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खूबसूरती तक सीमित बॉलीवुड

कान फिल्म फेस्टवल में इस बार भारतीय सिने जगत के सितारों की खूबसूरती बेशक चर्चा में रही, लेकिन कोई भी भारतीय फिल्म ऐसी नहीं रही जो इस फेस्टिवल में अपनी छाप छोड़ पाई हो। ऐसे में सवाल उठने स्वभाविक हैं कि क्या सितारों की खूबसूरती की चर्चा भर से हमें खुश रह जाना चाहिए या फिर इस दिशा में भी सोचना होगा कि अंतरराष्ट्रीय समारोहों में भारतीय फिल्मों पर कब चर्चा होगी? आश्चर्यजनक है कि पिछले नौ वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी भी भारतीय फिल्म को इस समारोह में एंट्री ही न मिली हो। 14 से 25 मई 2019 तक चले इस फिल्म महोत्सव में मैक्सिकन फिल्म निर्माता एलेजांद्रो गोंजालेज इनेरीतु ने जूरी अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। पाल्म डी’ और बॉन्ग जून-हो बोंग पुरस्कार जीतने वाले पहले कोरियाई निर्देशक बने। उन्हें ‘पैरासाइट’ फिल्म के निर्देशन के लिए यह पुरस्कार दिया गया।

पिछले वर्ष भारत में 1,800 से अधिक फिल्में बनी, जो कि दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। घरेलू स्तर पर तो बॉलीवुड का जवाब नहीं। हर साल यहां हजारों छोटी-बड़ी फिल्में बनती हैं और करोड़ों का फायदा होता है। बॉलीवुड एक इंडस्ट्री के रूप में तो लगातार फल-फूल रहा है। लेकिन सवाल यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के फिल्म महोत्सवों में ऐसी इंडस्ट्री को एक अलग पहचान और प्रशंसा क्यों नहीं मिलती है?

कान फिल्म समारोह के रेड कार्पेट पर हर साल बॉलीवुड अभिनेत्रियां एक से बढ़कर एक लुक में नजर आती हैं। लेकिन अगर इस साल महोत्सव में शामिल फिल्मों पर नजर डालें, तो कोई भी भारतीय फिल्म नहीं मिलेगी जिसकी चर्चा समारोह में हुई। 1946 से शुरू हुए इस महोत्सव में कुछ भारतीय फिल्मों ने बहुत खास पुरस्कार जीते हैं। लेकिन बीते कुछ दशकों से तो वे मुख्य प्रतियोगिता में भी शामिल नहीं हुई हैं। आधिकारिक रूप से इस साल चयन समिति के पास भेजी गई कुल 1,845 फिल्मों में एक भी बॉलीवुड की फिल्म नहीं थी।

दक्षिणी फ्रांस के कान में आयोजित इस 72वें समारोह में हिस्सा लेने पहुंची 32 वर्षीया भारतीय अभिनेत्री हुमा कुरैशी डिजाइनर ड्रेस में रेड कार्पेट पर उतरीं, वह काफी खूबसूरत लग रही थीं। हुमा का कहना है कि ‘दुर्भाग्य की बात है कि इस साल कान में कोई भी भारतीय फिल्म नहीं है। लेकिन अब वक्त आ गया है कि भारत में भी चुनौतीपूर्ण सिनेमा का निर्माण हो।’ हालांकि बीते सालों में कई बॉलीवुड फिल्में प्रतियोगिता में रही हैं। हाल के सालों में बॉलीवुड में बड़ी बजट की हिट फिल्में बनाने पर ही जोर रहा है और इस दौर में बहुत बारीक, आर्ट हाउस परफॉर्मेंस वाली फिल्में बनाने की ओर ध्यान नहीं रहा। ऐसी खास और मौलिक किस्म की फिल्में ही कान जैसे अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में ध्यान खींचती हैं।

उन्होंने कहा कि ‘हम बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों को लेकर इतने दीवाने हो चुके हैं कि इसे बदलने में लंबा वक्त लगेगा।’ कुरैशी ने सन 2012 में पहली बार कान में शिरकत की थी, जब उनकी पहली फिल्म ‘द गैंग्स ऑफ वासेपुर’ रिलीज हुई थी। अपने आपको सबसे पहले कान फिल्म समारोह में ही बड़े पर्दे पर देखने वाली कुरैशी के लिए यह महोत्सव और भी खास है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘हमें छोटी स्वतंत्र फिल्मों के फलने- फूलने लायक जगह बनानी होगी। वरना कान या वेनिस फिल्म महोत्सवों में दिखाने लायक फिल्में कहां से आएंगी?’

कान में 12 दिनों तक चलने वाले इस सालाना फेस्टिवल में मुख्यधारा के कई भारतीय अभिनेता, अभिनेत्रियां और प्रोड्यूसर पहुंचे हैं। बॉलीवुड के लीड हीरो और हीरोइनें अब नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्मों पर भी मूल संस्करणों में दिखने लगे हैं। खुद हुमा कुरैशी भी छह पार्ट्स में बनी भारतीय थ्रिलर सिरीज ‘लीला’ को लेकर आई हैं। पहले छोटे पर्दे पर दिखने को लेकर भी बड़े अभिनेताओं में काफी हिचकिचाहट रहती थी, जो अब बहुत कम होती दिख रही है। फेस्टिवल लायक फिल्में बनाना शायद बॉलीवुड के लिए अगला क्रांतिकारी कदम हो।

फिल्म को हिस्सा न मिलने के बाद भी कान्स में बॉलीवुड छाया रहा और आए दिन चर्चा में रहा। भारतीय सुंदरियों ने इस समारोह में अपने फैशन अंदाज से ऐसा हल्ला बोला की राष्ट्रीय मीडिया हो या अंतरराष्ट्रीय मीडिया हर तरफ बॉलीवुड ही सुर्खियों में रहा।

इस समारोह में डेली सोप फेम और बिग बॉस सेंसेशन हिना खान पहली बार रेड कार्पेट पर चलीं। यह उनके लिए बड़ा मौका था। कान में किसी ब्रैंड का प्रमोशन करने के लिए पहुंचना और रेड कार्पेट पर वॉक का मौका मिलना हिना के बढ़ते करियर को बताता है। हिना के अलावा कंगना रनौत भी अपने इंडो वेस्टर्न लुक के कारण सुर्खियों में रही। कंगना को तो अपनी अजीब ड्रेस के लिए ट्रोलर्स ने सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल भी किया।

इसके अलावा ऐश्वर्या राय ने अपनी बेटी के साथ रेड कॉर्पेट पर वॉक किया। ऐश्वर्या राय बच्चन भारत की एकमात्र अभिनेत्री हैं जो डेढ़ दशक से ज्यादा से कान फिल्म महोत्सव में शिरकत कर रही हैं। उन्होंने महोत्सव में रेड कार्पेट पर भारत की लगातार उपस्थिति दर्ज कराई है। यह उनका लगातार 18वां साल है। महोत्सव में रेड कार्पेट पर कुछ इस अवतार में नजर आईं। डिजाइनर जां लुई साबाजी की डिजाइन की हुई पीले और हरे रंग के अपने फिशकट गाउन के साथ ऐश्वर्या ने कोई गहना नहीं पहना था। दीपिका पादुकोण, सोनम कपूर, हुमा कुरैशी और मल्लिका शेहरावत भी इस समारोह का हिस्सा बनीं।

भारतीय सुंदरता के इन जलवों से खुशी तो होती है लेकिन सिने प्रेमियों के लिए यह बड़ी टीस की बात होगी कि इतनी बड़ी इंडस्ट्री मिलकर एक ऐसी फिल्म नहीं बना सकी जिसे कान्स जैसे फिल्म समारोह में प्रदर्शित करने के लायक समझा जाए।

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