[gtranslate]
Positive news

मध्यप्रदेश की “दरिया दिल अम्मा” का बिना फ़ोटो सेशन वाला दान

अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोगों की मंशा दान देने से अधिक फ़ोटो सेशन कराने की होती है। उसी बीच समाज से कुछ ऐसे उदाहरण भी आते हैं जो आदर्श बन जाते हैं। ऐसे ही एक उदाहरण को इंदौर के प्रेम जोशी ने सोशल मीडिया पर साझा किया है।प्रेम जोशी , कैरियर अकादमी चलाते हैं।साथ ही समाजिक सरोकारों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। उन्होंने आज अपने फ़ेसबुक वाल पर एक ऐसी अम्मा के बारे में जानकारी साझा की जिसे पढ़ने के बाद सोशल मीडिया पर लोग अब अम्मा को ‘दरिया दिल अम्मा’ कह कर पुकार रहे हैं।

प्रेम जोशी ने अपनी फ़ेसबुक वॉल पर लिखा है कि”मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की 82 वर्षीय यह है “श्रीमती सलभा उसकर”।अरिहंत विहार कॉलोनी में 600 स्क्वायर फीट के मकान में रहती हैं। शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हैं।

कोरोना वायरस महामारी के दौर में खुद को घर में बंद करने के साथ इन्होंने जो किया, वह इतना प्रेरित कर देने वाला है कि उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल महसूस होता है।”दरिया दिल अम्मा” ने अपनी पेंशन में से ₹100000 का दान मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए दिया है। यह दरियादिली इतनी खामोशी से हुई कि अफसरों के हाथ में चेक पहुंचा तो वह भोचक्के के रह गए।

नोडल अधिकारी विनय प्रकाश सिंह को अख़बार में नंबर देखकर उन्होंने कॉल किया कि वह कुछ दान करना चाहती हैं।विनय प्रकाश सिंह ने उन्हें घर पर रहने की सलाह देते हुए कहा कि वे किसी को भेजकर चैक कलेक्ट करवा लेंगे।जब उनके हाथ में चेक पहुंचा तो आंखें भीग उठी।आभार शब्द इतना बौना था कि उसे लफ्जों में पिरोना मुश्किल था।इसलिए यह काम मेरे हिस्से में आया। अम्मा ने 10 -20 हजार रुपए नहीं, पूरे ₹100000 अपनी पेंशन की राशि में से दान किए।बिना फोटो सेशन, बिना प्रदर्शन और बगैर तामझाम के बेहद खामोशी से।”

वैसे तो सोशल मीडिया पर आपने दान देते हुए कई तसवीरें देखी होंगी।कभी-कभी वे दान देने वाले कि मंशा पर भी सवाल उठा देती है। कभी एक अस्पताल में एक मरीज को चार पांच लोग मिलकर एक केला देते दिख जाते हैं । तो कहीं आठ-नौ लोग मिलकर एक व्यक्ति को एक कंबल देते दिख जाते हैं। कुछ तो दानी, दानवीर कर्ण से भी आगे निकल जाते हैं। ख़ैर, यह अम्मा ने उन सबको इंसानियत की एक सीख जरूर दी है।

You may also like

MERA DDDD DDD DD