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बायोपिक का क्रेज

संजय दत्त के जीवन पर बनी फिल्म ‘संजू’ को जबरदस्त व्यावसायिक कामयाबी मिली है। हिंदी फिल्मों की एक बहुत पुरानी प्रवृत्ति है कि अगर कोई खास ढंग की फिल्म हिट होती है तो वैसी फिल्मों की बाढ़ आ जाती है। भेड़ चाल हिंदी सिनेमा का पुराना टें्रड है।

‘संजू’ फिल्म को लेकर सिने प्रेमियों के बीच सहमति-असहमति के बिंदु जरूर उभरे हैं। लेकिन एक बड़ा तबका फिल्म को कामयाब के साथ बेहतर बता रहा है। ऐसे में लोगों की दलील है कि फिल्म एक सामाजिक संदेश देती है। डाकू से रामायण के रचियता बनने वाले वाल्मीकी का यह देश है। अपनी गलतियों को सुधार कर जीने का मौका मिलना चाहिए। ‘संजू’ फिल्म का एक बड़ा संदेश यही है जो कि राजकुमार हिरानी की फिल्मों में अक्सर देखने को मिलता है। इस फिल्म का दूसरा पहलू यह है कि इसमें संजय दत्त के जीवन के बारे में कई अहम बातों को छिपा लिया गया है। उनके जीवन के कई स्याह पक्ष के बारे में फिल्म मौन है।

‘संजू’ के बाद अब पोर्न स्टार से हिंदी फिल्मों की स्टार बनने वाली सनी लियोन की बायोपिक भी बन रही है। अब उसमें एक नया बवाल खड़ा हो गया है। गुरु ग्रंथ कमेटी ने उनके नाम के साथ कौर टाइटल को हटाने का फरमान जारी किया है। कहा जाता है कि सनी लियोन मूल रूप से पंजाब की रहने वाली हैं। उनके बचपन का नाम दिलजीत कौर है। वह भारत से अमेरिका गई वहां पोर्न इंडस्ट्री की स्टार बन गई। अपने पार्टनर से शादी की। बॉलीवुड में कई फिल्म में काम करने के बाद अब उनकी जिंदगी पर फिल्म बन रही है। यह अजीब बात है कि संजय दत्त और सनी लियोन हमारे समय के नायक-नायिका नहीं हैं। अलबत्ता एक बड़ा वर्ग मानता है कि इनकी लाइफ में डार्क पक्ष हैं। ऐसे लोगों को नायक- नायिका की तरह फिल्मों में पेश किया जाना शायद समाज के हित में नहीं है।

‘संजू’ के दो हफ्ते बाद ही एक और बायोपिक फिल्म आई पर उसकी चर्चा ज्यादा नहीं हो पायी। वह फिल्म हैं शूरमा यह फिल्म भारतीय हॉकी के खिलाड़ी संदीप सिंह के जीवन पर आधारित थी। संदीप सिंह भारतीय हॉकी की आक्रमण पंक्ति के खिलाड़ी रहे। विश्व कप और ओलंपिक में उन्होंने शिरकत भी की है।

खेलों पर बायोपिक बनने का सिलसिला ‘चक दे इंडिया’ से ही शुरू हो गया था। वह मीर रंजन नेगी के जीवन पर आधारित थी। जो भारतीय हॉकी के गोलकिपर रहे। फाइनल में पाकिस्तान के हाथों आधा दर्जन से ज्यादा गोल खाने के बाद उन्हें इस देश में बहुत अपमान झेलना पड़ा था। बाद में वह महिला हॉकी टीम के कोच बने। कोच के तौर पर उन्होंने भारतीय महिला हॉकी टीम को स्वर्ण पदक दिलाकर माथे पर लगा वह कलंक का टीका धोया था। ‘चक दे इंडिया’ के नायक शाहरूख खान थे और यह फिल्म काफी चली थी।

कॉमनवेल्थ गेम में रिकॉर्ड बनाने वाले तेज धावक मिल्खा सिंह पर भी ‘भाग मिल्खा भाग’ बनी। जिसमें फरहान अख्तर ने मिल्खा का रोल किया। मिल्खा सिंह ओलंपिक में तेज दौड़ के दौरान पीछे मुड़कर देखने की वजह से पिछड़ गए और मेडल से वंचित रहे।

भारतीय क्रिकेट के कप्तान और विकेटकीपर महेंद्र सिंह धोनी और शुरुआती तीन टेस्ट मैच में इंग्लैंड के खिलाफ लगातार तीन टेस्ट शतक ठोकने वाले अजहरूद्दीन पर भी ‘अजहर’ फिल्में बनी। ये दोनों फिल्म तुलनात्मक रूप से थोड़ी कम कामयाब रही। ‘पान सिंह तोमर’ भी एक खिलाड़ी की बायोपिक थी। जिसमें इरफान खान ने अपने अभिनय से उसमें जान डाल दी थी। भारतीय महिला मुक्केबाज मैरीकॉम पर बनी फिल्म भी काफी चर्चित रही। ‘दंगल’ को भी बायोपिक की ही श्रेणी में लिया जा सकता है।
उर्दू के मशहूर अपसाना निगार, सदाअत हसन मंटू पर बनी बायोपिक ‘मंटू’ में प्रसिद्ध अभिनेत्री ने अभिनय किया है। खबर है कि बहुत जल्द ही गुरूदत्त और मीनाकुमारी पर भी बायोपिक की तैयारी चल रही है।

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