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विवादों में फंसी फिल्में

फिल्मों का विवाद के जाल में उलझना एक पुरानी परंपरा है। विवाद फिल्मों को हिट भी कर देता है। कहा तो यह भी जाता है कि फिल्म को हिट करने के लिए भी प्रयोजित ढंग से विवाद पैदा कराए जाते हैं। हाल ही में आई फिल्म ‘केदारनाथ’ को उत्तराखण्ड में प्रतिबंधित कर दिया गया। अभिषेक कपूर की इस फिल्म की पृष्ठभूमि उत्तराखण्ड ही है और ‘केदारनाथ’ की त्रासदी भी। इसके पहले अभिषेक कपूर ने चेतन भगत के उपन्यास पर ‘काई पोचे’ फिल्म का निर्देशन किया था। उस फिल्म को समीक्षकों से सराहना मिली थी।

‘केदारनाथ’ फिल्म में त्रासदी के बैकड्रॉप में प्रेम के बनने और उसके परवान चढ़ने की कहानी है। इसमें सुशांत सिंह राजपूत के अपोजिट सैफ अली खान और अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान ने अपने फिल्मी कैरियर का आगाज किया है। फिल्म में सुशांत मुस्लिम युवक मंसूर की भूमिका में हैं तो सारा ने हिन्दू लड़की मुक्वू की भूमिका निभाई है। दोनों ही केदारनाथ के आस-पास के रहने वाले हैं। दोनों का मिलना होता है। परिचय प्यार में तब्दील हो जाता है। लेकिन लेकिन इससे पहले कि वह प्यार अपने अांजम तक पहुंच पाता, दोनों के परिवार वालों को इसका पता चल जाता है और उन दोनों के मिलने पर पाबंदी लगा दी जाती है।

निर्देशक अभिषेक कपूर की परेशानी यह है कि वह फिल्म में गंभीर मुद्दों से टकराने के बजाय आसान रास्ता चुनते हैं। वह ‘प्रेम कहानी’ के फ्रेम से बाहर बहुत कम ही निकल पाते हैं। 2013 में उत्तराखण्ड में आई आपदा की परिस्थितियों में दर्शकों को किस तरह भटकने के लिए विवश होना पड़ा, इस पर उतना फोकस नहीं किया गया जितनी अपेक्षा थी। इस मुद्दे पर वह ठहरते नहीं जो बहुत अहम था। यह वह आपदा थी जिसकी वजह से उत्तराखण्ड में तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को हटना पड़ा था। साल-दो साल बाद तक उसी केदारनाथ इलाके में मानव कंकाल बरामद होते रहे थे। लेकिन न जाने निर्देशक ने इन सब चीजों को महत्व क्यों नहीं दिया।

केदारनाथ फिल्म पर लव-जेहाद, भगवान के अपमान और हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया। खास बात यह है कि केदारनाथ मंदिर के पुजारियों ने भी मूवी का विरोध किया। उत्तराखण्ड हाईकोर्ट ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने से इंकार कर दिया, मगर राज्य सरकार ने सूबे में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए फिल्म के प्रदर्शन कर प्रतिबंध लगा दिया। प्रतिबंध की मांग भाजपा और कुछ कट्टर संगठनों की थी। फिल्म पर लव-जेहाद को प्रमोट करने का आरोप लगा था।

केदारनाथ कोई पहली फिल्म नहीं है जिसे बैन कर विवादों में लाया गया। सिने प्रेमी ‘पद्मावती’ फिल्म को नहीं भूले होंगे जिसके प्रदर्शन के पूर्व ही पूरे भारत में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। तब करणी सेना ने इस फिल्म में पद्मावती की छवि को धूमिल करने का आरोप इसके निर्देशक संजय लीला भंसाली पर लगाया था। विरोध के जरिए राजपूतों की भावनाओं को काफी भड़काया गया। देश के कई हिस्सों में हिंसा भी भड़की। लेकिन पूरे विवाद का लाभ फिल्म को मिला और फिल्म हिट साबित हुई। कंगना रनौत की फिल्म ‘मणिकर्णिका’ भी विवादों में उसी वक्त फंस गई जब इसकी शूटिंग शुरू हुई। कभी फिल्म में झांसी की रानी के किरदार को दिखाए जाने का विवाद उठा तो कभी फिल्म के दूसरे लीड एक्टर सोने सूद ने बीच में फिल्म छोड़ दी।

अक्षय कुमार ने हाल ही में एक फिल्म साईन की है ‘मिशन मंगल’ यह फिल्म भी शुरू होने से पहले ही कॉपीराइट के विवादों में फंस गई है। फिल्म की कहानी पर राधा भारद्वाज अपना दावा पेश कर रही है। उन्होंने अदालत में इस फिल्म के निर्माण और प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की है। इसके पहले भी ‘वोटर’ सरीखी फिल्म पर शूटिंग के दौरान ही बनारस में इतना बवाल मचा था कि फिल्म का निर्माण ही रोकना पड़ा।

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