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जीवन के अर्द्धशतक में शतक की ओर

दो अप्रैल 1969 को भारतीय सिनेमा के एक ऐसे होनहार एक्टर ने जन्म लिया था जिसने अपनी पहली फिल्म से जो लोकप्रियता हासिल की उसे एक लंबे फिल्मी करियर के बाद भी बरकरार रखा। अपनी पहली फिल्म से ही इस अभिनेता ने जो छाप छोड़ी उससे आज भी लोग इन्हें जानते और पहचानते हैं। अपनी पहली फिल्म के पहले सीन में जब दो मोटरसाइकल के बीच खड़े होकर एंट्री होती है और इस परिचय के बाद इनका नाम बताने की आवश्यकता नहीं बचती। हम बात कर रहे हैं अजय देवगन की।

बॉलीवुड के एक्शन डॉयरेक्टर वीरू देवगन के घर पैदा हुए, लेकिन फिर भी इंडस्ट्री में अपने अभिनय और काबिलियत के दम पर लोहा मनवाया। सामान्य सा दिखने वाला चेहरा उस दौर में इंडस्ट्री में आया जब इंडस्ट्री में मैलोड्रामा और गिमिक फिल्मों का ही ट्रेंड था। किसी को यकीन नहीं था कि 1991 में ‘फूल और कांटें’ सुपरहिट होगी। लोगों ने इस एक्शन हीरो को सहर्ष स्वीकारा और यहीं से शुरू हुआ अजय देवगन का फिल्मी करियर, जिसमें शुरुआती समय में इन्हें एक एक्शन हीरो के तौर पर जाना गया।

इन्होंने काजोल से शादी की। मीडिया ने इस जोड़ी को बेमेल जोड़ी कहा क्योंकि अजय और काजोल एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। काजोल शरारती और चुलबुली हैं तो अजय गंभीर और शांत। ऐसे में वर्ष 1999 में जब इन दोनों की शादी की घोषणा हुई तो पूरा मीडिया जगत हैरत में था। शादी के तुरंत बाद अजय ने एजे प्रोडक्शन शुरू किया। इससे प्रोडक्शन की दुनिया में अजय ने कदम रख दिया। अजय की पहली होम प्रोडक्शन ‘राजू चाचा’ थी जो बहुत ज्यादा सफल नहीं कही जा सकती।

अपनी डेब्यू के लिए इन्हें फिल्म फेयर ने बेस्ट डेब्यू मेल एक्टर चुना। इसके बाद इन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। एक के बाद एक हिट फिल्में आती गई और अजय देवगन बॉलीवुड की अपनी अजेय पारी को लेकर आगे बढ़ते जा रहे हैं। वह ‘गोलमाल’ की कॉमेडी में भी सुपरहिट नजर आते हैं और ‘सिंघम’ की दहाड़ में भी एकदम फिट दिखाई पड़ते हैं। गिनती अभी भी आगे बढ़ती जा रही है। हाल ही में अजय देवगन की ‘दे-दे प्यार दे’ का ट्रेलर लॉन्च हुआ है और इस साल के अंत तक ‘तानाजी’ और ‘भुज’ जैसी फिल्में लाइन में लगी हैं।

अजय देवगन की पहली फिल्म 1991 में आई थी उसके बाद से कभी भी फिल्मों से ब्रेक नहीं लिया और बहुत जल्द ही फिल्मों का शतक भी पूरा करने वाले हैं। इसका मतलब हर साल औसतन 4 फिल्में कर रहे अजय देवगन अभी तक किसी भी तरह की कांट्रोवर्सी से दूर हैं। अजय सिने जगत में अपने शांत स्वभाव और काम के प्रति अपने समर्पण के लिए जाने जाते हैं। यही समर्पण है जो उन्हें इंडस्ट्री का सबसे सफल अभिनेता बनाता है वह किसी गुट के नहीं हैं। वह पूरी तरह से पूरी इंडस्ट्री के हैं और उसी के लिए जी-तोड़ काम करते जा रहे हैं। अपने उत्कøष्ट काम के लिए इन्हें दो बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी दिया गया है। पहली बार यह पुरस्कार 1999 में महेश भट्ट निर्देशित फिल्म ‘जख्म’ के लिए मिला तो दूसरी बार 2002 में राजकुमार संतोषी निर्देशित ‘द लिजेंड ऑफ भगत सिंह’ के लिए।

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