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आयुष्मान ने किया शूजित सरकार का धन्यवाद, कहा- यहां तक पहुंच चुका हूं आपका हाथ थामकर

आयुष्मान ने किया शूजित सरकार का धन्यवाद, कहा- यहां तक पहुंच चुका हूं आपका हाथ थामकर

आयुष्मान खुराना और अमिताभ बच्चन की फिल्म गुलाबो सिताबो लोगों को बेहद पसंद आ रही है। बिग बी के साथ काम करने का सपना हर एक्टर का होता है, जब आयुष्मान को यह मौका शूजित सरकार ने दिया तो वे इससे जुड़ी अपनी भावनाएं शेयर करने से खुद को रोक नहीं पाए। सोशल मीडिया पर आयुष्मान लिखते हैं- दादा आप मेरे गुरु हैं, आपका हाथ थामकर यहां तक पहुंच चुका हूं।

आयुष्मान ने 2004 में रियलिटी शो एमटीवी रोडीज का दूसरा सीज़न जीता और एंकरिंग करियर में कदम रखा। उन्हें शूजित सरकार ने ही 2012 में रोमांटिक कॉमेडी विक्की डोनर के साथ फिल्मों में एंट्री करवाई थी। तब से अब तक कई हिट फिल्में दे चुके आयुष्मान को अंधाधुन में उनके अभिनय के लिए नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है।

फिल्म ‘गुलाबो सिताबो’ अमेजन प्राइम पर 200 देशों और 15 भाषाओं में सबटाईटल्स के साथ रिलीज हुई है। फिल्म में अमिताभ मिर्जा शेख के रोल में हैं जो अपनी पुरानी हवेली से बेहद लगाव रखता है। एक किराएदार बांके यानी आयुष्मान खुराना उस हवेली पर अपना अधिकार जमाने की कोशिश करता है और चाहता है कि मिर्जा जल्द से जल्द मर जाए। दोनों के बीच फिल्म में यही नोंक-झोंक दिखाई गई है।

‘गुलाबो सिताबो’ भारतीय सिनेमा में इस बात के लिए तो याद की जाएगी कि थिएटर्स को गच्चा देकर सीधे मोबाइल स्क्रीन पर पहुंचने वाली यह पहली फ़िल्म है। मगर, अमिताभ बच्चन की बेहतरीन अदाकारी के बावजूद उनकी ‘मास्टरपीस’ फ़िल्मों की लिस्ट में शामिल नहीं हो पाएगी।

क्लाइमैक्स का आख़िरी दृश्य दरअसल इस फ़िल्म की समीक्षा ख़ुद ही कर देता है। आख़िरी सीन में दिखाया जाता है कि मिर्ज़ा हवेली से मिली जिस एंटीक कुर्सी को ढाई सौ रुपये में बेच देता है, शो रूम में उसी कुर्सी पर 1 लाख 35 हज़ार रुपये का टैग लगाकर बेचने के लिए रखा जाता है।

संदेश साफ़ है, हक़दार वही बनता है, जिसे उस चीज़ की क़ीमत का अंदाज़ा हो। फ़िल्म ख़त्म होने के बाद ज़हन में यही आता है कि अमिताभ उसी ‘एंटीक कुर्सी’ की तरह हैं, जो बेशकीमती है और शूजित सरकार नासमझ ‘मिर्ज़ा’ की तरह, जिसने उस लखटकिया कुर्सी को कौड़ियों के मोल बेच दिया।

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