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छोटे पर्दे के पीछे की पेंच

बॉलीवुड की चमक-धमक के आगे छोटा पर्दा भले ही फीका लगता हो, लेकिन घर-घर तक पहुंचने की जो क्षमता टीवी सीरियल की है वह इसके नाटकों के कलाकारों को घर-घर का सदस्य बना देती है। यही कारण है कि जब बहुत पॉपुलर टीवी सीरियल से किसी किरदार का चेहरा बदला जाता है तो उन्हें देखने की आदत बना लेने वाले दर्शकों को इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है।

आइए इस रिपोर्ट में देखते हैं कि ऐसे क्या कारण होते हैं कि एक अभिनेता या अभिनेत्री को वो किरदार छोड़ना पड़ता है जिससे उसकी पहचान बनती है। ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की अभिनेत्री दिशा वकानी उर्फ ‘दया भाभी’ ऐसा ही एक कैरेक्टर है। उनकी निश्छलता और अलग अंदाज ने दया भाभी को हिन्दुस्तान की सबसे फेवरेट भाभी बना दिया। तारक मेहता के जरिए उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई और दर्शकों ने भी उन्हें बहुत प्यार और स्नेह दिया। लेकिन प्यार, स्नेह और एक- दूसरे के साथ चलने की मिसाल वाला शो अब दिशा वकानी के बिना ही दिखाई दे रहा है। यह लोगों को बहुत अखर रहा है। दिशा वकानी ने दया भाभी के रूप में एक लंबा सफर तय किया और छोटे पर्दे के गुप्तचरों की मानें तो अब सीरियल में उनका यह सफर खत्म होने की कगार पर है।

साल 2016 में उस समय के पॉपुलर शो ‘भाभी जी घर पर हैं’ तो सबको याद होगा। अंगूरी भाभी भी अपने खास अंदाज और अंग्रेजी के साथ उनके ‘सही पकड़े हैं’ वाले खेल के लिए काफी पॉपुलर हो चुकी थीं। लेकिन एक दिन अचानक पता चला कि अब अंगूरी का किरदार कर रही शिल्पा शिंदे इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं। शिल्पा की जगह नई अभिनेत्री आई और सीरियल आगे बढ़ता रहा, लेकिन अंगूरी भाभी के किरदार में शिल्पा शिंदे ने जो मील का पत्थर रख दिया उसे कोई दूसरा छू सके ऐसा संभव नहीं लगता।

अब ये दो केस ये समझने के लिए काफी हैं कि आखिर लोगों के दिलों में जगह बनाने के बाद ऐसे किरदारों का चेहरा क्यों बदलना पड़ जाता है। इस तरह की घटनाएं अक्सर उन सीरियल के साथ होती हैं जो पॉपुलर तो होते हैं, लेकिन इनमें एक या दो कैरेक्टर ऐसे होते हैं जिनका अंदाज उनकी नई पहचान बना देता है। दर्शक ऐसे चेहरों को पर्दे में दिए गए नाम से ही जानने लगते हैं। ऐसे में नाम या चेहरा बदले तो कई दर्शकों को यह बिल्कुल अच्छा नहीं लगता।

हालांकि दिशा वकानी इससे पहले भी एक बार शो छोड़कर गई थीं, लेकिन उस समय लोगों को यह जानकारी थी कि दिशा ने मैटरनिटी लीव ले रखी है। इस लीव के बाद दिशा की वापसी का ऐलान भी हुआ, लेकिन इसी बीच कुछ ऐसा हुआ कि ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में दिशा की वापसी नहीं हो पाई।  दिशा ने मीडिया से कहा कि उनके पति चाहते हैं कि वह अब बच्चे का ध्यान रखें इसलिए वह यह सीरियल छोड़ रही हैं, लेकिन असली कारण कुछ और था। शो को छोड़ने के बाद दिशा यानी की दया भाभी ने देखा कि तारक मेहता का उल्टा चश्मा की टीआरपी में कमी हुई। इसके बाद उन्होंने प्रोड्यूसर से अपनी फीस बढ़ाने की बात कही। जहां अभी तक दिशा एक एपिसोड की शूटिंग के लिए सवा लाख रुपए लेती थी वहीं अब वह इसके लिए डेढ़ लाख की डिमांड कर रही थीं। जिस पर प्रोडक्शन के साथ तालमेल नहीं बन पाया और दिशा ने अपने दया भाभी वाले किरदार को अलविदा कह दिया।

इसके ‘उलट भाभी जी घर पर हैं’ के केस में जो खबरें सामने आई उसमें यह देखा गया कि मैनेजमेंट शिल्पा शिंदे यानी उस समय की अंगूरी भाभी पर इस बात का जोर डाल रहा था कि वह ऐसे एग्रीमेंट पर साइन करें कि इस टीवी शो के अलावा वे किसी दूसरे टीवी शो का हिस्सा नहीं बनेंगी। जिसमें हामी न भरने के कारण उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया। हालांकि आपसी टकराव के अलावा दूसरी भी कई वजहें हैं जिनके कारण टीवी में पहचान बन गया पात्र छोड़ना पड़ जाता है। ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के ही एक महत्वपूर्ण किरदार टप्पू ने भी इस सीरियल को छोड़ दिया क्योंकि उन्हें लगने लगा कि बड़े होने के बाद उनके किरदार को इतना महत्व नहीं दिया जा रहा है जितना पहले था, क्योंकि बड़े होकर शैतानियां करता टप्पू थोड़ा अटपटा लगेगा। इसके अलावा ये भी सुनने में आया कि उन्होंने बिना प्रोडक्शन को बताए दूसरी गुजराती फिल्में भी साइन कर ली थी जिसके कारण सीरियल ने उनसे अलग होना ही बेहतर समझा।

इसके अलावा कई उदाहरण ऐसे भी हैं जब अभिनेता और अभिनेत्री किसी डेली सोप को इसलिए छोड़ देते हैं कि वह अपनी उम्र से ज्यादा का नहीं दिखना चाहते। ऐसा तब होता है जब प्रोडक्शन अचानक से सीरियल को 10-20 साल आगे लेकर चले जाते हैं तो कलाकारों को भी अपनी वर्तमान उम्र से ज्यादा का दिखना होता है। ऐसे अभिनेता जो अपनी छवि को लेकर बहुत संजीदा होते हैं वो भूल कर भी ऐसा करना पसंद नहीं करते और उन्हें टीवी सीरियल छोड़ देना ज्यादा अच्छा लगता है। इसके कई उदाहरण सास-बहू वाले डेली सोप में मिल जाते हैं।

एक कारण और होता है अपनी पहचान बन चुके किरदार को छोड़ने का वह है तरक्की। यानी कि छोटे पर्दे से पॉपुलर होकर बड़े पर्दे तक पहुंच जाना। इस परिवर्तन का सबसे बड़ा उदाहरण है मिहिर विरानी। मिहिर यानी कि अमर उपाध्याय एक समय हर घर का हिस्सा बन चुके थे। ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में इनके किरदार को इतना पसंद किया गया कि हर मां इनमें अपना बेटा या दामाद देखती थी। लेकिन अचानक एक दिन हर घर में मातम छा गया जब इस डेली सोप में मिहिर के कार एक्सीडेंट में मरने की स्टोरी दिखाई गई। टीवी सेट के इस ओर लोग समझ नहीं पा रहे थे कि ये क्या हो गया लेकिन छोटे पर्दे की दुनिया में यह अमर उपाध्याय के लिए प्रमोशन जैसा था। उन्हें बड़े पर्दे से कुछ ऑफर मिले थे और उसी के कारण उन्होंने वह सोप छोड़ा जिसने उन्हें पहचान दिलाई।

अमर उपाध्याय के अलावा भी कई ऐसे नाम हैं जिन्होंने टीवी इसलिए छोड़ दी क्योंकि बड़े पर्दे से उन्हें बुलावा आ गया था इनमें जय भानुशाली, राजीव खंडेलवाल, आमना शरीफ, करन सिंह ग्रोवर जैसे कई नाम शामिल हैं। इस स्टोरी से आपको जरूर समझना चाहिए कि टीवी सीरियल कितना भी अच्छा हो या कोई किरदार कितना भी आदर्श हो लेकिन आपको केवल उन्हें मनोरंजन के लिए ही देखना चाहिए। क्योंकि कोई भी कारण हो सकता है कि आपका फेवरेट किरदार तो आपको दिखे, लेकिन उसके पीछे का चेहरा बदल दिया जाए।

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