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हैप्पी ‘वैलेंटाइन डे!’ प्रेम के इजहार का यह उत्सव यूं ही आता रहे….. 

दुनिया में प्रेम का सर्वोपरि रखा गया है। यदि किसी जिंदगी में प्रेम नहीं तो वह नीरस है। विश्व में ‘प्रेम’ पर एक से बढ़कर एक फिल्में बनी हैं। अथाह साहित्य प्रेम पर रख गया है। प्रेम का इजहार करने का कोई मुहूर्त नहीं बल्कि किसी से प्रेम होते ही इसका अहसास हो जाता है। बिन बोले ही प्रेम बयां हो जाता है। फिर भी ‘वेलेंटाइन डे’ जैसे कुछ खास उत्सव प्रेमी जोड़ों को अपने प्यार का इजहार करने का अवसर देते है।  ‘वैलेंटाइन डे’, हर साल 14 फरवरी को मनाया जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि वेलेंटाइन डे मनाने की परंपरा कहां से आई? यह इतना लोकप्रिय क्यों बन गया? क्या यह हमेशा प्यार और अच्छी भावनाओं के बारे में था? आइए जानते है, वेलेंटाइन डे से जुड़ी कहानी के बारे में प्रसिद्ध किताब ‘ऑरिया ऑफ जैकोबस डी वॉराजिन’ में हमें संत वेलेंटाइन का जिक्र मिलता है। इस किताब के अनुसार रोम में तीसरी शताब्दी में सम्राट क्लॉडियस का शासन था। और उनका मानना था कि विवाह करने से पुरुषों की शत्तिफ़ और बुद्धि कम होती है। उन्होंने आदेश जारी किया कि उनका कोई भी सैनिक और  अधिकारी विवाह नहीं करेगा। संत वेलेंटाइन ने इस क्रूर आदेश का विरोध किया। उन्हीं के आवान पर अनेक सैनिकों और अधिकारियों ने विवाह किए।
‘वैलेंटाइन’ 14 फरवरी किसी दिन का नाम नहीं है, यह नाम है एक पादरी (Priest) का, जो कि रोम में रहता था, उस वक्त रोम पर Claudius  का शासन था, जिसकी इच्छा थी, कि वह एक शत्तिफ़शाली शासक बने, जिसके लिए उसे एक बहुत बड़ी सेना  बनानी थी, लेकिन उसने देखा कि रोम के वो लोग जिनका परिवार  है, जिनके बीवी और बच्चे है, वो सेना में नहीं जाना चाहते, तब उस शासक ने एक नियम  बनाया, जिसके अनुसार उसने भविष्य में होने वाली सभी शादी पर प्रतिबन्ध  लगवा दिया। यह बात किसी को ठीक नहीं लगी, पर उस शासक के सामने कोई कुछ नहीं कह पाया। यह बात पादरी वैलेंटाइन को भी ठीक नहीं लगी- एक दिन एक जोड़ा आया, जिसने शादी करने की इच्छा जाहिर की, तब पादरी वैलेंटाइन ने उनकी शादी चुपचाप एक कमरे में करवाई- लेकिन उस शासक को पता चल गया और उसने पादरी वैलेंटाइन को कैद कर लिया और उसे मौत की सजा सुनाई गई।
ऐसे ही प्यारे अहसास को जब एक त्यौहार ‘वैलेंटाइन डे’ के रूप में मनाया जाता है, तब वह दिन एक यादगार दिन बन जाता है। जीवन में जब सब कुछ प्यार ही है, तो इस अनमोल अहसास को वक़्त  देना भी बहुत जरुरी है और वत्तफ़ शायद इस भाग दौड़ की दुनिया में कही खो गया है, वत्तफ़ एक ऐसा पंछी है, जो अगर हाथ से निकल गया, तो वापस नहीं आता और जिन्दगी में वत्तफ़ सुन्दर यादों में ही कैद हो पाता है।
    • मनोज चौधरी 

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