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गोवा की फिल्मी फिजाएं

  • हरिनाथ कुमार
सन, सी, और सैंड की धरती के नाम से मशहूर गोवा का मौसम दिल्ली की अपेक्षा अभी गरम है। चटक और खिली धूप की वजह से इस समय गोवा और खुशनुमा है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन इस शहर में हो तो यहां की फिजाएं न केवल फिल्मी होती हैं, बल्कि रौनक में चार चांद लगा जाती हैं। ऐसे वातावरण में महोत्सव का आयोजन भी सफल हो जाता है। ऊपर से जब अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का 50वां संस्करण हो तो इसका महत्व ऐतिहासिक हो जाता है। गोवा की राजधानी पणजी शहर के मांडवी तट को दुल्हन की तरह सजा दिया गया है। जगह-जगह पर फिल्म और संस्कृति से जुड़ी झांकियों से शहर को सजाया गया है। इफ्फी में हर साल सफल और चर्चित फिल्मों से जुड़ी झांकियां देखने को मिलती हैं, इस बार फिल्म ‘बाहुबली’ की एक झांकी शो केस की गई है। यह झांकी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बाहुबली यानी प्रभाष का यह स्टैच्यू गोवा घूमने आए पर्यटकों के लिए सेल्फी प्वाइंट बन गया है। फेस्टिवल के दौरान गोवा के कई गावों में शाम होते ही बड़े परदे लगाए जा रहे हैं, ताकि गांव के लोग बिना टिकट के फिल्मों का लुत्फ उठा सकें। फेस्टिवल को और भी आकर्षक बनाने के लिए मोबाइल थिएटर तैयार किए गए हैं, जहां लोग बिना किसी तरह की बुकिंग और टिकट के फिल्म महोत्सव का मजा उठाएंगे।
आसमान में खिली ट्टाूप ने गोवा के वातावरण को खुशनुमा बना रखा है। ऐसे में यहां अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव देखने का मौका मिल जाए तो फिर कहना ही क्या है,  इस बार महोत्सव में दिखाई जाने वाली 200 से अधिक फिल्मों में से 24 आॅस्कर की रेस में हैं। 50 महिला निर्देशकों की फिल्में प्रदर्शित की जाएगी। ‘एक भारत’ श्रेष्ठ भारत की थीम पर आयोजित इस महोत्सव स्थानीय लोग मुफ्त में मजा ले रहे हैं
पहली बार भारत में अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आगाज वर्ष 1952 में हुआ। उस समय यह एशिया का भी पहला अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव था। इसमें 23 देशों के फिल्मकारों ने भाग लिया था, जबकि पचासवें समारोह में 76 देशों के फिल्मकार भाग ले रहे हैं। भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव गोवा के 50वें संस्करण की खास बात यह है कि इस साल 50 महिला निर्देशकों की विभिन्न फिल्मों को प्रदर्शित किया जाना सुनिश्चित है। इस साल यहां दिखाई जाने वाली 200 से अधिक फिल्मों में से कुल 24 फिल्में आॅस्कर की रेस में हैं। इस साल इस महोत्सव की थीम है ‘एक भारत – श्रेष्ठ भारत’, ऐसे में इस महोत्सव का मकसद हर क्षेत्र की फिल्मों का जश्न अनोखे अंदाज में मनाना है।
इस बार के महोत्सव की खास बात यह कि प्रदर्शित होने वाली फिल्म की सूची को कुल 23 विशेष खण्डों में विभाजित किया गया है। जिसमें इस बार दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (2018) से सम्मानित सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की फिल्मों का विशेष पुनरावलोकन है, तो दक्षिण भारत के सुपर स्टार रजनीकांत को आईकान आफ गोल्डन जुबली आॅफ इफी सम्मान से नवाजा जाएगा। अमिताभ बच्चन की कुछ नई पुरानी फिल्मों का पैकेज है, जिसमें बदला, ब्लैक, पा, पीकू, दीवार और शोले दिखाई जा रही हंै। लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड के लिए चुनी गई सुप्रसिद्ध फ्रेंच अभिनेत्री इजाबेल हपर्ट की फिल्मों की एक विशेष सूची है। रूस को फोकस कंट्री का विशेष दर्जा दिया गया है, जबकि फोकस फिल्मकार के रूप में जापान के तकाशी मीके की फिल्में दिखाई जा रही हंै। श्रद्धांजलि खंड में फ्रांस की एनेस वार्दा और इटली के बर्नार्डो बर्तोलुची की मशहूर फिल्में दिखाई जा रही हंै। इस खंड में उन फिल्मी हस्तियों को श्रद्धांजलि दी जाती है जिनका निधन पिछले एक साल के दौरान हुआ है। भारत के मृणाल सेन  (भुवन शोम), खय्याम ( उमराव जान), राजकुमार बड़जात्या (हम आपके हैं कौन), गिरीश कर्नाड, विद्या सिन्हा (रजनीगंधा), वीरू देवगन, (फूल और कांटे), कादर खान(हम), बीजू फूकन, एम जे राधाकृष्णन, विजया मूले, रूमा गुहा ठाकुरता तथा राम मोहन को उनकी सबसे चर्चित फिल्मों के प्रर्दशन के साथ श्रद्धांजलि दी जा रही है।
फेस्टिवल क्लाईडोस्कोप सिने महोत्सव प्रेमियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण खंड बन गया है जिसमें दुनिया के प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों – कान, बर्लिन, वेनिस, सनडांस, बुशान, आदि में पुरस्कृत फिल्में दिखाई जाती हंै। सिनेमा के जो दीवाने दुनिया भर के फिल्म समारोहों में नहीं जा पाते उन्हें गोवा में वहां की चर्चित फिल्में देखने का मौका मिल जाता है। इस खंड में दक्षिण कोरिया के बोंग जून हो की कान फिल्म समारोह में बेस्ट फिल्म का पाम डि ओर पुरस्कार जीतने वाली फिल्म ‘‘पैरासाइट“, सेलिन सियामा की“ पोट्रेट आॅफ अलेडी आन फायर“, जेसिका हाउजनर की ‘‘लिटिल जो“ आदि प्रमुख हैं। इसी तरह मास्टर फ्रेम खंड में जर्मनी के फतेह अकीन की ‘‘द गोल्डन ग्लव“, स्पेन के पेद्रो अलमोदवार की ‘‘पेन एंड ग्लोरी’’, कनाडा के जेवियर दोलान की ‘‘मैथीज एंड मैक्सीमी“, फिलीपींस के लव डायज की ‘‘द हाल्ट“, पिछले साल कान फिल्म समारोह में बेस्ट फिल्म का पुरस्कार जीतने वाले जापान के हिरोकाजू कोरे ईडा की ‘‘द ट्रूथ“, फ्रांस के ओलिवर असाया की ‘‘वास्प नेटवर्क“, बेल्जियम के ज्यां पियरे डार्डेंन और लुक डार्डेंन की इस्लामिक आतंकवाद पर ‘‘यंग अहमद“ आदि फिल्में प्रमुख हैं।
भारतीय पैनोरमा में इस बार कुल 26 फीचर फिल्में चुनी गई हैं जिसमें सबसे अधिक हिंदी की फिल्में हैं। इसमें भी चार फिल्में मुख्य धारा हिंदी सिनेमा की हंै, जैसे, बधाई हो, गुली ब्वाय, सुपर 30 और उड़ी- द सर्जिकल स्ट्राइक। इसके अलावा मशहूर फिल्मकार प्रकाश झा की नई फिल्म ‘‘परीक्षा, ‘‘और संजय पूरण सिंह चैहान की ‘‘बहत्तर हूरें“ भी भारतीय पैनोरमा में हैं। मास्टरक्लास और परिसंवाद में लोकप्रिय ऐक्टर्स, प्रतिष्ठित फिल्म मेकर और टेक्निशन हिस्सा लेंगे और अपनी-अपनी विधा से संबंधित बातों पर रुचिकर ढंग से रोशनी डालेंगे। प्रियदर्शन और मधुर भंडारकर जैसे मशहूर निर्देशक रील और रियल फिल्म मेकिंग की प्रक्रिया के बारे में बात करेंगे, तो वहीं फराह खान, साबू सिरिल और बिश्वजीत चटर्जी जैसी हस्तियां कोरियोग्राफी, प्रोडक्शन डिजाइन और साउंड डिजाइन के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। विभिन्न ‘इन कान्वरसेशन’ सत्रों में निर्देशक रोहित शेट्टी, मेघना गुलजार, काजल अग्रवाल, तमन्ना भाटिया भी शरीक होंगे। इस मौके पर अनिल कपूर और अनीस बज्मी अपनी लम्बी पारी और कामयाब साझेदारी पर प्रकाश डालेंगे।
दुनिया के जाने-माने समीक्षक श्री डेरेक मालकम और पिंग्याओ फिल्म फेस्टिवल के आर्टिस्टिक डायरेक्टर श्री मारको मुलर पिछले 50 सालों में भारतीय सिनेमा के उत्थान और बदलावों पर चर्चा करेंगे। यह चर्चा परस्पर संवाद पर आधारित सत्र का हिस्सा होगी, जिसमें फिल्मकार शाजी करुण और सुभाष घई भी भाग लेंगे। भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के स्वर्ण जयंती संस्करण के इतर ‘फिल्म बाजार’ का भी आयोजन होता है। यह फिल्मों से जुड़ी सामग्री को बेचने और खरीदने का अनोखा मंच है। ‘फिल्म बाजार’ एक ऐसा मंच है, जहां कोई भी शख्स फिल्म से जुड़े नये विचार रख सकता है और उन्हें दुनिया के पास ले जा सकता है। एक सरकारी बयान में कहा गया है कि फिल्म बाजार दक्षिण एशियाई और अंतरराष्ट्रीय फिल्म समुदायों के बीच रचनात्मक और वित्तीय साझेदारी को बढ़ावा देता है। इस वर्ष साइलेंट फिल्मों के एक सेक्शन को भी शामिल किया गया है। साइलेंट फिल्मों के प्रदर्शन के दौरान बीएफआई यूके के पीऐनस्ट जानी बेस्ट द्वारा लाइव म्यूजिक परफार्म किया जाएगा।
कुल मिलाकर अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह साल दर साल इस मायने में सफल रहा है कि यहां सिनेमाप्रेमियों और फिल्मकारों को दुनियाभर के सिनेमा की कला से रू-ब-रू होने का मौका मिलता है। साथ ही भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव की विकास यात्रा एवं अचीवमेंट्स पर बात होती है। इस आयोजन के माध्यम से प्रत्येक संस्करण का लेखा- जोखा प्रस्तुत किया जाता है। खास बात यह कि ‘इस महोत्सव का फिल्म उद्योग एवं फिल्मकारों पर क्या प्रभाव पड़ा है’, इस पर विचार- विमर्श होता है।

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