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एक पौधा धरती के नाम

कैलाश मानसरोवर आने वाले तीर्थ यात्रियों और विशिष्ट अतिथियों से पौधा लगवाया जाता है। उन्हें प्लास्टिक और पॉलीथिन का उपयोग न करने की शपथ भी दिलाई जाती है

 

जिला मुख्यालय पिथौरागढ़ स्थित पर्यटक आवास गृह व उल्का देवी मंदिर के इर्द-गिर्द बनी कैलाश मानसरोवर यात्री वाटिका, मां उल्का देवी यात्री वाटिका, शहीद स्मारक वाटिका जैसी फुलवारियां इन दिनों पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई हैं। इन फुलवारियों में खिले फूल व यहां से उठने वाली सुगंध व आस-पास की हरियाली लोगों को आनंदित कर रही है। इन फूलवारियों की महक एक ऐसे जमीनी स्तर के पर्यावरण कार्यकर्ता की सार्थकता व उसकी मेहनत का अहसास करा रही है जो निरन्तर ‘एक पौध धरती के नाम’ की मुहिम में जुटा है। इस अभियान के प्रणेता हैं, राज्य आंदोलनकारी दिनेश गुरुरानी।


जिला साहसिक पर्यटन अधिकारी के तौर पर अपनी सेवा दे रहे गुरुरानी का असल मकसद हरी-भरी धरती की परिकल्पना को साकार करना रहा है। जिसके लिए वह अपने हर क्षण का उपयोग करते रहे हैं। इसके लिए उन्होंने एक पौध धरती के नाम मुहिम चला रखी है। उनके द्वारा पर्यटन आवास गृह में आने वाले कैलाश मानसरोवर यात्रियों के साथ ही विशिष्ट अतिथियों से न सिर्फ पौध रोपण कराया जाता है, बल्कि प्लास्टिक व पॉलीथिन मुक्त प्रदेश बनाने की शपथ भी ली जाती है। पौध रोपने वाले को यह शपथ भी लेनी होती है कि यात्रा के बाद जब वह अपने घर व क्षेत्र में वापस लौटेगा तो एक पौध अवश्य धरती के नाम समर्पित करेगा। उनकी इस मुहिम में अब तक एक दो नहीं पूरे 25 हजार लोग हरी-भरी धरती व स्वच्छ हिमालय के तहत शपथ ले चुके हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा में आने वाले प्रत्येक दल के सदस्य एक पौध रोपते हैं। वह बहुत अधिक पौधे रोपने में विश्वास नहीं करते, लेकिन उनका मानना है कि जितने पौधे रोपे जायं वह जिंदा रहें। उनकी यह कोशिश सफल रही है। उनके नेतृत्व में जितने भी पौधे रोपे गये हैं वह जिंदा हैं। पर्यटक आवास गृह में जो भी शादियां आयोजित होती हैं उनके वर-वधू से परिणय पौध लगाया जाता है। सालगिरह, बर्थडे के साथ ही किसी भी शुभकार्य के समय एक पौध रोपित किया जाता है। कई मंत्री, सांसद, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सिने कलाकार, क्रिकेटर गुरुरानी की पहल पर पौध रोपित कर चुके हैं। एक पौध धरती के नाम, हिमालय बचाओ, एक दीया शहीदों के नाम, रीवर राफ्टिंग सहित कई अभियान निरंतर जारी है।

जनपद पिथौरागढ़ के पर्यटन आवास गृह के पास की बंजर जमीन से वर्ष 2013 में शुरु हुआ उनका यह अभियान पिछले पखवाड़े उत्तर की काशी के नाम से प्रसिद्व बागेश्वर नगर पहुंचा। जहां पर रीवर राफ्टिंग के लिए भाग लेने आए 57 छात्र-छात्राओं को नदी सफाई अभियान से जोड़कर सरयू नदी की वृहद स्तर पर सफाई की गई। यहां नदी के अग्नि कुंड परिसर से 70 कट्टे प्लास्टिक कूड़ा इकट्ठा कर नगरपालिका को सौंपा गया व नदी किनारे पौधे भी रोपे गये। यही नहीं महात्मा गांधी की 150 जयंतीं पर जनपद बागेश्वर के अनाशक्ति आश्रम कौसानी, पर्यटक आवास गृह कोसानी, बैजनाथ, कोटभ्रामरी देवी, कपकोट गैस एजेन्सी परिसर, चंडिका मंदिर बागेश्वर में वृहद स्तर पर सपफाई अभियान चलाया गया। इसके अलावा राजकीय इंटर कॉलेज मंडलसेरा, विक्टर मोहन जोशी इंटर कालेज, विवेकानंद विद्या मंदिर, राजकीय उच्चतर महाविद्यालय आरे व हिचौड़ी, कपकोट में जाकर वहां के छात्र-छात्राओं को पॉलीथिन मुक्त, प्लास्टिक मुक्त व प्रदूषण मुक्त उत्तराखण्ड बनाने की शपथ दिलाई। उनकी पहल पर कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रत्येक आवास गृह में शपथ रजिस्टर बनाया गया है जिसमें निगम कर्मचारियों, पर्यटकों को पोलीथिन व प्लास्टिक मुक्त प्रदेश बनाने की शपथ दिलाई जा रही है। केएमवीएन के अधिकतर अवासगृहों को पौधरोपण कार्यक्रम से जोड़ा गया है।

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