‘बायजूस’ कभी भारत का सबसे बड़ा और कीमती स्टार्टअप हुआ करता था। बमुश्किल डेढ़ साल पहले इसकी वैल्यूएशन 22 अरब डॉलर थी। यानी इसकी लागत एक लाख 80 हजार करोड़ रुपये थी जो धीरे – धीरे काम होती जा रही है। मुख्य रूप से इसे कोरोनाकाल में लोकप्रियता प्राप्त हुई जब इसने एप के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करना शुरू किया।
लेकिन पिछले कुछ समय से लगातार इसकी डिमांड कम होती जा रही है। जिसके कारण कम्पनी एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी करने जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी इस वित्त वर्ष में 3 हजार 500 कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है। यह पहली बार नहीं है इससे पहले भी कंपनी कई बार कर्मचारियों को छंटनी कर चुकी है।

पीटीआई भाषा की रिपोर्ट के ‘‘ फिलहाल कोई छंटनी नहीं हुई है। कंपनी विभिन्न इकाइयों में मांग के मद्देनजर स्थिति का आकलन कर रही है। करीब एक हजार लोग पहले ही ‘नोटिस पीरियड’ पर काम कर रहे हैं और अन्य एक हजार ने अपने प्रदर्शन सुधार मापदंडों को पूरा नहीं किया है। आकलन अब भी किया जा रहा है। इस पूरी कवायद से 3 हजार से 3 हजार 500 कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं।’
कैसे शुरू हुआ ‘बायजूस’
कन्नूर के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक करने वाले बायजूस रवींद्रन ने शुरुआत में दोस्तों और छात्रों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया था। वर्ष 2011 में बायजूस की मूल कंपनी, थिंक एंड लर्न लॉन्च की गई थी। 2015 में कंपनी का ‘बायजूस’ एप आया। इसके बाद तो देश में इंटरनेट की लहर पर सवार होकर ‘बायजूस’ ने तेजी से रफ्तार पकड़ ली। फिर आया कोविड का दौर, जब स्कूल बंद हुए तो स्क्रीन पर पढ़ाई का माहौल बन गया और मेहरबानी यह हुई कि कोरोनाकाल में इसकी रफ्तार तेज हो गई। इस दौरान बायजूस ने कई अधिग्रहण किए।
अगस्त 2020 में इसने ‘व्हाइट हैट जूनियर’ को 300 मिलियन डॉलर में खरीदा। 2021 में 150 मिलियन डॉलर में ‘टॉपर’ खरीदा। 600 मिलियन डॉलर के सौदे में सिंगापुर की ‘ग्रेड लर्निंग’ उसकी झोली में चली गई। कैलिफोर्निया का डिजिटल रीडिंग प्लेटफॉर्म ‘एपिक’ भी इसका बन गया। यह सौदा 500 मिलियन डॉलर का था।
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