बड़े स्टार कास्ट फिल्म की सफलता के लिए अनिवार्य गारांटी माने जाते रहे हैं। इसके अलावा फिल्म की मार्केटिंग को भी हिट और कमाई का एक जरूरी साधन माना जाता है। मगर इस साल आई कई फिल्मों की सफलता में इसकी जरूरत नहीं महसूस की गई। कम बजट, बगैर भारी-भरकम स्टार कास्ट और मार्केटिंग के बिना भी एक दर्जन के करीब फिल्मों ने दर्शकों के दिल में बड़ी जगह बनाई है।

इन फिल्मों की सफलता में उनकी कहानी ने अहम भूमिका निभाई है। फिल्म में चाहे स्टार न हों, औसत मार्केटिंग कर दी हो और कहानी अच्छी है तो फिल्म चल जाती है। कम से कम पिछले एक साल में रिलीज हुई फिल्मों की कमाई तो यही जाहिर करती है। साल 2018 में दर्शकों के दिलों में उन फिल्मों ने भी अपनी जगह बनाई जो छोटे बजट की थी। इन फिल्मों में नए या उभरते हुए सितारे थे। जबकि बड़े बजट और सितारों से भरी फिल्में ने उम्मीद के मुताबिक सफलता का झंडा नहीं गाड़ पाई।

बड़े सितारों वाली फिल्म ‘पद्मावत’ 200 करोड़ रुपए में बनी थी। फिल्म समीक्षक और ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श कहते हैं, ‘भारत में ‘पद्मावत’ की कमाई 300 करोड़ से ज्यादा की रही। राजू हीरानी की फिल्म ‘संजू’ की कमाई भी 300 करोड़ से ज्यादा रही। जबकि इन फिल्मों से इससे कहीं ज्यादा की उम्मीद थी।’ तरण आदर्श भी मानते हैं कि इस साल की 10 बड़ी फिल्मों में वैसी फिल्मों का दबदबा है, जिनमें बड़े हीरो और बड़े बजट जैसी बात नहीं थी। चाहे वो ‘बधाई हो’, ‘अंधाधुन’ या ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’।

बधाई हो : फिल्म ‘बधाई हो’ में कोई बड़ा स्टार नहीं है। लेकिन फिल्म रीलिज होने के बाद धीरे-धीरे आगे बढ़कर सफलता का झंडा गाड़ गई। यह फिल्म 100 करोड़ की कमाई छूने वाली है। इस फिल्म में आयुष्मान खुराना, नीना गुप्ता और गजराज राव हैं। शांतनु श्रीवास्तव, अक्षत घिल्डियाल और ज्योति कपूर ने ‘बधाई हो’ की कहानी को शानदार ढंग से लिखा है तो अमित रविंद्रनाथ शर्मा ने उतनी ही खूबसूरती के साथ इसे परदे पर उतारा है। अमित शर्मा निर्देशित फिल्म ‘बधाई हो’ में नजर आए आयुष्मान खुराना कहानी में पूरा परिवार ही परदे पर छाया रहता है और फिल्म किसी एक एक्टर की नहीं बल्कि सभी कैरेक्टर के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती है। अधेड़ उम्र में मां बनना और समाज का उसे अपनाना कितना मुश्किल होता है, यह फिल्म में दिखाया गया है। अच्छी बात यह है कि हिंदी सिनेमा में इस तरह की कहानी पर जोखिम उठाया गया और वो दर्शकों को भा गई।


अंधाधुन :
इस फिल्म की मार्केटिंग या प्रमोशन कोई खास नहीं हुआ, लेकिन फिल्म को क्रिटिक्स ने सराहा है। श्रीराम राघवन के निर्देशन में बनी ‘अंधाधुन’ फिल्म को दर्शकों का बहुत प्यार मिल रहा है। ये फिल्म अंत तक दर्शकों को बांध कर रखती है। ‘अंधाधुन’ और ‘बधाई हो’ के साथ आयुष्मान आम लोगों के स्टार बन गए हैं। इस फिल्मों को भी लोगों ने खूब सराहा है। फिल्म ने बिजनेस भी अच्छा किया।

स्त्री : जो फिल्में अलग तरह का विषय लेकर आ रही हैं, दर्शक उनका स्वागत कर रहे हैं। जैसे राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर की हॉरर कॉमेडी फिल्म ‘स्त्री’ आपको कई मायनों में अलग लग सकती है। फिल्म आपको डराने के साथ-साथ हंसाती भी है। एक फिल्म समीक्षक कहते हैं, ‘इस फिल्म ने सौ करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। इसे बनाने में कोई ज्यादा खर्च नहीं आया है। स्टार की फीस को छोड़ दें तो कुछ करोड़ में ही यह फिल्म बन गई। कुल मिलाकर ये साल बहुत रोचक रहा है, क्योंकि कई फिल्में ऐसी आई हैं, जिन्हें हिट कहा जा सकता है। आज फिल्मों में आम आदमी से जुड़ी कहानियां ज्यादा पसंद की जा रही हैं।

सोनू के टीटू की स्वीटी : प्यार में दोस्ती का तड़का है ‘सोनू के टीटू की स्वीटी।’ इसकी कहानी दमदार है। पटकथा में कसाव है और तेज रफ्तार भी। संवाद अच्छे हैं। जिसे सुनकर हंसी आज भी आती है। इसके निर्देशक लव रंजन हैं और फिल्म में कार्तिक आर्यन, सनी सिंह, नुसरत भरुचा, आलोक नाथ जैसे नए कलाकारों ने अभिनय किया है। यह फिल्म एक दोस्त की होने वाली शादी पर केंद्रित है। इस फिल्म ने भी सौ करोड़ का आंकड़ा पार किया है। जबकि यह फिल्म भी कुछ करोड़ में ही बनाई गई है।

वीरे दी वेडिंग : अभिनेत्री करीना कपूर, सोनम कपूर, स्वरा भास्कर और शिखा तलसानिया की फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ रिलीज से पहले ही चर्चा में थी। रिलीज होने के बाद यह लोगों को पसंद आई। फिल्म में चार महिला दोस्तों की कहानी है। इस फिल्म ने सत्तर करोड़ से ज्यादा की कमाई की। महिलाओं को इसमें लीड किरदार दिया गया है। उनकी दोस्ती को केंद्र में रखकर उसके आसपास ताना बाना बुनने की कोशिश की गई है।

हिचकी : रानी मुखर्जी की ‘हिचकी’, ‘वीरे दी वेडिंग’ और आलिया भट्ट की ‘राजी’ जैसी फिल्मों में बड़े-बड़े हीरो नहीं थे। लेकिन फिर भी इन फिल्मों ने खूब कमाया। इन तीनों फिल्मों को अभिनेत्रियों ने अपने कंधे पर लेकर हिट करवा दिया। अक्सर माया नगरी के निर्माता-निर्देशक ये कहते मिल जाते हैं कि ‘इट्स डिफरेंट’ और ये जनता को पसंद आ रहा है। फिल्म समीक्षक अरनब बनर्जी का कहना है कि अब कई प्लेटफॉर्म दर्शकों के लिए खुल गए हैं, जैसे वेब सीरीज हैं। टेलीवीजन तो है ही। वो कहते हैं, ‘अब कुछ भी आदर्श नहीं होता। ग्रे शेड्स में आ रही फिल्में हमें समाज का आइना दिखा रही हैं। लोग अब अपनी ही कहानी देखना चाहते हैं।

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