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Editorial

समरथ को नहिं दोष गोसाईं

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और प्रदेश के एक महत्वपूर्ण शहर बरेली के बीच पड़ता है एक जिला, नाम है शाहजहांपुर। इस जिले का नाम मुगल बादशाह शादाबउद्दीन मोहम्मद खुर्रम उर्फ शाहजहां के नाम पर है। अभी तक इसका नाम यथावत है। भविष्य में शायद लक्ष्मण नगर, दीनदयालपुर या वर्तमान सत्ता प्रतिष्ठान को कर्णप्रिय लगने वाले किसी अन्य के नाम पर हो जाए तो कह नहीं सकता। हाल-फिलहाल तक इसका नाम शाहजहांपुर बरकरार है। इस शाहजहांपुर को कई कारणों से ख्याति मिली है तो कई कारणों से यह कुख्यात भी हुआ है। यहां कृभको का रासायनिक खाद बनाने का बड़ा कारखाना है। 1200 मेगावाट बिजली उत्पादन करने वाला रोजा पावर प्लांट भी यहीं है, तो भारतीय सेना के लिए कपड़े तैयार करने वाली आॅर्डिनेन्स क्लोरिंग फैक्ट्री भी 1914 में यहीं स्थापित की गई। आज भी यह भारतीय सैन्य बलों की यूनिफार्म बनाती है। ‘काकोरी कांड’ को अंजाम देने वाले शहीद राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्लाह खान इसी जिले की माटी में जन्मे थे। यहीं जन्मा है प्रसिद्ध सरोद वादन का शाहजहांपुरा घराना जिसकी परंपरा के संवाहक हैं उस्ताद अमजद अली खान साहब। मुंबई फिल्म जगत को राजपाल यादव सरीखे विलक्षण प्रतिभा के धनी अदाकार को इसी शाहजहांपुर ने दिया। यह सब शाहजहांपुर की ख्याति के कारक और उसकी धरोहर हैं।

इसी शाहजहांपुर की 2015 में गूंज पूरे देश ने एक बेहद शर्मनाक घटना के चलते सुनी थी। क्योंकि हम भूलने की बीमारी के शिकार मुल्क हैं इसलिए स्मरण कराना जरूरी है कि इसी शाहजहांपुर की एक हिम्मतवाली लड़की ने 2015 में अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए जब अपनी आपबीती सुनाई तो समाज में उच्च स्थान पर विराजमान एक ‘महापुरुष’ का असली चेहरा बेनकाब हुआ। भगवान का दर्जा पाए, वर्तमान प्रधानमंत्री तक की आस्था के प्रतीक रहे आसाराम बापू का सच पूरे जनमानस की आस्था हिला गया। आसाराम जेल में है और हाल-फिलहाल उसके बाहर आने का कोई स्कोप नहीं है। 2019 में एक बार फिर से यहीं की एक लड़की ने जब अपना मुंह खोला तो एक और धर्म गुरु नंगा हो गया। धर्म गुरु होने के साथ-साथ यह शख्स राजनेता भी है। अटल जी की सरकार में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री रहे इस ‘पुण्यश्री’ चिन्मयानंद बापू का सच आसाराम बापू के सच समान ही भयावह है। इन महाशय ने अपने शिक्षण संस्थान से कानून की पढ़ाई कर रही एक लड़की की कमजोर आर्थिक स्थिति का फायदा उठा उसका शारिरिक शोषण किया। लड़की ‘बापू जी’ की मालिश करने के बहाने हाॅस्टल से बुलाई जाती। ‘बापूजी’ संपूर्ण नग्न अवस्था में पहले मालिश करवाते फिर बाकी सब करते। ‘अति सर्वत्र वर्जयेत’ को ‘बापूजी’ भूल गए। लड़की ने साहस किया, बापू का वीडियो बनाया और उसके राजनीतिक रसूख को समझते हुए सोशल मीडिया के सहारे सारा सच सामने ला दिया। मामला राजस्थान में दर्ज हुआ। चिन्मयानंद गिरफ्तार भी हुआ लेकिन उसको बचाने के लिए इस बार उत्तर प्रदेश की सरकार मैदान में उतर गई। लड़की की एफआईआर मामूली धाराओं में दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच बापू के काले कारनामों को सामने लाने से कहीं ज्यादा लड़की की पड़ताल पर केंद्रित हो गई। पुलिस ने लड़की पर चिन्मयानंद को ब्लैकमेल करने का दोषी पाया। लड़की और उसके एक साथी को गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जेल भेज दिया गया। इसके बाद जैसा होता आया है जनता जनार्दन सारे मामले को भूल गई। यदा-कदा समाचारों में पढ़ने को, सुनने को जो कुछ मिलता रहा, वह लड़की के चरित्र को ज्यादा दागदार कराने वाला था। चिन्मयानंद की कारगुजारी पर न तो फिर कोई बोला, न ही कुछ समाचारों में आया। कुछ महीने जेल में रह चिन्यामयानंद फरवरी, 2020 में जमानत पा गया। इस पूरे प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक स्पेशल टीम गठित कर जांच करने को कहा था। 20 सितंबर, 2019 के दिन इस टीम के मुखिया आईपीएस अफसर नवीन अरोड़ा ने प्रेस कांफ्रेंस कर दावा किया था कि चिन्मयानंद ने अपने पर लगे हर आरोप को स्वीकार लिया है। यह भी कहा कि वह अपनी हरकतों पर बेहद शर्मिंदा है। 25 सितंबर 2019 को इसी स्पेशल टीम, इन्हीं आईपीएस ने पीड़िता लड़की पर चिन्मयानंद से पांच करोड़ रुपयों की मांग करने यानी ब्लैकमेल करने का आरोप लगा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके बाद ममता बनर्जी के शब्दों में कहंू तो ‘खेला’ शुरू हो गया। हम सब पूरे मामले को भूल गए और ‘सेटिंग-गैटिंग’ के लिए मैदान खुला छोड़ दिया। नतीजा गत् सप्ताह 26 मार्च के दिन लखनऊ की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने चिन्मयानंद को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने पीड़िता लड़की और उसके तीन दोस्तों को भी ब्लैकमेलिंग के आरोपों से बरी कर डाला है। जाहिर है न्यायालय ने ऐसा फैसला दोनों ही पक्षों के खिलाफ पर्याप्त सबूत न मिलने के चलते दिया
होगा।

देखिए है न कमाल की बात। जिस मामले की गूंज पूरे देश में गूंजी हो। स्वयं सबसे बड़ी अदालत ने जिसका खुद ही संज्ञान लेते हुए स्पेशल जांच टीम बनाने का आदेश दिया हो। जांच टीम ने बकायदा प्रेस काॅन्फ्रेंस कर दावा किया हो कि चिन्मयानंद ने अपराध कबूल कर लिया है, फिर दावा किया हो कि जांच टीम चिन्यमयानंद को ब्लैकमेल किए जाने के सारे सबूत बरामद कर चुकी है, उस मामले का अंतिम निष्कर्ष निकला कि दोनों ही अपराधी दरअसल अपराधी हैं ही नहीं। निर्दोष हैं, इसलिए बरी किए जाते हैं। इस निर्णय के बाद बहुत संभव है कि अब दूसरे ‘पूज्यश्री’ यानी आसाराम बापू के मामले में भी ‘खेला’ शुरू हो जाए या शायद हो चुका हो। एक पुण्यात्मा बाहर आ चुकी है, बेदाग, दूसरी आने वाली हो। इसे मेरी आशंका मात्र मत मानियेगा। ऐसा होता आया है अनादिकाल से। जो समर्थ है उस पर दोष नहीं लगाने की बात तो हमारे धर्मग्रंथों में कही गई है। ‘राम चरित्र मानस’ का एक प्रसंग है। देवर्षि नारद माता पार्वती के शिव भगवन संग विवाह की बातचीत करने जब पर्वत राज के पास जाते हैं। तब वे कहते हैं ‘समरथ को नहिं दोष गोसांईं’। भगवान शिव की तमाम अच्छाइयों का वर्णन करते हुए वे शिव की वेशभूषा को नजरअंदाज करने की सलाह पार्वती के पिता को देते हैं। नारद कहते हैं- एको ही दोषो गुण सन्निपाते, निमज्जितिन्दो किरणे शिवाड्ः। इसका अर्थ है यदि कोई सर्वगुण संपन्न हो तो उसके एकाध अगुणों को नहीं देखा जाना चाहिए।

हम हर ब्रह्मवाक्य को अपनी सुविधानुसार परिभाषित करने में माहिर मुल्क हैं। इसलिए सामथ्र्यवान होना जरूरी है, हम सामथ्र्य का अर्थ गुणों से नहीं, बल्कि धन और सत्ता बल से मानते हैं इसलिए जिसके पास दौलत और ताकत है, उसके दोष नहीं देखने वाला समाज हम बन चुके हैं। यही कारण है कि चिन्मयानंद यौन शोषण के आरोपों से बरी हैं, उनके खिलाफ भविष्य में पीड़िता मुंह न खोले इसलिए पैकेज डील में उसके खिलाफ भी जांच में ‘खेला’ खूब खेला गया। नतीजा अदालत के पास सब कुछ जानते-समझते हुए भी दोनों को बरी करने के सिवा कोई चारा था नहीं। यह भी संभव है कि पीड़िता के खिलाफ ब्लैकमेलिंग का आरोप ही मनगढ़ंत हो ताकि लड़की दबाव में आकर चिन्यमयानंद के खिलाफ दिए अपने बयानों से पलटी मारने को विवश हो जाए। अब इंतजार कीजिए दूसरे ‘बापू जी’ के बरी होने का। हम यह सब देखने-भोगने के लिए अभिशप्त समाज हैं, क्योंकि हमारी तटस्थता ने हमें निर्जीव बना डाला है। इसलिए ऐसे ही अपने घरों में अपने खोलों में दुबके रहिए, इंतजार कीजिए, पूरे विश्वास के साथ कि धर्म की हानि का चरमकाल आने पर कृष्ण अवतार जरूर लेंगे और पापियों का नाश करेंगे। सावधान, वक्त बेहद खराब है। मेरी बातों में आकर कहीं खुद ही मोर्चा लेने का मन न बना लेना। मेरी बकवास पर रत्ती भर ध्यान न दें, यह ‘वैधानिक चेतावनी’ समान मानकर चलिए। हां, हो सके तो अपनी रीढ़ को लचीला बनाने का पूरा प्रयास करियेगा ताकि जरूरत पड़ने पर उसका सदुपयोग कर सकें।

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