entertainment

विवादों में बॉलीवुड

पिछले सप्ताह 27 दिसंबर को फिल्म ‘द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ का ट्रेलर जारी किया गया। ट्रेलर जारी होते ही इस पर बवाल शुरू हो गया है। यह फिल्म पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह पर अधारित है। इसमें डॉ मनमोहन सिंह का किरदार अनुपम खेर ने निभाया है। कांग्रेस पार्टी इस फिल्म की रिलीज रोकने की मांग कर रही है। जो 11 जनवरी को सिनेमा घरों में आनी है। फिल्म को लेकर राजनीति चरम पर पहुंच गई है।

फिल्म के ट्रेलर से कांग्रेस (डॉ मनमोहन सिंह) सरकार में गांधी परिवार के दखल की हकीकत सामने आ गई है। ट्रेलर में डॉ सिंह द्वारा लिए गए फैंसलों को दिखाया गया और यह भी दिखाया गया है कि उन फैसलों को लेने में उन्हें कितनी मुश्किलें हुईं। यह फिल्म एक पॉलिटिकल ड्रामा है। जो वरिष्ठ पत्रकार एवं डॉ मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू की किताब पर आधारित है। फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्राइम मिनिस्टर बनने के दौरान की कहानी है। संजय बारू 2004 से 2008 के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार थे। यह फिल्म इसी माह रिलीज होने वाली है। फिल्म रिलीज होने के पहले ही विवादों में घिरना कोई नई बात नहीं है।

सोशल मीडिया पर डॉ मनमोहन सिंह के रोल में अनुपम खेर के काम की तारीफ हो रही है। विदेशी नायिका सुजैन बर्नट ने सोनिया गांधी का रोल निभाया है। मनमोहन सिंह की वेशभूषा, चलने, बोलने, बॉडी लैंग्वेज में अनुपम खेर ने काफी प्रभावित किया है। लोगों का कहना है कि वे ट्रेलर देखकर वास्तविक मनमोहन सिंह और फिल्म वाले मनमोहन सिंह में फर्क नहीं कर पाए। फिल्म में इनके अलावा आहना कुमरा ने प्रियंका गांधी, दिव्या सेठी ने गुरशरण कौर और अर्जुन माथुर ने राहुल गांधी का किरदार निभाया है। बॉलीवुड में बनने वाली कई फिल्में पहले भी विवादों में घिरी हैं। कई फिल्में धर्म, जाति, संप्रदाय तो कई बार राजनीतिक विवादों में भी रही हैं। यह विवाद सिनेमा घरों से सड़कों तक और कई बार संसद में भी सुनाई पड़ा है।

पिछले साल की शुरुआत भी बॉलीवुड में विवादों से हुई थी। संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ को लेकर लंबा विवाद चला। इस पर शूटिंग के समय भी हंगामा हुआ था। रिलीज से पहले तो काफी विवाद हुआ। देश भर में करनी सेना का सड़कों पर आंदोलन चला। संसद से लेकर कई विधानसभाओं में भी इस पर चर्चा हुई। कोर्ट में भी इस फिल्म का मामला गया। कई बार इसकी रिलीज डेट बढ़ाई गई। आखिरकार फिल्म का नाम बदला गया और इसमें कई कट भी किए गए। इतने विवाद के बाद भी फिल्म 2018 की सुपरहिट फिल्मों में से एक है।

इसके अलावा कई फिल्में विवादों में रही। 13 फरवरी 1975 को गुलजार की ‘आंधी’ ने ऐसा तूफान मचाया जिसके कारण फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इस फिल्म में संजीव कुमार और सुचित्रा सेन ने अभिनय किया था। उस समय इस फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि फिल्मकारों ने यह कहा था कि इस फिल्म का इंदिरा गांधी से कोई संबंध नहीं है। फिल्म में एक होटल मैनेजर (संजीव कुमार) और एक राजनीतिज्ञ की बेटी (सुचित्रा सेन) प्यार में पड़ते हैं और शादी कर लेते हैं। फिर कुछ अंतर के कारण, वे अलग हो जाते हैं। कई सालों बाद, वे फिर से मिलते हैं और अपने रिश्ते को एक और मौका देने का फैसला करते हैं।

इस फिल्म में सुचित्रा सेन का पहनावा इंदिरा गांधी जैसा था और बाल भी वैसे ही थे। उनके व्यवहार को भी फिल्म में इंदिरा गांधी जैसा दिखाने की कोशिश की गई थी। यह बात दक्षिण भारत में प्रकाशित एक पोस्टर जिसमें लिखा था कि (अपनी प्रधानमंत्री को पर्दे पर देखो) के बाद सामने आई थी। इसके बाद सरकार ने इस फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन बाद में तत्कालीन सूचना प्रसारण मंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने इस फिल्म को हरी झंडी दी थी। यह फिल्म अपनी सिल्वर जुबली से एक हफ्ता पीछे रह गई थी। 24 हफ्तों तक इस फिल्म का जादू लोगों पर चला था। इस फिल्म को मशहूर गीतकार और निर्देशक गुलजार ने बनाया था।

जब इस फिल्म को लेकर काफी विवाद उठा तो गुलजार ने इसमें एक नया सीन डाला था जिसमें अदाकरा सुचित्रा सेन इंदिरा गांधी की तस्वीर के सामने खड़े होकर उन्हें अपना आदर्श बताती है। इस फिल्म को कमलेश्वर ने लिखा था। इस फिल्म के लिए संजीव कुमार को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। गौर करने वाली बात यह है कि इस फिल्म के गाने श्रीनगर, जम्मू और पहलगाम में शूट हुए थे।

फिल्म ‘किस्सा कुर्सी का’ इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाई गई इमरजेंसी पर बनी थी। फिल्म का डायरेक्शन अमृत नाहटा ने किया था और भगवंत देशपांडे, विजय कश्मीरी और बाबा मजगांवकर प्रोड्यूसर्स थे। कहा जाता है कि इस फिल्म से संजय गांधी इतना नाराज हुए थे कि फिल्म का ओरिजनल और बाकी सारे प्रिंट्स जला दिए थे। जिसकी वजह से संजय गांधी पर 11 महीने तक केस चला। 27 फरवरी 1979 को कोर्ट का फैसला आया और उन्हें 25 महीने की जेल की सजा सुनाई गई।

फिल्म ‘इंदु सरकार’ भी 1975 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाई गई इमरजेंसी के हालात पर थी। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के बाद से ही इसे देशभर में काफी विरोध झेलना पड़ रहा है। ये विरोध इतना ज्यादा है कि लीगल नोटिस से लेकर, पुतला फूंकने तक मधुर भंडारकर को काफी विरोध का सामना करना पड़ा था। इतना ही नहीं 16 जुलाई को फिल्म की प्रमोशन के लिए पूरी स्टारकास्ट पुणे पहुंची थी, लेकिन स्टारकास्ट के वहां पहुंचने से पहले ही कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता वहां पहुंच गए। वह मधुर भंडारकर से मिलने की बात करने लगे जिसके बाद सुरक्षा कारणों से प्रेस कॉन्फ्रेंस को टाल दिया गया। कुछ ऐसा ही हाल नागपुर में भी हुआ था। वहां भी प्रेस कॉन्फ्रेस के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। एक व्यक्ति ने इस फिल्म के खिलाफ पुणे के न्यायालय में याचिका दायर की और कहा कि अगर ये फिल्म रिलीज होती है तो इससे इंदिरा गांधी के चाहने वालों की भावनाओं को ठेंस पहुंच सकती है और भारी मुश्किलें भी हो सकती हैं। काफी हंगामें के बाद फिल्म रिलीज हुई थी लेकिन बॉक्स ऑफिस पर फिल्म चल ना सकी।


डाकू से सांसद बनी फूलन देवी की जिंदगी पर शेखर कपूर ने ‘बैंडिट क्वीन’ फिल्म बनाई। यह फिल्म भी विवादित फिल्मों में से एक है। फिल्म में न्यूड और रेप सीन के साथ-साथ गालियों का भी इस्तेमाल किया गया था, जिसे लेकर विवाद हो गया।

साल 1993 के मुंबई बम धमाकों की पृष्ठभूमि पर आधारित ‘द ब्लैक फ्राइडे’ बनी। इस फिल्म के प्रदर्शन पर दो साल तक रोक लगी रही। ऐसा कहा गया कि फिल्म का प्रदर्शन न्यायिक जांच और निर्णय को प्रभावित कर सकता है।

आमिर खान और अनुष्का शर्मा की ‘पीके’ फिल्म ने एक बड़ी बहस छेड़ी थी। फिल्म में दिखाया गया था कि कुछ मान्यताएं और रीति रिवाज अंधविश्वास से भरे हुए हैं। जिसके चलते विवाद खड़ा हुआ था।

फिल्म निर्माता प्रकाश झा की फिल्म ‘लिपिस्टक अंडर माय बुर्का’ को सेंसर बोर्ड ने प्रमाणित करने से मना कर दिया था। बोर्ड ने कहा था कि यह एक महिला प्रधान फिल्म है जो असल जिदंगी के परे है। बोर्ड ने कहा कि इसमें विवादास्पद यौन दृश्य, अपमानजनक शब्द और ऑडियो पोर्नोग्राफी शामिल है जो समाज के एक खास तबके के प्रति अधिक संवेदनशील है।

शाहिद कपूर अभिनीत फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ को लेकर बोर्ड और फिल्म निर्माताओं के बीच बड़ा विवाद हुआ था। पंजाब में नशे की समस्या पर बनी इस फिल्म में बोर्ड ने 89 कट सुझाये थे। मामला हाई कोर्ट पहुंचा और अदालत ने एक कट के साथ इसे रिलीज करने की अनुमति दी।

सारा अली खान और सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म ‘केदारनाथ’ उत्तराखण्ड में बैन है। जिसकी वजह फिल्म में लव- जेहाद को दिखाया जाना है। फिल्म का जमकर विरोध किया जा रहा है। ‘केदारनाथ’ की कहानी साल 2013 में आई उत्तराखण्ड बाढ़ के इर्द-गिर्द है, जिसमें हजारों लोगों की मौत हो गई थी।

‘रंगीला राजा’ फिल्म बीते काफी दिनों से सुर्खियों में बनी हुई है। इस फिल्म में अभिनेता गोविंद मुख्य भूमिका में हैं। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) की बॉडी फिल्म सर्टिफिकेट अपिलेट ट्रिब्यूनल (एफसीएटी) ने ‘रंगीला राजा’ फिल्म को 3 कट के साथ पास कर दिया है। बीते दिनों ऐसी खबरें भी थीं कि इस फिल्म में सेंसर बोर्ड 20 कट लगाने वाला है। इसके बाद पहलाज निहलानी ‘रंगीला राजा’ में लगे 20 कट के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचे गए थे। इस फिल्म में विजय माल्या के देश और विदेश में किए गए फ्रॉड और उनकी जीवनशैली को दर्शकों के सामने पेश किया जाएगा।

बॉलीवुड में राजनीतिक फिल्मों के रिलीज पर सेंसरशिप का भी इतिहास रहा है। इंदिरा गांधी, संजय गांधी के चरित्र से लेकर इमरजेंसी तक पर फिल्में बनीं और विवादों में रही। जगमोहन मुंदड़ा अपने जीते जी सोनिया गांधी पर ‘सोनिया’ नाम की फिल्म बनाने के अपने सपने को पूरा नहीं कर पाए। इतालवी अभिनेत्री मोनिका बलूची को सोनिया गांधी की भूमिका में लेने की मीडिया घोषणाओं और इन दावों के बावजूद कि सोनिया गांधी को इस फिल्म को लेकर कोई समस्या नहीं है, फिल्म आगे नहीं बढ़ पाई।

बंगलादेश निर्माण की पृष्ठभूमि में इंदिरा गांधी के राजनीतिक जीवन पर आधारित फिल्म ‘बर्थ अफ ए नेशन’ नाम की एक फिल्म को अस्ट्रेलियाई निर्देशक बेरेसफोर्ड बनाने वाले थे। फिल्म के निर्माता अमरीका में रहने वाले भारतीय मूल के कृष्णा शाह थे। लेकिन फिल्म घोषणाओं से आगे बढ़ नहीं पाई। पिछले हफ्ते गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर 50 करोड़ रुपए की लागत से एक अनिवासी भारतीय फिल्मकार मितेश पटेल ने फिल्म बनाने की घोषणा की है जिसमें परेश रावल के मोदी की भूमिका निभाने की चर्चा है। देखना यह होगा कि यह फिल्म किस स्तर तक आगे बढ़ पाती है।

You may also like