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‘आज का अभिमन्यु’, मृगेंद्र राज ने महज 12 वर्ष की उम्र में लिखी 136 किताबें

कहते हैं होनहार बिरवान के होत चिकने पात अर्थात जो पौधा आगे चलकर बड़ा वृक्ष होने वाला होता है छोटा होने पर भी उसके पत्तों में कुछ ना कुछ चिकनाई होती है इस बात को आज का आज के अभिमन्यु नाम से प्रसिद्ध मृगेंद्र राज ने साबित कर दिया है। महज  6 वर्ष की उम्र से लेखनी में पारंगत मृगेंद्र राज ने अब तक 136 किताबें लिखी हैं जिनमें रामायण के पात्रों पर आधारित 51 बायोग्राफी भी है।
 मृगेंद्र राज का जन्म 12 जून 2007 को फ़ैज़ाबाद वर्तमान जिला अयोध्या,उत्तर प्रदेश में हुआ था। मृगेंद्र राज अभी कक्षा सात के छात्र हैं। इनकी माता का नाम श्रीमती शक्ति पाण्डेय और पिता का नाम राजेश पाण्डेय है।
मृगेंद्र राज की माँ एक निजी स्कूल में टीचर हैं और पिता उत्तर प्रदेश के गन्ना विभाग में कर्मचारी हैं।
 मृगेंद्र राज ने 12 वर्ष की आयु में कुल मिलाकर 78 बायोग्राफी के साथ 136 पुस्तकें लिखी हैं। कलम के नन्हें सिपाही को अनेक विषयों में रुचि है, जैसे, भारतीय संविधान, राज्य व्यवस्था, भूगोल, इतिहास आदि । मृगेंद्र टीवी चैनलों पर भी अनेक कार्यक्रम में सहभाग करते रहते हैं जिसमें वह अपने उत्कृष्ट काव्य को पढ़कर सबके मन को मोह लेते हैं। मृगेंद्र राज को अभी तक 100 से अधिक सम्मान दिया जा चुका है।साथ ही मृगेंद्र राज के नाम चार विश्व रिकॉर्ड दर्ज़ हैं।
जिनमें पहला है ‘यंगेस्ट पोएट ऑफ दि वर्ल्ड’, दूसरा ‘यंगेस्ट मल्टीडाइमेंशनल राइटर ऑफ दि वर्ल्ड’, ‘यंगेस्ट प्रोलोफिक राइटर ऑफ दि वर्ल्ड’ और ‘यंगेस्ट टू ऑथर मोस्ट बियोग्राफिज़ ऑफ दि वर्ल्ड’ है।
मृगेंद्र राज ने हमें बताया कि उनका पांचवा विश्व रिकॉर्ड जल्द ही पूरा होने वाला है।
मृगेंद्र राज का नई पीढ़ी के नाम संदेश :
“आज हम बच्चों की जो पीढ़ी है, तकनीकी और सूचना क्रांति के दौर से गुजर रही है, यह इसे हथियार तो बनाये लेकिन यह पीढ़ी प्रेमचंद को भी पढ़े, तुलसी बाबा  , कबीर को भी। विज्ञान को तो पढ़े ही लेकिन किस्से ,कहानियाँ, चुटकुले भी पढ़े तो हमारा, समाज और देश का जो विकास होगा उसकी आभा, वैश्विक स्तर पर निराली होगी,हाँ इसमें सत्ता नशीनों को भी अपनी जिम्मेदारियां सच्चाई से देखनी चाहिए।”
रामायण के पात्रों पर किताब लिखने पर मृगेंद्र राज ने कहा कि मैंने रामायण के 51 पात्रों का विश्लेषण करने के बाद यह किताबें लिखी हैं। मेरी पुस्तकों के पृष्ठों की संख्या लगभग 25 से 100 पृष्ठों के बीच में है।
136 पुस्तकों में 78 बॉयोग्राफी के साथ,नदियों की दुर्दशा पर एक पुस्तक, संवेदना को झकझोरने वाले 2 उपन्यास,  माँ  पर एक पुस्तक, रामायण के पात्रों पर 51 पुस्तक , एक काव्य संग्रह ,एक पुस्तक गन्ने की खेती पर,एक पुस्तक कृषि विश्व विद्यालय पर  आदि शामिल है।
मृगेंद्र राज ने हमसे बातचीत के दौरान बताया कि उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर उन्होंने 2017 में एक किताब लिखी थी, जिसे वह उन्हें भेंट करना चाहते हैं।आपकी यह मनोकामना जल्द पूरी हो मृगेंद्र।
मृगेंद्र राज, कविता लेखन में भी परांगत हैं, उनकी एक रचना प्रस्तुत है:
‘वृद्ध मां-बाप’
बच्चे को दो बूंद मिल जाये,
इसके लिये माँ ने अपने को छुहारे की तरह सुखा दिया
वह खूब पढ़े, आगे बढ़े,
इसके लिए बाप ने अपना सर्वस्व लुटा दिया
लेकिन अब वही काबिल बच्चा, माँ बॉप के खाँसने से घिनाता है
उनकी जर्जर शरीर सर,उठ रही चहुँ ओर पीर से मन ही मन, भुनभुनाता है
माँ तब भी कहती है,
बचपन से ही ऐसा था
जाओ बेटा कुछ खा पीकर,
सर पांव में तेल लगा लो
हे ऊपरवाले! मेरे बच्चे को सलामत रखना,
लेकिन अब मुझे अपने पास बुला लो।
 – मृगेंद्र राज
मृगेंद्र राज ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि परिस्थितियां परिवर्तनशील होती हैं, परिस्थितियों को जानने वाला अपरिवर्तनशील होता है।मृगेंद्र राज निश्चित ही एक सत चित्त आनन्द आत्मा है। एक दिन वह अपनी मेहनत से आगे चलकर साहित्य के फलक पर बहुत बड़ा नाम दर्ज करने वाला है।अभी हाल ही में मृगेंद्र को वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी,लंदन से डॉक्टरेट करने के लिए आमंत्रित किया गया है। मृगेंद्र ऐसे ही विश्व पटल पर सफलताएं प्राप्त करते रहें। शुभकामनाएं।

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