इस पहल से रुद्रप्रयाग जिले के साथ ही आस-पास के जिलों के छात्र भी कोचिंग के लिए प्रेरित हो रहे हैं। पहाड़ के लिए यह अनूठी पहल है] जिसका निश्चित रूप से भविष्य में लाभ मिलेगा। कोचिंग कर रहे रुद्रप्रयाग निवासी अंकित नेगी का कहना है कि जब से मैंने इंजीनियरिंग की कोचिंग शुरू की है] भविष्य के लिए उम्मीद की किरण नजर आने लगी है। तिलवाड़ा निवासी जयंत कंडवाल का कहना है कि गरीब छात्र अपने बूते कोचिंग नहीं ले सकते थे। मुक्ता मैम ने उनकी उम्मीदों को पंख लगा दिए हैं। सभी छात्र पूरे मनोयोग से तैयारी कर रहे हैं।

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