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जिंदा है आंदोलन का जज्बा

  • वनों पर परंपरागत हक-हकूक के लिए आज भी तिलाड़ी के लोग पीछे नहीं हैं। हर साल तिलाड़ी कांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए जुटते हैं। अपनी समस्याओं को लेकर आंदोलन की रणनीति बनाते हैं

उत्तराखण्ड में 30 मई का दिन एक ‘काले अध्याय’ के तौर पर जाना जाता है। आज से 89 वर्ष पूर्व 1930 में इस दिन रंवाईं घाटी के तिलाड़ी मेैदान में वनों पर अपने हक-हकूक के लिए आंदोलन कर रहे सैकड़ों लोगों पर गोलियों चला दी गई थी। तत्कालीन टिहरी रियासत के दीवान चक्रधर जुयाल ने राज्य के सेनापति नत्थुसिंह सजवाण को आंदोलनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया था। आंदोलनकारी जनता पर तीन ओर से गालियां बरसाई गई। चैथी ओर भागे तो वहां यमुना बह रही थी।  कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए उफनती यमुना में कूदे, लेकिन नदी की प्रबल धारा में बहते चले गए। इतिहासकार इस नरसंहार को ‘उत्तराखण्ड का जलियांवाला बाग’ हत्याकांड के नाम से परिभाषित करते हैं। यह तत्कालीन टिहरी रियासत के महाराजा नरेंद्र शाह के राज में गढ़वाल की जनता पर किये जा रहे जुल्मों की एक भयंकर बानगी थी।
 तिलाडी कांड के शहीदों की याद में इस वर्ष आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों ने राज्य सरकार को एक ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया जिसमें 30 मई को ‘वनाधिकार दिवस’ के तौर पर मनाए जाने की मांग की गई है। साथ ही पूरे क्षेत्र में विवाह आदि मांगलिक कार्यों में शराब और तम्बाकू के प्रयोग पर प्रंतिबंध लगाए जाने की मांग की गई। प्रति वर्ष पर्यावरण के सरंक्षण के लिए पौधा रोपण करने का भी निर्णय लिया है।
तिलाड़ी कांड में शहीद ग्रामीणों को सरकार आंदोलनकारी का दर्जा दे रही है। उनकी दो पीढ़ियों को आंदोलनकारियों के परिजन मानने के लिए भी जिला प्रशासन को आदेश जारी किया है, लेकिन ग्रामीणों की मांग है कि कम से कम चार पीढ़ियों को आंदोलनकारी परिजन होने का दर्जा दिया जाए। यह बात इसलिए भी जरूरी है कि 89 वर्ष पूर्व जो भी ग्रामीण तिलाड़ी कांड में शहीद हुए थे उनकी दूसरी पीढ़ी अब जीवित नहीं है, जबकि मौजूदा समय में तीसरी और चैथी पीढ़ी ही मौजूद है।
तिलाड़ी क्षेत्र की जनसमस्याओं को लेकर भी आवाज उठती रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक क्षेत्र के 28 गांवों में एक भी स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। सर्दियों में दो माह तक इस क्षेत्र का संपर्क सड़क मार्ग से भी कट जाता है। 30 किमी तक की सड़क वर्फ औेर पाले के चलते डेढ़ दो माह तक बाधित रहती है। जिसके चलते पैदल ही आवागमन हो पाता है। इस दौरान बीमार हुए लोगों के लिए कोई भी चिकित्सा सुविधा नहीं है। 35 किमी दूर बड़ेथी में ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है जो कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए बहुत दूर पड़ता है। हालांकि कोटधार में हर प्रकार की सुविधा है, लेकिन खेती के लिए सिंचाई की बहुत कमी है। कुछ ही स्थानों में सिंचित खेती हो पाती है, अन्य के लिए बरसात पर ही निर्भर रहना पड़ता है। वनों पर अपने नैसर्गिक और परंपरागत हक-हकूक के लिए आंदोलन करने पर आज भी इस क्षेत्र के लोग पीछे नहीं है। वनों का आज भी स्थानीय ग्रामीणों द्वारा संरक्षण किया जाता है, लेकिन कड़े वन अधिनियम के चलते ग्रामीण वनों से उतना संवेदनशील होकर नहीं जुड़ पा रहे हैं जितना सदियों से जुड़ते रहे हंै। आज भी इस क्षेत्र में वन से उपज आदि के लिए वन विभाग की तमाम तरह की अनुमति लेनी पड़ती है जो कि ग्रामीणों के लिए किसी दुश्वारी से कम नहीं है।
 आज उत्तराखण्ड के किसान और ग्रामीण वनाधिकार आंदोलन में तेजी से जुड़कर इसके लिए काम करने लगे हैं। 30 मई को देहरादून, तिलाड़ी कोटधार, अल्मोड़ा चमोली और कई स्थानांे पर वनाधिकार आंदोलन के लिए गोष्ठियों का आयोजन किया गया। मौजूदा समय का यह आंदोलन जिस तरह तेजी से अपना स्थान बना रहा है। उससे लगता हैे कि सरकार को इस पर गंभीरता से सोचना होगा।

‘दि संडे पोस्ट’ को सम्मान

‘दि संडे पोस्ट’ समाचार पत्र ने वनाधिकार आंदोलन को प्रमुखता से स्थान दिया है। इस आंदोलन के हर विचार-विमर्श और गोष्ठियों के अलावा देश के सभी राजनीतिक दलों और सांसदों को इस आंदोलन से जोड़ने की कवायद को भी ‘दि संड़े पोस्ट’ ने प्रमुखता से स्थान दिया। जनसरोकार से जुड़े समाचारांे के चलते ‘दि संडे पोस्ट’ की अपनी एक खास पहचान स्थापित हो चुकी है। यही वजह है कि उत्तरकाशी जिले के सुदूर क्षेत्र बनचैरा कोटधार में तिलाड़ी कांड के बलिदानियांे को श्रद्धांजलि देने पहुंचे क्षेत्र के लोगों ने कि ‘दि संडे पोस्ट’ के प्रति उत्साह दिखाया। कोटधार के ग्रामीणों ने जनसरोकारों से जुड़े समाचारों के संकलन हेतु ‘दि संडे पोस्ट’ को सम्मानित किया। पत्र के विशेष सवांददाता कृष्ण कुमार ने यह सम्मान ग्रहण किया।
‘दि संडे पोस्ट’ को वनाधिकार आंदोलन पर लिखने के लिए अभिनंदन और स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। यह सम्मान ‘दि संडे पोस्ट’ को जनसरोकारी पत्रिका और दूरस्थ क्षेत्रांे की समस्याओं पर समाचारों के प्रकाशन के लिए  मिला है।
3 Comments
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