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राजनीति में स्टार्स का तड़का

सिनेमा और राजनीति का पुराना रिश्ता रहा है। फिल्मी सितारे आज से नहीं, बल्कि 1967 से राजनीति में अपनी किस्मत आजमाते आ रहे हैं। फिल्मी सितारों को राजनीति के मैदान में लाने की परंपरा हालांकि पहली बार कांग्रेस ने शुरू की, लेकिन बाद में भाजपा और अन्य पार्टियों ने भी इसे जमकर आगे बढ़ाया। अब तक के चुनावों को देखा जाए तो 2014 में सबसे ज्यादा सितारों ने राजनीति में किस्मत आजमाई। इसमें टीएमसी से मुन मुन सेन और संध्या रॉय, भाजपा से हेमा मालिनी, परेश रावल, बाबुल सुप्रीयो, किरण खेर और भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी के नाम प्रमुख हैं। आइए जानते हैं अतीत में किन सितारों ने लोकसभा चुनाव लड़ा और इस बार नए कौन से चेहरे मैदान में हैं।

2019 के लोकसभा चुनाव में ग्लैमर का तड़का भी खूब लग रहा है। कहीं बॉलीवुड के सितारे हैं तो कहीं भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार। इन सितारों के बहाने राजनीतिक पार्टियां वोटरों को लुभाने में जुटी हैं। भाजपा के साथ इस बार पूर्वांचल से जुड़े भोजपुरी के तीनों बड़े स्टार हैं। मनोज तिवारी, रवि किशन और दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’। अब यह तिकड़ी भाजपा में शामिल हैं। पिछले दिनों दिनेश लाल यादव लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने के बाद भाजपा में शामिल हो गए। हालांकि मनोज तिवारी 2014 में ही उत्तर पूर्वी दिल्ली से भाजपा के टिकट पर लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं। इसी वर्ष रवि किशन भी कांग्रेस की तरफ से जौनपुर सीट से चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन हार गए थे। इस बार रवि किशन भाजपा के टिकट से लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करना चाहते हैं। ऐसे में भोजपुरिया बेल्ट खासकर पूर्वांचल में भाजपा इन तीनों सुपरस्टार्स के जरिए 2019 के लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की आस में है। चुनाव में वह पार्टी को कितना फायदा पहुंचाते हैं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

हाल ही में कांग्रेस ज्वाइन कर पूरी तरह चुनावी रंग में रंग चुकी अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर नॉर्थ मुंबई लोकसभा सीट से अपनी किस्मत आजमाने निकली हैं। उर्मिला मुंबई के गोरई इलाके में ऑटो चालक के साथ नजर आईं और ऑटो भी चलाया।

 

वर्ष 1999 में राज बब्बर की राजनीति की शुरुआत समाजवादी पार्टी से हुई और वह लगातार दो बार (1999, 2004) आगरा से चुनाव जीते। इसके बाद वह 2009 में कांग्रेस के टिकट पर फिरोजाबाद से लड़कर चुनाव जीते। फिर 2014 में उन्हें गाजियाबाद से लड़ाया गया, लेकिन वीके सिंह से उन्हें पराजित होना पड़ा। इस बार फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट पर उनकी वापसी ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। यहां से वह दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। राजबब्बर के यहां आने से भाजपा के सामने सीट बरकरार रखने की चुनौती है। हालांकि दांव पर कांग्रेस की प्रतिष्ठा भी लगी है।

 

2004 में तीन बड़े सितारों ने अलग-अलग पार्टियों का दामन थामा। इसमें गोविंदा कांग्रेस का, भाजपा का धर्मेंद्र और समाजवादी पार्टी का जयाप्रदा ने। 2004 में नॉर्थ मुंबई सीट से अभिनेता गोविंदा कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते और 50 हजार वोटों से भाजपा के बड़े नेता राम नाईक को हराया था। लेकिन गोविंदा राजनीति में अपना स्टारडम बरकरार नहीं रख पाए और 2008 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। अब चर्चा है कि गोविंदा को मध्य प्रदेश के इंदौर से चुनाव लड़ाया जा सकता है। धर्मेंद्र 14वीं लोकसभा चुनाव में राजस्थान के बीकानेर से भाजपा की ओर से लोकसभा प्रत्याशी रहे। जयाप्रदा 2004 से 2014 तक रामपुर सीट से सांसद रही हैं। इस बार उनकी दावेदारी सपा के उम्मीदवार आजम खान के खिलाफ है। राजनीति का महारथी वही बनता है जो यहां अवसरों का खेल समझ सके। अवसरों की इसी तलाश में जया इस बार भाजपा में शामिल हो गई और पार्टी ने इसी सीट से उम्मीदवार घोषित किया है। हालांकि जया के अलावा दोनों ही अभिनेता राजनीति में चमक नहीं पाए।

हेमा मालिनी 2003 से 2009 तक राज्यसभा सदस्य रहीं। भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें मथुरा सीट से खड़ा किया और वे भारी मतों से विजयी हुईं। इस बार भी हेमा मथुरा सीट से ही चुनाव लड़ रही हैं।

स्मृति ईरानी ने 2003 में भाजपा ज्वाइन किया। 2004 में वे महाराष्ट्र यूथ विंग की उपाध्यक्ष चुनी गईं। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के बाद वे कैबिनेट मिनिस्टर बनीं। वे राज्यसभा की सदस्य हैं और इस बार भी अमेठी से चुनाव लड़ेंगी।

भाजपा से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले शत्रुघ्न सिन्हा ने राजेश खन्ना के खिलाफ अपना पहला चुनाव लड़ा था। 2002 से 2003 तक अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वो हेल्थ और फैमिली वेल्फेयर के कैबिनेट मंत्री रहे। लगातार दो बार (2009, 2014) पटना साहिब लोकसभा सीट से चुनाव जीते।

इन दिनों चुनाव के माहौल में गीत-संगीत से कुछ अलग ही रंग जम रहा है। अभिनेत्री से नेता बनीं मुनमुन सेन आसनसोल से तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार हैं। चुनाव प्रचार के दौरान वे आदिवासी महिलाओं के साथ ढोल की थाप पर थिरकीं। सेन बॉलीवुड के साथ ही बांग्ला फिल्मों में अपनी ग्लैमरस भूमिकाओं के लिए जानी जाती हैं।

इस चुनाव में भाजपा की सरकार बनी थी। वहीं चुनाव से पहले कृष्णम राजू और विनोद खन्ना भाजपा में शामिल हुए। राजू आंध्र के काकीनंदा और विनोद 1998 से 2009 तक गुरदासपुर से सांसद रहे।

राजीव गांधी के समय में हुए लोकसभा चुनाव में तीन बड़े फिल्मी सितारे कांग्रेस से जुड़े। इसमें अमिताभ बच्चन (इलाहाबाद), सुनील दत्त (नॉर्थ वेस्ट मुंबई), वैजयंती माला (मद्रास साउथ) से जीतकर आए। इन तीनों ने चुनाव में जीतकर नए रिकॉर्ड स्थापित किए थे।

मंडल-कमंडल की आंधी के दौर में राजेश खन्ना कांग्रेस में शामिल हुए। नई दिल्ली से उन्हें लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ाया गया। मुकाबला काफी कड़ा था और आडवाणी मात्र 1,589 वोटों से जीते।

तेलुगू स्टार कोंगारा जग्या पहले ऐसे फिल्मी सितारे कहे जाते हैं जिन्होंने 1967 में आंध्र प्रदेश की ओंगोल सीट से बिना प्रचार के लोकसभा चुनाव जीता। दक्षिण भारत से एमजी रामचंद्रन, एनटी रामाराव, जयललिता आदि कई ऐसी जानी-मानी राजनीतिक हस्तियां रहीं हैं, जिन्होंने अपने जमाने में फिल्मी दुनिया में भी गहरी छाप छोड़ी थी।

2 Comments
  1. Charlesbup 5 days ago
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  2. ruryinionee 5 days ago
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