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कंगना रनौत के बगले पर हुई तोड़फोड़ का हर्जाना भरेगी बीएमसी

बीएमसी के द्वारा कंगना रनौत के आफिस को तोड़े जाने पर आज सुप्रीम कोर्ट ने अ्पना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि कंगना के दफ्तर तोड़े जाने पर हुए नुकसान का मूल्यांकन किया जाएगा। कोर्ट ने साफ कहा है कि कंगना द्वारा तोड़फोड़ में हुए नुकसान के बयान का वह समर्थन नहीं करता है। कोर्ट ने माना है कि यह तोड़फोड कंगना को धमकाने के मकसद से की गई थी, इसमें बीएमसी की मंशा ठीक नहीं थी।

कंगना के दफ्तर में हुई तोड़फोड का हर्जाना बीएमसी को भरना पड़ेगा। कोर्ट ने यह भी कहा है कि कंगना दफ्तर को दोबारा बनाने के लिए आवेदन करेंगी। इसके लिए तीन महीने का समय दिया गया है आर्किटेक्ट को डैमेज दफ्तर का मूल्यांकन करना होगा। जिस हिस्से को बीएमसी ने अनाधिकृत बताया है उसे नियमित किया जाए। कोर्ट ने यह फैसला तकरीबन दो महीनें चली बहसों के बाद सुनाया है।

कोर्ट ने कंगना के आपत्तिजनक बयान और पोस्ट को लेकर कहा कि उन्हें सोच समझ कर बोलना चाहिए। यहां विषय दफ्तर को तोड़े जाने का है न कि उनके ट्वीट को लेकर। कोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति विशेष कुछ भी मूर्खतापूर्ण बात कहे। राज्य द्वारा समाज पर बाहुबल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने तस्वीरों और अन्य सामग्रियों का विश्लेषण किया जिनमें संजय राउत धमकी दे रहे हैं। सामना में छपी सामग्री और न्यूज चैनल पर चलाई गईं वीडियो क्लिप। इमारत को 40 प्रतिशत तक तोड़ा जाना और सामना द्वारा छापी गई हेडलाइन ‘उखाड़ दिया’ पर गौर किया. कोर्ट ने बीएमसी को जमकर फटकार लगाई है। कंगना के वकील रिजवान सिद्दीकी ने कहा ”मैंने कंगना को जानकारी दे दी। वो जजमेंट के बारे में जानकर खुश थी। मुझे भरोसा था कि ऐसा ही आदेश मिलेगा। क्योंकि मामला तथ्यों पर आधारित था और वे गलत नहीं हो सकते।”

कोर्ट के फैसले के बाद कंगना रनौत ने फैसला अपने पक्ष में आने के बाद खुशी जाहिर की है। उन्होंने कोर्ट के फैसले की खबर को रि-ट्वीट करते हुए लिखा, ”जब व्यक्ति सरकार के खिलाफ खड़ा होता है और जीतता है, तो यह व्यक्ति की जीत नहीं है बल्कि यह लोकतंत्र की जीत है। उन सभी का शुक्रिया जिन्होंने मुझे हिम्मत दी और उन लोगों को धन्यवाद जो मेरे टूटे सपनों पर हंसे। इसका एकमात्र कारण आप एक खलनायक खेलते हैं ताकि मैं एक हीरो हो सकता हूं।

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