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देवभूमि के देवता

पहाड़ में पढ़े-लिखे युवा देहरादून या सुविधाजनक शहरों में ही सेवाएं करना चाहते हैं। तबादले के लिए वे राजनेताओं के चक्कर काटते रहते हैं। इसके विपरीत डॉक्टर राजीव शर्मा ने एक आदर्श मिसाल पेश की है। उत्तर प्रदेश में पढ़े-लिखे डॉ. शर्मा ने 28 साल तक सीमांत क्षेत्र कर्णप्रयाग में ही सेवाएं दी। इस दौरान उन्होंने अपनी बेहतर सेवाओं से इस कदर जनता का दिल जीता कि शासन ने उनका तबादला अन्यत्र किया तो स्थानीय लोगों ने आगे आकर रुकवा दिया। डॉ. शर्मा की तरह चमोली की जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया और रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश घिल्डियाल भी आदर्श नौकरशाह साबित हो रहे हैं

 

उत्तराखण्ड में सरकारी कर्मचारियों का ट्रांसफर एक उद्योग का रूप ले चुका है। राजनीतिक पार्टियों के छुटभैये नेता से लेकर दलाल तक कर्मचारियों का उनकी मनचाही जगहों पर तबादला करवाने के लिए सक्रिय रहते हैं। हर कर्मचारी सुविधाजनक सुगम स्थलों खासकर देहरादून या फिर किसी अन्य पसंदीदा शहर में ट्रांसफर चाहता है। पहाड़ में पढ़-लिखकर नौकरी प्राप्त करने वाले लोग ही पहाड़ में रहकर सेवाए नहीं करना चाहते हैं। इसके विपरीत बहुत से लोग ऐसे हैं जिनका जन्म, लालन-पालन और शिक्षा-दीक्षा तो मैदानी इलाकों या उत्तर प्रदेश में हुई, लेकिन उन्होंने वर्षों तक पहाड़ में सेवाएं दी। सेवाएं भी इतनी लगन और मेहनत से दी कि लोग उन्हें अपना देवता या भगवान तक कहने लगे। जब उनका ट्रांसफर होता है तो लोग उनके लिए फूट-फूटकर रोते हैं और अंततः सरकार से लड़- झगड़कर उनका ट्रांसफर तक रुकवा देते हैं। दायित्व निर्वाह की ऐसी मिसाल उन युवाओं के लिए सबक है जो दलालों को पैसा देकर मैदान में अपने ट्रांसफर करवाते हैं।

राज्य के सीमांत चमोली जिले के कर्णप्रयाग में कार्यरत डॉक्टर राजीव शर्मा ने पहाड़ी क्षेत्र में अपनी बेहतर सेवाओं के माध्यम से जनता का इस कदर दिल जीता कि लोग उन्हें भगवान मानते हैं। वे एक युवा सर्जन के रूप में वर्षों पहले कर्णप्रयाग अस्पताल में आए थे और तब से निरंतर यहीं सेवाएं देते रहे। जनता के प्रति और अपने दायित्व के प्रति उनका समर्पण भाव ही रहा कि दो बार उनका तबादला हुआ तो लोग आगे आए और ट्रांसफर रुकवा दिया। नतीजा यह है कि कर्णप्रयाग में कार्यरत रहे डॉ राजीव शर्मा को पुनः कर्णप्रयाग नियुक्त कर दिया गया है। इससे पहले वे यूपी काडर होने के कारण उप्र के लिए कार्यमुक्त कर दिए गए थे।

सेवा के दौरान डॉ. शर्मा के जनता से मधुर संबंध बन गए थे। लिहाजा अपने ट्रांसफर पर उन्होंने एक मार्मिक संदेश दिया।
सुप्रभात मित्रो,

कर्णप्रयाग अस्पताल से गहरा भावनात्मक रिश्ता है मेरा। सर्जरी की परास्नातक डिग्री हासिल करते ही एक युवा सर्जन के रूप में यहां आया और आज मध्यायु के रूप में विदा ले रहा हूं। मुझे खुशी है कि कर्णप्रयाग की पहचान एक सर्जरी केंद्र के रूप में पूरे उत्तराखण्ड में बनी जिसमें मेरे सभी सहयोगी चिकित्सकों, सभी उच्चाधिकारियों एवं बहुत ही अच्छे कर्मचारी स्टाफ का मुझसे भी बड़ा योगदान है। इसी अपनेपन की भावना से ओत-प्रोत होकर अपनी लंबी कर्मयात्रा का उपसंहार लिखना उचित समझा और लिख दिया। मेरा आग्रह है कि पोस्ट को राजनीति में न ले जाएं। सभी विचारधाराओं, जनप्रतिनिधियों, पार्टियों ने मुझे संबल दिया। माननीय विधायकगण भी सकारात्मक रूप से प्रयासरत रहे, किंतु मामला शायद तकनीकी है।

किसी का कोई दोष नहीं। मैंने इस सीमांत क्षेत्र की जनता से सक्रिय संवाद स्थापित करने की चेष्टा की और काफी हद तक सफल रहा। विदाई की इस बेला में कोई कटुता नहीं। मेरा यहां के अतिरिक्त कहीं कार्य करने का कोई अनुभव नहीं। लगता है, कहीं और रह पाऊंगा या नहीं।

सस्नेह!
डॉ. राजीव शर्मा का एक अन्य संदेश इस प्रकार हैः-
प्रणाम देवभूमि!
अलविदा सीएचसी कर्णप्रयाग

कहते हैं पहाड़ का पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आए। 1992 की शुरुआत में कर्णप्रयाग आते ही जैसे मैं पहाड़ का ही हो गया। नियति ने मेरी जवानी पहाड़ के नाम ही लिखकर यहां भेजा था, जो मैंने खुशी-खुशी आप सबके प्यार, दुलार एवं कभी-कभी तकरार से यहीं बिता दी। इसका मुझे संतोष और गर्व है। शायद ये पूर्व जन्म का रिश्ता ही रहा होगा तभी तो जहां आज के आधुनिक और साधन-सुलभ समय में भी कोई पोस्ट ग्रेजुएट स्पेशलिस्ट यहां आने से कतराते हैं, किस अदृश्य शक्ति ने आज से सत्ताइस- अट्ठाइस साल पहले मुझे यहां रुकने को प्रेरित किया। निश्चय ही यह आपका असीम प्रेम एवं विश्वास था। परिवर्तन शाश्वत नियम है और मैं इसे सहर्ष शिरोधार्य करता हूं। इस कर्मयात्रा में मुझसे कुछ भूल-चूक एवं त्रुटियां भी अवश्य हुई होंगी जिन्हें आपके अपार प्रेम ने सदा ही भुला दिया। वो, जिन्होंने मेरी सराहना की वो भी, जिन्होंने आलोचना की, मेरे मार्गदर्शक बने। यहां बिताया समय मेरे जीवन की अमूल्य थाती है। नव-पथ पर सहर्ष, सोत्साह बढ़ने को सज्ज हूं, यही जीवन है।

मेरे समस्त साथी, कर्मचारी, माननीय जनप्रतिनिधिगण एवं उच्च अधिकारियों ने सदा मुझे दुलार दिया और मुझमें विश्वास किया। मीडिया ने भी समय-समय पर सुदूर पर्वतों में सेवा को प्रचारित एवं प्रोत्साहित किया। मैं उनका ऋणी रहूंगा, ये सब मेरी प्रेरणा बने। मेरी पत्नी, जो आरंभ से ही मेरे पांव न उखाड़ कर, पहाड़ के अपेक्षाकøत कठिनतर जीवन पर मेरी सहगामिनी बनी और मुझसे अधिक कार्य किया, का भी हृदय से आभारी हूं। मेरे पूज्य पिताजी और मां, परिवार एवं गांव के बुजुर्गों ने कभी मुझे पहाड़ छोड़कर अपने नजदीक रहने को विवश नहीं किया। सुदूर ग्रामीण एवं पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं को पहुंचाने के सरकारों के अथक प्रयासों मात्र से सफलता नहीं मिलने वाली। हम चिकित्सकों को अपने जीवन का एक अच्छा भाग इन वंचित क्षेत्रों की सेवा में अर्पित करने को मन से (बल से नहीं) तैयार रहना होगा, तभी हम संपूर्ण भारत को सही मायनों में स्वस्थ- समृद्ध कर पाएंगे।

कर्णप्रयाग! तुम सदा, सादर-स्मरण रहोगे!

बेहतर सेवाएं दे रहे अधिकारी


डॉ. शर्मा की तरह ही सीमांत क्षेत्र में इन दिनों एक प्रशासनिक अधिकारी स्वाति एस भदौरिया अपने कामकाज से लोगों के दिलों में जगह बना रही हैं। वे तीर्थ यात्रियों के लिए अच्छी सेवाएं देने को प्रयासरत हैं। इस बार बदरीनाथ एवं हेमकुंड साहिब की यात्रा पर तीर्थयात्रियों का सैलाब उमड़ रहा है, जिससे जोशीमठ क्षेत्र में तीर्थयात्रियों की आवासीय समस्या के दृष्टिगत 8 जून को जिला प्रशासन द्वारा जोशीमठ शहर स्थित संस्कøत महाविद्यालय एवं राजकीय इंटर कॉलेज में तीर्थयात्रियों के लिए आवासीय व्यवस्था की गई। इसके साथ ही यात्रियों को कम्बल, गद्दा, चटाई, विस्तर और उनकी मांग के अनुसार भोजन सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।

चमोली की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि 8 जून को यात्रा मार्ग और प्रमुख पड़ावों के साथ ही बदरीनाथ धाम में तीर्थयात्रियों की जबर्दस्त भीड़ रही। सभी होटल एवं रैनबसेरे यात्रियों से खचाखच भरे रहे। यात्रियों की आवासीय समस्या को देखते हुए यात्रा मार्ग पर जोशीमठ में संस्कøत महाविद्यालय एवं जीआईसी में लगभग 700 तीर्थयात्रियों के लिए जिला प्रशासन की ओर से ठहरने की व्यवस्था की गई। तीर्थयात्रियों को रजाई, गद्दा, विस्तर अन्य उनकी मांग के अनुसार भोजन सामग्री उपलब्ध कराई गई। 8 जून की रात्रि को संस्कøत महाविद्यालय में लगभग 200 तीर्थयात्री ठहरे थे, जबकि जीआईसी में भी तीर्थयात्रियों के लिए कम्बल, रजाई, गद्दे सहित ठहरने के पूरे इंतजाम किए गए थे। जिलाधिकारी ने बताया कि यात्रा मार्ग पर यात्रियों को आवासीय समस्या से न जूझना पडे़ इसके लिए यात्रा मार्ग के निकट स्थित विद्यालयों में तीर्थयात्रियों की आवासीय व्यवस्था के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया जा चुका है।


रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल भी अपने अच्छे काम की वजह से आम जनता के बीच काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। वे आम यात्री बनकर 9 जून की आधी रात के बाद केदारनाथ धाम के प्रमुख पड़ाव गौरीकुंड पहुंचे तो हकीकत आंखे खोलने वाली थी। पड़ावों पर गंदगी से पटे शौचालय, पानी की सूखी टोटियां, पुलिसकर्मियों की लापरवाही देख जिलाधिकारी का पारा चढ़ गया। यात्रा व्यवस्थाओं में लापरवाही की इंतेहा देख उन्होंने गौरीकुंड के सेक्टर मजिस्ट्रेट का तबादला केदारनाथ कर दिया। वह यहीं पर नहीं रुके, तत्काल जलसंस्थान के सहायक अभियंता और अवर अभियंता के निलंबन की संस्तुति कर डाली। गौरीकुंड में सुलभ शौचालय का हाल देख उन्होंने सुलभ इंटरनेशनल पर पांच लाख का जुर्माना ठोका। डीएम पुलिस अधीक्षक को कहा कि गौरीकुंड के चौकी प्रभारी को भी तत्काल हटाया जाए। पूरी रात उन्होंने गौरीकुंड के घोड़ा पड़ाव पर यात्रियों के बीच गुजारी। दोपहर 12 बजे वह मुख्यालय लौटे।

बताते चलें कि बद्रीनाथ की यात्रा पर 8 जून तक 4 लाख 98 हजार 588 तीर्थयात्री दर्शन का पुण्य अर्जित कर चुके हैं, जबकि हेमकुंड साहिब में 51 हजार 211 श्रद्वालु दर्शन कर चुके हैं।

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