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सुशांत सिंह राजपूत केस CBI के हवाले, केंद्र ने नीतीश के सिफारिश को माना

सुशांत सिंह राजपूत केस CBI के हवाले, केंद्र ने नीतीश के सिफारिश को माना

केंद्र सरकार ने सुशांत सिंह राजपूत केस में सीबीआई जांच की मांग को बुधवार कोमान लिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रतिभाशाली अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की सच्चाई सामने आनी ही चाहिए।

केंद्र की तरफ से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले की सुनवाई शुरू होते ही पीठ को सूचित किया कि इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की बिहार सरकार की सिफारिश उसने स्वीकार कर ली है।

सोशल मीडिया पर इस बात की सूचना मिलते ही रिक्शन आने शुरू हो गए हैं। सुशांत की एक्स गर्लफ्रेंड अंकिता लोखंडे ने भी ट्वीट कर इसके लिए आभार जताया है। अंकिता ने लिखा, “आभार…हम जिस मौके का इंतजार कर रहे थे, आखिरकार वह आ ही गया।”

वहीं न्यायमूर्ति ऋषिकेष राय की एकल पीठ ने महाराष्ट्र और बिहार सरकार के साथ ही सुशांत सिंह राजपूत के पिता के. के. सिंह को निर्देश दिया कि वे अभिनेत्री रिया चक्रवती की याचिका पर तीन दिन के भीतर जवाब दाखिल करें।

मालूम हो कि रिया चक्रवर्ती ने सुशांत के पिता द्वारा पटना में दर्ज कराई गई प्राथमिकी मुंबई पुलिस के पास भेजने का अनुरोध करते हुए न्यायालय में याचिका दायर कर रखी है। इसलिए शीर्ष अदालत ने रिया की याचिका अगले सप्ताह के लिए सूचीबद्ध करते हुए मुंबई पुलिस को सुशांत की मृत्यु के मामले में अब तक की जांच की प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई करते हुए कहा, “रिया चक्रवर्ती की याचिका पर महाराष्ट्र सरकार जवाब दाखिल करे और जहां तक इस कलाकार की मृत्यु का सवाल है तो सच्चाई सामने आनी ही चाहिए।”

पीठ ने आगे कहा कि इस मामले में एक विलक्षण प्रतिभा वाले कलाकार का निधन हुआ है। पीठ ने कहा कि उसके समक्ष उठाया गया बुनियादी मुद्दा यह है कि इस मामले की जांच का किस पुलिस को अधिकार है।

वहीं सुशांत के पिता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि अगर उच्चतम न्यायालय इस मामले की विवेचना करता है तो उन्हें कोई परेशानी नहीं है लेकिन रिया चक्रवर्ती को संरक्षण देने वाला कोई आदेश पारित नहीं किया जाना चाहिए।

अधिवक्ता विकास सिंह ने मुंबई पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा, “महाराष्ट्र पुलिस इस मामले में साक्ष्य नष्ट कर रही है और फिलहाल उसे बिहार पुलिस के साथ जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।”

जबकि महाराष्ट्र की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आर. बसंत ने कहा, “इस मामले मे प्राथमिकी दर्ज करने या फिर जांच करने का पटना पुलिस को कोई अधिकार नहीं है और अब इसे एक राजनीतिक मामला बना दिया गया है।”

पीठ ने कहा, “पुलिस अधिकारी (बिहार की) को क्वारंटीन करने का अच्छा संदेश नहीं गया है। हालांकि, मुंबई पुलिस की बेहतरीन छवि है। पीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सब कुछ कानून के अनुसार ही हो।”

महाराष्ट्र सरकार ने इस पर पीठ से कहा, “हम पेशेवर तरीके से ही अपना काम कर रहे हैं और मुंबई पुलिस को इस तरह से लांछित करना अनुचित है।” आगे रिया चक्रवर्ती की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि इस मामले के लंबित होने के दौरान उसके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

पीठ ने इस पर टिप्पणी किया, “हम चाहते हैं कि सभी पक्ष संयम बरतें। वकील यहां पर हैं और निश्चित ही सबने आपको सुना है।” बता दें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुशांत के पिता के अनुरोध पर मंगलवार को इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश केंद्र से की थी।

 

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