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वे फिल्मी सितारे जो बने आम जनता की आवाज

वे फिल्मी सितारे जो बने आम जनता की आवाज

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) हो, राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) हो या दूसरे सामाजिक मुद्दे, सरकार की मनमानी और एकतरफा फैसले के खिलाफ आम जनता आवाज बुलंद कर रही है। जनता के इन मुद्दों ने बॉलीवुड की कई नामी हस्तियों का ध्यान भी आकृष्ट किया है। देश का चाहे कोई भी मुद्दा हो बॉलीवुड के सितारों और क्रिकेटरों से सवाल जरूर पूछे जाते हैं।

क्रिकेटर अक्सर इन मुद्दों से खुद को दूर रखते नजर आते हैं। शायद ही कोई क्रिकेटर हो जिसने खुलकर सरकार की नीतियों की आलोचना की हो, जबकि बॉलीवुड में कई हस्तियां हैं जो जनविरोधी मुद्दों पर सरकारी नीतियों का डंके की चोट पर विरोध करते हैं।  हालांकि, बॉलीवुड सितारे कई मुद्दों पर तीन भागों में भी बंटे भी नजर आते हैं।

पहले वे जो हमेशा न्यूट्रल रहते हैं और किसी भी मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते। दूसरे वे लोग हैं जो बोलने के बाद अपनी ही बात को खारिज करने की कोशिश करते हैं। तीसरे ऐसे सितारे और कलाकार हैं, जो खुलकर अपनी बात रखते हैं। न तो उन्हें सरकार के दमन का डर होता है और न ही अपने करियर की कोई फिक्र होती। वे हमेशा सच के साथ खड़े नजर आते हैं। आज हम उन्हीं बेबाक सितारों के बारे में बात करेंगे जो पेज 3 की चमक-दमक को छोड़कर पिछले दिनों कई मुद्दों पर आम आदमी की आवाज बने।

नसीरुद्दीन शाह : हिन्दी सिनेमा के उन कलाकारों में हैं जिनकी अदाकारी का पैमाना नाप पाना नामुकिन है। जनता के मुद्दों पर वे हमेशा से मुखर रहे हैं। हर मुद्दे पर उनकी तीखी प्रतिक्रिया आई है। उनकी मुखरता के कारण उन्हें देशद्रोही और गोली मार देने तक की बात तक कही जा चुकी है। हाल ही में नसरुद्दीन ने अनुपम खेर के एनआरसी का समर्थन करने पर अनुपम खेर को जोकर कह कर पुकारा था। उसके बाद से दोनों के बीच तू- तू मैं-मैं शुरू हो गई थी।

जावेद अख्तर : जावेद अख्तर का पूरा परिवार मुखर होकर समाजिक मुद्दों पर बोलता है। चाहे उनकी पत्नी शबाना आजमी हों या उनके पुत्र फरहान अख्तर। शबाना पहले से ही काफी एक्टिव रहती आई हैं। उनके पिता कैफी आजमी भी अपने जमाने के उन लोगों में से थे जो सेल्यूलोयड के चमक-दमक से दूर रहकर सामाजिक कार्य करते थे। उसी तरह से जावेद के पिता जाँ निसार अख्तर भी थे। जावेद और शबाना को इसके लिए ट्रोल भी किया जाता है, मगर वे अपनी बात रखते हैं।

अनुराग कश्यप : फिल्म निर्माता और निर्देशक अनुराग कश्यप को फायर ब्रिगेड का नाम दे दिया जाए तो गलत न होगा। क्योंकि ये ऐसे शख्स हैं जो सरकार के नाक में दम कर रखा है। ऐसा शायद ही कोई राजनीतिक मुद्दा होगा या फिर सामाजिक मुद्दा जिस पर अनुराग कश्यप की प्रतिक्रिया सामने न आए।

हालांकि, बीच में वे सोशल मीडिया से दूर हो गए थे। लेकिन इन तीन महीने में एक्टिव हो कर लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में जामिया और शाहीनबाग आकर उन्होंने इस बात को पुख्ता कर दिया कि वे सरकार की गलत नीतियों को उठाने से पीछे नहीं हटने वाले हैं।

जामिया हिंसा पर उन्होंने मीडिया तक को भी नहीं छोड़ा। मीडिया पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि मीडिया का बहुत नुकसान किया है। अब मीडिया समाज का आईना बनना बंद हो गया है। मीडिया सरकार की स्पीकर बनकर रह गया है।

अनुराग कश्यप का रार सिर्फ इसी सरकार से नहीं है। पहले की सरकारों से भी उनकी ठनती रही है। चाहे वह किसी फिल्म के प्रमाणन को लेकर हो या दृश्यों को लेकर। अनुराग की बेबाकी का नमूना पिछले दिनों तब देखने को मिला जब उन्होंने देश के गृहमंत्री अमित शाह को आड़े हाथों लिया।

उन्होंने कहा कि हमारा गृहमंत्री डरपोक है। खुद की पुलिस, खुद के गुंडे, खुद की सेना और सुरक्षा अपनी बढ़ाता है और निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर आक्रमण करवाता है। घटियापन और नीचता की हद अगर है तो वो है अमित शाह। शायद ही कोई निर्देशक ऐसे सरकार से बैर लेता होगा।

सोनम कपूर : सोनम कपूर अपनी अदाकारी और स्टाइल के लिए जानी जाती हैं। सोनम सामाजिक मुद्दों पर या फिर महिलाओं की समस्याओं पर अपनी बेबाक राय रखने में भी पीछे नहीं हटतीं। ब्रेस्ट कैंसर, बलात्कार, लड़कियों के महामारी जैसी कई समस्याओं पर खुलकर बोलती आई हैं। एनआरसी पर भी उन्होंने खुलकर प्रतिक्रिया दी। सोनम ने कहा कि भारत में ऐसा होगा कभी सोचा नहीं था। उन्होंने ये भी कहा कि मोदी सरकार को विभाजनकारी राजनीति बंद कर देनी चाहिए। इतना बेबाक होने का सोनम को भी अक्सर खामियाजा उठाना पड़ता है। अक्सर उन्हें ट्रोल्स किया जाता है।

वे फिल्मी सितारे जो बने आम जनता की आवाज

स्वरा भास्कर : स्वरा भास्कर को जितना फिल्मों के लिए नहीं जाना, उतना वह सत्ता प्रतिरोध के लिए जानी जाती हैं। स्वरा भास्कर ने अभी कुछ ही फिल्मों में अभिनय किया है, लेकिन हर फिल्म में अपने रोल में दमदार अभिनय से सभी को प्रभावित किया है। इसके अलावा वह एक स्पष्ट राजनीतिक सोच भी रखती हैं और अक्सर समाजिक मुद्दों पर खुलकर अपने विचार रखती हैं। बीते दिनों जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों पर पुलिस बर्बरता के फौरन बाद स्वरा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उसके बाद जेएनयू में एबीवीपी के छात्रों द्वारा अन्य छात्रों और शिक्षकों पर हमले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उनकी चिंता उन्हें जामिया और शाहीन बाग प्रदर्शन तक ले आई। कई रैलियों में उनकी माजूदगी और भाषणों ने सरकार के हठ को जवाब दिया। चाहे एनआरसी की बात हो या फिर सीसीए या फिर गार्गी कॉलेज में छात्रों के साथ हुई घटना की। गार्गी कॉलेज की घटना पर पर स्वरा ने ट्वीट कर लिखा कि दिल्ली में ये पागलपन और अवसाद का प्रतीक है। एनआरसी पर वह साफ- साफ कहती हैं कि इसी मिट्टी में जन्म लिया है, कोई कागज का टुकड़ा हमारी नागरिकता नहीं छीन सकता। बेहतर कौन है, कौन देश से प्यार करता है, यह पहचानना होगा। इसके अलावा स्वरा भास्कर ने अदनान सामी को पद्मश्री अवॉर्ड मिलने पर आपत्ति जताई थी।

वे फिल्मी सितारे जो बने आम जनता की आवाज

जीशान अयूब : युवा अभिनेता जिनके आगे पूरा करियर है। इन्होंने अब तक चंद फिल्मों में ही काम किया है। ‘तनु वेड्स मनु’, ‘रांझना’ जैसी फिल्मों में काम कर अपनी एक अलग छवि बनाने में कामयाब तो हुए, पर इनकी असल पहचान एनआरसी मुद्दे से हुई। जामिया कांड के बाद इन्होंने लगातार सरकार को घेरे रखा। लोगों से अपील की कि वे सभी एकजुट होकर सरकार की मंशा को चकनाचूर करें। जामिया कांड के बाद जामिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित रहे। छात्रों की आवाज से आवाज मिलाई। सरकार पर हमला करते हुए ये तक कहा कि इस सरकार को सबसे बड़ी दिक्कत स्टूडेंट्स से है। जब भी, जहां भी जमा हों, अपने हाथ में एक किताब रखिए। अगर किताब मुश्किल हो तो अपने पास एक पेन ही रख लीजिए। ये लड़ाई छात्र बनके लड़ने की है। एक अभिनेता का इतना मुखर होना वाकई काबिल-ए -तारीफ है।

सिनेमा जगत की ये हस्तियां आम जनता के लिए आइकान की तरह नहीं बल्कि आम जनता की तरह ही सरकार से जवाब मांग रही हैं। ये राष्ट्र के हित और हमारी सम्प्रभुता को बचाने के प्रयास में लोगों के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर खड़े हैं। इसके अलावा सुशांत सिंह, राहुल बोस, प्रकाश राज सईद मिर्जा, सुहासिनी मुले, हुमा कुरैशी, विशाल भारद्वाज, सुधीर मिश्रा, जोया अख्तर, तापसी पन्नू, ऋचा चड्ढा, अली फजल, अनुभव सिंहा जैसे कई सितारों ने सरकार के गलत नीतियों का विरोध किया है। साथ ही कई सामाजिक विसंगतियों पर भी ये अपनी बात रखते आए हैं। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, आमिर खान जैसे सुपर स्टार्स के सामने अपेक्षाकृत ये छोटे नाम हैं पर ये ऐसे नाम हैं जिन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को बचाने के लिए आवाज उठाई है।

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