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चुनावी महासमर में सितारे

चुनाव और आईपीएल के कारण बॉलीवुड में सन्नाटा छाया हुआ है। चुनावी बुखार तो इस कदर देश में चढ़ा है कि पूरा बॉलीवुड इस महासमर में शिरकत करता नजर आ रहा है। ऐसे में वह बॉलीवुड सितारे जिन्होंने पार्टी पॉलीटिक्स ज्वाइन की है और चुनाव लड़ रहे हैं उनका खबरों में होना बहुत लाजमी है। लेकिन जिनका राजनीति से कोई लेना-देना ही नहीं है वह भी किसी न किसी ट्वीट, इंटरव्यू या बयान के कारण चर्चा में आ गए हैं।

इन दिनों बॉलीवुड भी दो खेमों में बंट गया है। एक वो जो खुद को राष्ट्रवादी साबित करने की जुगत में हैं और दूसरे वो जिन्हें अपने कंधे पर सेक्युलर का मेडल चाहिए। मुझे तो नहीं याद आता कि इससे पहले बॉलीवुड ने कभी भी चुनावों में इस कदर शिरकत की हो और ऐसी बेबाकी से अपने बयान दिए हों। हमेशा से ही बॉलीवुड ऐसी गतिविधियों से खुद को दूर रखता आया है, लेकिन इस बार यह महासमर कुछ ज्यादा ही बड़ा हो गया है।

शुरू करते हैं अक्षय कुमार के बेहद चर्चित इंटरव्यू से जिसे किसी ने तारीफ में तो किसी ने मजाक में ‘नॉन पॉलीटिकल इंटरव्यू’ कहा। अक्षय कुमार के इस इंटरव्यू के बाद नरेद्र मोदी पर तो कम लेकिन अक्षय पर बहुत ज्यादा उंगलियां उठीं। लोगों ने तो उनकी देश भक्ति तक पर सवाल खड़े कर दिए। जैसा कि बहुत कम लोगों को पता होगा कि अक्षय भारत के नागरिक नहीं हैं वह कनाडा के नागरिक हैं और भारत में काम करते हैं। बस इसी बात को लोगों ने पकड़ लिया और सोशल मीडिया में उनकी खूब ट्रोलिंग हुई। लोगों ने उनसे इलेक्शन के निशान वाली अंगुली की फोटो शेयर करने को कहा।

ट्रोलर्स ही नहीं फिल्म फ्रेटरनिटी के भी कई लोगों ने अक्षय की आलोचना की। फिल्म डायरेक्टर अपूर्व असरानी ने तो उनको दिए गए नेशनल अवार्ड पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि क्या कोई कनाडाई नागरिक भारत के नेशनल अवार्ड के लिए योग्य है, अगर ज्यूरी इस पर विचार करे तो क्या यह गलती सुधारी जा सकती है। अक्षय को 2016 में ‘एयरलिफ्ट’ और ‘रूस्तम’ के लिए नेशनल अवार्ड मिला था और बतौर अपूर्व असरानी वह अपनी फिल्म ‘अलीगढ़’ के लिए यह सम्मान मनोज वाजपेयी के लिए देख रहे थे। इसके अलावा एक साउथ कलाकार ने भी इस इंटरव्यू पर टिप्पणी की और कहा कि कनाडा के नागरिक हैं तो जाकर ट्रंप का इंटरव्यू लें अक्षय। इन आलोचनाओं और ट्रोल को लेकर अक्षय ने ट्वीट किया और खेद व्यक्त किया।

अक्षय के बाद जावेद अख्तर की बारी आती है। सार्वजनिक मंचों से और टीवी चैनल पर जावेद ये बताते नहीं थक रहे हैं कि देश खतरे में है और यह जो ताकतें खुद का इतना विस्तार कर रही हैं वह देश के लिए खतरा है। इतने से नहीं रूके जावेद ने बुर्के पर प्रतिबंध वाले एक सवाल पर कहा कि अगर बुर्के पर प्रतिबंध लगाना है तो घूंघट पर भी प्रतिबंध लगाइए। उनके इस बयान से करणी सेना ने कहा कि जावेद माफी मांगें नहीं तो परिणाम अच्छे नहीं होंगे। ज्ञात हो कि श्रीलंका में हुए धमाके के बाद मुल्क में बुर्के पर बैन लगा दिया और इसी पर चर्चा में यह सवाल उठा। इसके बाद गौहर खान भी बहुत सक्रियता से राजनीतिक गतिविधियों पर अपनी नजर रख रही हैं और बराबर उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही हैं। प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने एक बयान में राजीव गांधी को सबसे भ्रष्ट नेता बताया था जिस पर गौहर खान ने अपने एक ट्वीट से राहुल गांधी की तारीफ के पुल बांध दिए।

बात सपोर्ट की हो और विवेक ओबेरॉय का नाम न आए हो ही नहीं सकता। बहुत दिनों के बाद प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी पर बनी फिल्म में मोदी का किरदार करके विवेक एक बार फिर बॉलीवुड गौसिप्स का हिस्सा बन गए। अखबारों और न्यूज चैनलों में जमकर उनको कवरेज मिली। विवेक खुले तौर पर बीजेपी और नरेद्र मोदी के सपोर्ट में बोलते हैं और इसी बहाने अपनी फिल्म का प्रमोशन भी कर लेते हैं।

इनके अलावा और भी बहुत सारी हस्तियां हैं, लेकिन इनमें से यह छांटना बहुत मुश्किल है कि किस सेलिब्रिटी का झुकाव वास्तव में किस राजनीतिक विचारधारा के प्रति है और किस सेलिब्रिटी ने अपना सपोर्ट जताने के लिए राजनीतिक पार्टी से मोटी रकम वसूली है। इस संदर्भ में कोबरा पोस्ट ने एक स्टिंग किया था जिसमें कई सारे बॉलीवुड सितारे पैसे लेकर अपना सपोर्ट पार्टी को देने के लिए तैयार थे और इतिहास भी रहा है कि राजनीतिक दलों ने बॉलीवुड हस्तियों को हमेशा भीड़ जुटाने के तरीके की तरह ही इस्तेमाल किया है।

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