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बॉलीवुड में बायोपिक का चलन

बॉलीवुड में बायोपिक का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। अब हर बड़े स्टार के पास एक बायोपिक है जिस पर वो काम कर रहा है। जिस तरह से दर्शकों ने बायोपिक पर अपना रिस्पॉन्स दिया है उससे निर्माताओं के लिए यह फायदे का सौदा साबित हुआ है और हर निर्माता आसानी से किसी भी बायोपिक में पैसा लगाने के लिए तैयार हो जाता है।

वैसे हिंदी सिनेमा की शुरुआत ही ‘राजा हरीशचंद्र’ के जीवन के एक हिस्से को पर्दे पर उतार कर हुई थी। हिंदुस्तानी अपने इतिहास को रोचक अंदाज में कहानी का रूप देकर प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं। इसलिए हिंदी सिनेमा में लंबे अर्से तक पुराने ऐतिहासिक और काल्पनिक किरदारों के व्यक्तित्व पर फिल्में बनती रही हैं। इनमें आजादी के आस-पास डॉ कोटनिस के जीवन पर बनी फिल्म ‘डॉ कोटनिस की अमर कहानी’ एक यादगार फिल्म है।

बायोपिक का ट्रेंड लाने का श्रेय शेखर कपूर की ‘बैंडिड क्वीन’ को जाता है। यह फिल्म खूब चर्चा में रही क्योंकि यह फिल्म चंबल की डाकू ‘फूलन देवी’ के जीवन पर आधारित थी। किसी जीवित व्यक्ति के जीवन पर बनी यह शायद पहली हिंदी फिल्म थी। इस फिल्म और इसमें अनूठे प्रयोग की खूब तारीफ हुई और काफी चर्चित रही।

इसके बाद मणिरत्नम ने ‘गुरु’ फिल्म बनाई। यह फिल्म धीरू भाई अंबानी के जीवन पर आधारित थी लेकिन इस बात की कभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई। यह अपने आप में ही अद्भुत है कि सब यह समझ कर फिल्म देखते रहे कि यह धीरू भाई के जीवन पर है, लेकिन कभी इस बात को फिल्म के निर्माता ने कहा ही नहीं। यह फिल्म सुपरहिट थी और इस फिल्म ने अभिषेक बच्चन के एक्टिग करियर को नया आयाम दिया था।

इसके बाद तिग्मांशु धूलिया के निर्देशन में ‘पान सिंह तोमर’ बनी। ‘पान सिंह तोमर’ न तो कोई जाना-पहचाना नाम था और न ही इससे पहले इस नाम को किसी ने सुना था। इस कारण से फिल्म तैयार होकर काफी समय तक रुकी रही। निर्माता इस बात से डर रहे थे कि कहीं यह फिल्म मुंह के बल न गिर पड़े। लेकिन फौजी खिलाड़ी से बागी बने इस किरदार में इरफान खान ने अपने अभिनय से जान फूंक दी। दर्शकों ने इस किरदार को इतना पसंद किया कि रिलीज के बाद ये फिल्म ट्रेंड सेंटर बन गई। इस फिल्म के हिट होने के बाद सबने समझ लिया कि बायोपिक यानी फायदे का सौदा। परिणाम ये हुआ कि ओम प्रकाश मेहरा ने ‘भाग मिल्खा भाग’ पर काम शुरू कर दिया। ‘मिल्खा सिंह’ के जीवन पर फिल्म तैयार की गई फरहान अख्तर ने मिल्खा सिंह के किरदार को निभाया और फिल्म चर्चित रही। बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कलेक्शन भी किया। ‘मैरी कॉम’ भी इसी श्रेणी की फिल्म थी। इस फिल्म ने कमाई तो की ही, चर्चा में भी रही थी। साथ ही प्रियंका के अभिनय को भी इस फिल्म ने एक नया आयाम दिया था।

इसके बाद बॉलीवुड में बॉयोपिक का मतलब सफलता हो गया। हर किसी ने कहीं न कहीं बायोपिक में हाथ आजमाया और खोज-खोज कर ऐसे करेक्टर निकालने शुरू किए जिनके जीवन में कुछ ऐसा हो जिसे मनोरंजक अंदाज में बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया जा सके। ‘डर्टी पिक्चर’ को आप अभी तक भूले नहीं होंगे। साउथ सेंसेशन ‘सिल्क स्मिता’ के जीवन पर बनी इस बायोपिक ने विद्या बालन को बॉलीवुड में स्थापित कर दिया।

हाल ही में सक्सेफुल बॉयोपिक की बात करें तो ‘संजू’ सबसे बड़ा उदाहरण है। अपनी बायोपिक का प्रचार संजय दत्त खुद कर रहे थे। फिल्म ­­­सफल रही और बॉक्स ऑफिस में अच्छी कमाई भी कर ली। वर्तमान में ‘कपिल देव’ की बायोपिक चर्चा में है जल्द ही यह पर्दे पर आएगी। इसके अलावा अजय देवगन अभिनित ‘तानाजी’ का भी सिने प्रेमी इंतजार कर रहे हैं। ‘उधम सिंह’ और गणितज्ञ ‘शकुंतला देवी’ पर भी जल्द ही फिल्में बड़े पर्दे पर दिखाई देंगी।

एक जानकारी के अनुसार इस समय में बॉलीवुड में 40 से अधिक बायोपिक फिल्में निर्माणाधीन हैं। इनमें से सानिया नेहवाल, पुलेला गोपीचंद, अभिनव बिंद्रा, मिताली राज, सैयद अब्दुल रहीम, बिरसा मुंडा, अरुणिमा सिन्हा जैसे नाम हैं जिनके जीवन को बड़े पर्दे पर लाने की तैयारी की जा रही है। यह परंपरा भारत के इतिहास को संचित करने के हिसाब से भी सही है वैसे भी भारत में प्राचीन समय से ही इतिहास को किस्से कहानियों के रूप में दर्ज करने की परंपरा रही है। अपनी कुशल रचना शैली से भारतीय हर छोटी से छोटी घटना को भी बहुत रोचक अंदाज में दर्ज करते रहे हैं और अब यह बॉलीवुड के विशेष दक्ष लोग भी पूरे जोर-शोर से कर रहे हैं। जिसका फायदा बॉलीवुड को तो हो ही रहा है, साथ ही आज की नई पीढ़ी आसानी से कुछ ऐतिहासिक नामों को सुन रही है और उनके बारे में जानकारी हासिल कर रही है।

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