जन समस्याओं के समाधान को लेकर अधिवक्ता मनोज न सिर्फ अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं] बल्कि उपवास भी कर देते हैं। खुद के संसाधनों से पार्कों के सौंदर्यीकरण में जुट जाते हैं। उनकी यह पहल जनता में काफी लोकप्रिय हो रही है

एक जीवनम्‌ – एक अवसरः इसे ध्येय वाक्य बनाकर सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के एडवोकेट मनोज कुमार जोशी अपने सामाजिक सरोकारों एवं दायित्वों की पूर्ति में जुटे हुए हैं। वह सिर्फ समस्याओं को उजागर करने में विश्वास नहीं करते] बल्कि अपने स्तर से जितना संभव हो सकता है] समस्याओं के समाधान की तरफ भी बढ़ते हैं। मुद्दा चाहे रसोई गैस की होम डिलीवरी का हो या हैलीकॉप्टर एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराने का] अस्पतालों में डॉक्टर एवं संसाधन उपलब्ध कराने हो या प्रतियोगी परीक्षाओं का केंद्र जिला मुख्यालय में बनाने या फिर महापंचायत का गठन कर सरकार पर जनसमस्याओं के निदान के लिए दबाव समूह का] जोशी जनहित के लिए अपने अधिकतर समय का बेहतर निवेश कर रहे हैं।

इन दिनों वह हर रोज सुबह सात बजे से ^मेगा क्लीन कैंपेन^ के तहत पार्कों में साफ- सफाई करते दिख जाएंगे। नगर को साफ-सुथरा बनाने के लिए उन्होंने  क्लीन एंड ग्रीन  परिवार बनाया है जो हर रोज स्वच्छता अभियान में जुटा हुआ है। नगर के नेहरू पार्क से उनका यह अभियान शुरू हो चुका है। मात्र पार्कों की साफ -सफाई करना ही उनका उद्देश्य नहीं है] बल्कि वह खुद के संसाधनों से पार्कों का जीर्णोद्धार एवं रंगरोगन भी कर रहे हैं। नगर के लोगों को गैस की होम डिलीवरी सेवा उपलब्ध कराने के लिए वह तीन दिवसीय उपवास भी कर चुके हैं। इसके लिए वह लगातार हस्ताक्षर अभियान भी चला रहे हैं। जनपद के बीमार अस्पतालों के मुद्दे को वह पिछले कई सालों से उठाते रहे हैं। हर जनपद में हैलीकॉप्टर एम्बुलेंस सेवा की मांग उनकी प्राथमिकता में है। मनोज कहते हैं कि द्घटनास्थल से ही सीधे प्रभावित लोगों को संसाधन संपन्न अस्पतालों तक पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिए। उनका कहना है कि जब जिला अस्पतालों में सुविधाएं ही नहीं हैं] वह रेफरल केंद्र में तब्दील हो चुके हैं तो रोगी को उपचार के लिए इन केंद्रों में पहुंचाने के लिए समय एवं संसाधनों की बबार्दी क्यों होनी चाहिए? जितना समय इन बीमार अस्पतालों में गंभीर रोगियों को ले जाने में लगता है अगर उतने समय में हैलीकॉप्टर सेवा द्वारा रोगी को नजदीक के साधन संपन्न अस्पतालों में पहुंचा दिया जाए तो उसे बेहतर उपचार मिल सकता है। मरीज की जिंदगी बच सकती है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल है कि अगर सरकार अस्पतालों में डॉक्टर और संसाधन दे पाने में असमर्थ साबित हो रही है तो उसे चाहिए कि हर जिला मुख्यालय में हवाई एम्बुलेंस सुविधाओं का विस्तार करे।

मनोज कहते हैं कि जब तक समाज हित में वह कुछ सार्थक नहीं कर लेते तब तक आराम से नहीं बैठना है। गैस की होम डिलीवरी को लेकर उपवास के निर्णय पर वह बताते हैं कि सुबह से ही लोगों को लंबी लाईन में देखने के बाद मुझे लगा कि इस मुद्दे को उठाना जरूरी है। मैंने इस मुद्दे पर लोगों को अपने साथ जोड़ने की पहल की] उसके बाद तीन दिवसीय उपवास रखा। जब मैं यह कार्यक्रम करने जा रहा था तो कुछ लोगों ने मेरा उत्साह तोड़ने के लिए कहा कि तुम अन्ना नहीं हो कि लोग तुम्हारे साथ जुड़ जाएं। लेकिन मेरा कहना था कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है इसको उठाना तो जरूरी है भले ही लोग जुड़ें या न जुड़ें। लेकिन उपवास के दौरान जिस तरह का लोगों का साथ रहा उससे यह तय हो गया कि लोग इस मुद्दे से काफी गहराई तक प्रभावित रहे हैं। सैंकड़ों लोगों ने पांच-पांच द्घंटे उपवास रखा। शुरुआत में ही १५ सौ से अधिक लोग जुटे। सैकड़ों लोगों ने मौन व्रत रखा। इन अनुभवों के बाद मैंने तय किया कि गैस की होम डिलीवरी] हैलीकॉप्टर एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराने] अस्पतालों में डॉक्टर एवं संसाधन उपलब्ध कराने] सभी तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं का केंद्र जिला मुख्यालय में बनाने को लेकर मैं अदालत में जनहित याचिका दायर करूंगा। शीद्घ्र ही हम एक महापंचायत का गठन भी करने जा रहे हैं। इस पंचायत में अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतरीन काम करने वाले २१ वरिष्ठ लोगों को पंच बनाया जाएगा। पंचायत विभिन्न मुद्दों पर जनता के सवालों पर फैसला करते हुए सरकार को आदेश देगी। इस पंचायत के गठन के पीछे का उद्ेश्य जनहितों के लिए सरकार पर दबाव बनाने का है। बिन जहाज हवाई पट्टी] कागजों में लटकी रई एवं थरकोट झील] पहाड़ में ट्रेन] बदबूदार शौचालय] अधूरा बेस अस्पताल] खाली एटीएम जैसे तमाम मुद्दों को लेकर भी मनोज जागरूकता अभियान चला रहे हैं। नगर के एटीएम जनता के लिए सिरदर्द साबित हो चुके हैं। इनमें पूरे साल पर्याप्त धनराशि नहीं होती। कई एटीएम तो शो पीस बने हैं जो अधिकतर खराब ही रहते हैं। इस समय जिला मुख्यालय में विभिन्न बैंकों के ६० से अधिक एटीएम हैं] लेकिन यह लोगों को सुविधा दे पाने में असमर्थ साबित हो रहे हैं। शादियों और महत्वपूर्ण समय में यह एटीएम खाली रहते हैं। लोगों का अधिकतर समय इनमें निकल जाता है।

वर्ष २००२ से मनोज लगातार रई झील का मुद्दा उठाते रहे हैं। वह कहते हैं तब से लेकर अब तक एक नई पीढ़ी वोट देने लायक हो गई है] लेकिन अभी तक झील धरातल पर नहीं उतर पाई है। इसके लिए वह विभिन्न चरणों में ५० हजार से अधिक लोगों से हस्ताक्षर करवा चुके हैं। रई झील को अभियान का रूप देते हुए मनोज ने अपने वाहन के ऊपर एक नाव भी बनाई है वह जहां भी जाते हैं इसे लेकर साथ चलते हैं ताकि रई झील के प्रति राजनेताओं को उनके वादों की याद दिलाई जा सके। पूर्व में रई झील बनाने के राजनेताओं के आश्वासन पर उन्होंने अपनी कार से नाव भी उतारी थी] लेकिन दो साल इंतजार करने के बाद जब झील को लेकर कोई पहल नहीं हुई तो उन्होंने फिर से नाव को कार की छत पर लगा दिया और फिर से अपने अभियान में निकल पड़े हैं। नगर में आवारा कुत्तों से हो रही समस्या] महिला अस्पताल की असुविधाओं] अंधेरी गलियां] बेस अस्पताल का निर्माण] पहाड़ों में सिडकुल की तर्ज पर हिडकुल की स्थापना करने] सुरक्षित बेैरिकेटिंग युक्त सड़कों का निर्माण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को वह ंजिलाधिकारी स्तर पर लगने वाले हर जनता दरबार में पूरी शिद्दत के साथ उठाते रहे हैं।

इसके साथ ही वह बेरोजगार युवाओं के लिए ११०० दुकानों का निर्माण] हर २०० मीटर में हाईटैक टॉयलेट निर्माण] शहर में चमचमाती सोलर लाइट] अस्पतालों में बच्चों और बुजुर्गों के लिए अलग बनाने के सपनों को साकार करने के उद्देश्य को लेकर भी आगे बढ़ रहे हैं। नगर में सिटी बस और पार्कों के सौंदर्यीकरण को खुद के संसाधानों से हकीकत में बदलने के लिए जुट चुके हैं। जिसमें पार्कों के जीर्णोद्वार और सौंदर्यीकरण का उनका अभियान शुरू हो चुका है। नगर के पार्कों की साफ- सफाई] जीर्णोद्धार एवं रंगरोगन का काम खुद के संसाधनों से करना शुरू कर दिया है। पूर्व छात्र संद्घ अध्यक्ष रहे मनोज ने गरीब लोगों के लिए कपड़े जुटाने का काम भी शुरू किया है। पिछले दिनों बसंतोत्सव में उन्होंने हजारों कपड़े इकट्ठा कर सैकड़ों गरीब लोगों को वितरित किए। अब उनका सपना है कि नगर में एक ऐसा मॉल बनाया जाए जहां पर गरीब लोगों को मुफ्त में कपड़े वितरित किए जा सकें।

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