[gtranslate]
entertainment

राजनीतिक एजेंडे से भरपूर बायोपिक

यूं तो राजनेताओं के जीवन पर आट्टाारित फिल्मों का निर्माण होता रहा है लेकिन वर्तमान दौर में एक बड़ा बदलाव इस माध्यम के जरिए राजनीतिक एजेंडा तय करने का देखने को मिल रहा है। हालिया प्रदर्शित बायोपिक ष्मैं अटल हूंष्ए ष्द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टरष् और ष्इंदु सरकारष् को इस श्रेणी में रखा जा सकता है

‘नकाब चेहरे हैंए दाग बड़े गहरे हैं टूटता तिलिस्म आज सच से भय खाता हूं गीत नहीं गाता हूं। ये कविता अटल बिहार वाजपेयी की है। जब वो अपनी आधी आंखें बंद करके पूरी बात बोलते थे तब उनकी आवाज सात समुंदर पार तक गुंजती थी। वैसे तो अटल जी शांत स्वभाव के थे पर अपनी कविता द्वारा इतनी गहरी बात कह देते थे कि सुनने वाले अभिभूत हो जाते थे। आज उनका जिक्र इसलिए कि पिछले माह बड़े परदे पर पत्रकार उल्लेख एनपी की किताब द अनटोल्ड वाजपेयीः पॉलिटिशियन एंड पैराडॉक्सष् पर आधारित फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई है। फिल्म का नाम हैं मैं अटल हूंष् वैसे तो बॉलीवुड में ऐसे ही कई नेताओं की बायोपिक पर फिल्म बन चुकी हैं जिनमें से कई फिल्में हिट रही हैं तो कुछ फिल्में कब रीलीज होकर परदे से उतरकर चली गईए पता ही नहीं चला। मैं हूं अटलष् को बड़े पर्दे पर कोई तवज्जो नहीं मिली अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर क्या गुल खिलाएगी ये देखा जाना बाकी है। तो चलिए इस सप्ताह उन दिग्गज नेताओ की चर्चा करते हैं जिन्होंने अपनी बुद्धि और दृढ़ निश्चय से देश का मान सम्मान बढ़ाया हैं। लेकिन फिल्मी पर्दे पर बनी इनकी फिल्म दर्शकों पर अपनी छाप नहीं छोड़ सकी।

‘अटल हूं’ ये फिल्म अटल बिहारी वाजपेयी की जिंदगी के अलग. अलग और अहम पहलुओं को दर्शाती है। फिल्म की कहानी की शुरुआत प्रधानमंत्री कार्यालय से शुरू होती हैए जहां अटल बिहारी वाजपेयी का किरदार निभा रहे पंकज त्रिपाठी प्रधानमंत्री के रूप में पाकिस्तान के विषय पर तीनों सैन्य दलों के प्रमुखों से बात कर रहे हैं। कहानी आगे बढ़ती है और फिल्म अटल जी के अतीत में पहुंच जाती हैए जहां वो मंच से बच्चों और शिक्षकों के सामने कविता पढ़ने से डर कर घर चले जाते हैं। पिता के पूछने पर बताते हैं कि लोग मुझे घूर रहे थे जिसकी वजह से जो मुझे याद था सब भूल गया। तब उनके पिता समझाते हैं कि तुमने पक्तियां याद की थी इसलिए भूल गए भाषण का मुद्दा समझोगे तो तुम्हारे मुख से अपने आप पक्तियां निकलेंगी और लोगों के कानों तक पहुंचेगी। आयने में नहीं लोगों की आंखों में आंखें डालकर देखोए नजरें मिलेगी तो लोग तुम्हारी बातों पर भरोसा करेंगे। तब से अटल जी ने लोगों की आंखों में आंखें डालकर भाषण देना शुरू कर दिया था। अटल जी बचपन से ही आरएसएस की शाखा में जाते थे। वो आरएसएस के सबसे तेज सदस्यों में से एक थे जो अपने जुनून से बड़े बदलाव करना चाहते थे।

स्वण् प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की विशेषताओं को इस बायोपिक में दिखाने की कोशिश की गई है। फिल्म 2 घंटे 29 मिनट की है। फिल्म लम्बी होने के साथ बोरियत भी महसूस कराती है। अटल जी के जीवन काल में इतिहास बदलने वाले कई सारे इवेंट हैं जिनकी बहुत ही कम झलक इस बायोपिक में दिखाई गई हैं। जैसे परमाणु परीक्षणए कारगिल युद्धए देश में इमरजेंसी का लगना इत्यादि को बढ़िया तरीके से पेश किया जा सकता था। निर्देशक ने फिल्म में कुछ भावुकता के दृश्य को दिखाने की कोशिश की है जैसे भाजपा के मुंबई अधिवेशन में बिना उनसे पूछे आडवाणी जब वाजपेयी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा घोषित करते हैंए तो फिल्म भावुकता के चरम पर होती है।

पंकज त्रिपाठी का शानदार अभिनय
फिल्म में पंकज त्रिपाठी का अभिनय कमाल का है। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के बोलने और चलने के अंदाज को ही नहीं पकड़ाए बल्कि उनके किरदार को बड़े परदे पर जिंदा कर दिया है। पंकज त्रिपाठी को अटल के रूप में स्पीच देते हुए सुनना आपको सीट पर बैठे रहने के लिए मजबूर करता है। पंकज त्रिपाठी के अलावा पीयूष मिश्रा ने भी अपने अभिनय से खासा प्रभावित किया है। उन्होंने अटल जी के पिता का किरदार निभाया है। फिल्म में लालकृष्ण आडवाणी का चरित्र राजा रमेश कुमार ने निभाया है। प्रमोद कुमार पाठक ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी का किरदार निभाया है और दया शंकर पांडेय दीनदयाल उपाध्याय के चरित्र में हैं। कुल मिलाकर सारे अभिनेताओं ने उत्कृष्ट अभिनय कया है।

कुल मिलाकर यह फिल्म भी अन्य राजनेताओं पर बनी बायोपिक की तरह ही है जो कि बड़े परदे पर तो कुछ कमाल नहीं कर सकी लेकिन ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इसकी रैंकिंग ठीक ठाक है। यदि आपको अपने देश के राजनेताओं के बारे में जानना है तो चुनावी माहौल में राजनीतिक नेताओं पर बनी बायोपिक्स का लुत्फ उठाना चाहिए। यहां हम आपको राजनीति पर आधारित फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैंए जिन्हें आपको इस चुनावी मौसम में अवश्य देखना चाहिए।

‘ एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टरष’
ष्द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टरष् भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बायोपिक है। यह फिल्म पूर्व प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू की किताब ष्द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टरष् का रूपांतरण है। फिल्म में डॉण् मनमोहन सिंह का किरदार अनुपम खेर ने निभाया है। फिल्म में मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल के 10 साल की लंबी यात्रा का प्रदर्शन किया गया है। फिल्म रीलीज से पहले ही सोनिया गांधी की छवि को लेकर विवादों में आ गई थी।

‘लाइवीष’
तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता के जीवन पर आधारित फिल्म ष्थलाइवीष् 2021 में रीलीज हुई थी इस फिल्म में कंगना रणौत ने जयललिता की भूमिका निभाई है। फिल्म का निर्देशन एण्एलण् विजय ने किया है। इस बायोपिक में जयललिता की निजी जिंदगी और उनसे जुड़े कुछ किस्सों को दिखाने का प्रयास किया गया है।

‘एम नरेंद्र मोदी’
पीएम नरेंद्र मोदी ;2019द्ध वर्तमान प्रधानमंत्री की जीवनशैली पर वेबसीरीज और फिल्म दोनों बनी हैं। फिल्म का नाम ष्पीएम
नरेंदर मोदीष् है। यह फिल्म 2019 में रीलीज हुई थी। इसी तरह वेबसीरीज का नाम ष्मोदीष् जर्नी ऑफ ए कॉमन मैन है। ये भी 2019 में नेटफ्लिक्स पर रीलीज हुई थी। दोनों ही फिल्मों में नरेंद्र मोदी का किरदार विवेक ओबेरॉय ने निभाया है। मनोज जोशीए बरखा बिष्टए जरीना वहाब और बोमन ईरानी सहित एक प्रतिभाशाली स्टार कास्ट भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। इस फिल्म का निर्देशन ओमंग कुमार ने किया है।

‘दु सरकार’
वर्ष 2017 में मधुर भंडारकर इस फिल्म को लेकर आए थे। यह फिल्म इंदिरा गांधी के जीवन से प्रेरित है। इस फिल्म के दृश्य 1975 में इंदिरा गांधी सरकार में लगाई गई इमरजेंसी की तस्वीर को ताजा कर देते हैं जिसमें पंजाब के एक गांव में जबरन पुरुषों की नसबंदी की कोशिश होती है। इसके अलावा दिल्ली की झुग्गी बस्तियों को हटाने और मीडिया की आजादी छीनने जैसे दृश्य भी इस फिल्म में देखने को मिलते हैं। इंदिरा गांधी के किरदार को मजबूत दिखाया गया है जो कि कठोर कदम उठाने से कभी पीछे नहीं हटतीं। इस फिल्म में कृति कुल्हरीए नील नीतिन मुकेशए अनुपम खेर और तोता रॉय चौधरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

‘न इनसिग्निफिकेंट मैन’
ष्एन इनसिग्निफिकेंट मैनष् आम आदमी पार्टी के उदय पर आधारित है। इस डॉक्यूमेंट्री का निर्देशन खुशबू रांका और विनय शुक्ला द्वारा 2017 में किया गया। इस फिल्म में केजरीवालए मनीष सिसोदियाए योगेंद्र यादव और संतोष कोली की आंदोलन से आम आदमी पार्टी बनाने तक की प्रमुख भूमिकाओं को दिखाया गया है कि कैसे अपनी विचारधारा को जीवित रखते हुए इन युवाओं ने भारतीय राजनीति को हिला दिया। इस फिल्म को समीक्षकों और दर्शकों द्वारा सराहा गया।

 

 

ठाकरे’
दिवंगत शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे के जीवन पर आधारित फिल्म ठाकरे को अभिजीत पांसे द्वारा निर्देशित किया गया है। फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी और अमृता राव मुख्य भूमिका में हैं। दर्शकों ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी के किरदार की सराहना की है। फिल्म में बाल ठाकरे के जीवन की प्रमुख घटनाओं और उनकी उपलब्धियों को दिखाया गया है।

You may also like

MERA DDDD DDD DD