[gtranslate]
Editorial

आगे अंधेरी गली है

प्रिय तीरथ रावत जी,

राज्य का नया प्रधान सेवक बनने पर आपको बहुत बधाई। आपको यह जिम्मेदारी अपने पूर्ववर्ती के कुशासन के चलते मिली है। आपकी पार्टी केंद्रीय नेतृत्व ने आपकी स्वच्छ-बेदाग छवि पर भरोसा करते हुए राज्य विधानसभा में 56 विधायकों में से किसी को चुनने के स्थान पर आपको राज्य की कमान सौंपी है तो निश्चित ही आप पर, आपके कंधों पर न केवल पार्टी आलाकमान की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का बोझ है, बल्कि अपने रहनुमाओं की काहिली से त्रस्त जनता की अपेक्षाओं का भी भारी-भरकम भार है। समस्या आपके समक्ष यह है कि इन अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए आपके तरकश में कोई देव सिद्ध बाण नहीं है। विरासत में आपको ऐसे बाण मिले हैं जो निशाने पर लग ही नहीं सकते क्योंकि सभी ऐसे बुझे हुए तीर हैं जिनकी आग स्वार्थ की आंधी कब के लील चुकी है। 2017 में जब आपकी पार्टी अभूतपूर्व बहुमत के साथ सत्ता में आसीन हुई थी तबसे अब तक गंगा में खासा पानी बह चुका है और जिन उम्मीदों से जनता ने आपकी पार्टी को तीन चैथाई बहुमत देकर राज्य की कमान सौंपी थी, आपके पूर्ववर्ती श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उन उम्मीदों को बीते चार बरसों में ध्वस्त कर डाला है। 2017 में उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड में आपकी पार्टी भाजपा को मिला जनादेश दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के करिश्माई नेतृत्व पर जनता के भरोसे का परिणाम था। साथ ही वह जीत उत्तराखण्ड में हरीश रावत सरकार की बाबत उस परसेप्शन का कमाल भी था जिसने तत्कालीन रावत सरकार द्वारा किए गए कई जन सरोकारी कामों, योजनाओं की चमक पूरी तरह ध्वस्त कर जनता के मन में हरीश सरकार की छवि एक भ्रष्ट सरकार की चस्पा कर डाली थी। लगभग ठीक वैसे ही हालात में आज आपकी सरकार बनी है। सत्ता में चार बरस पूरे कर चुकी इस भाजपा सरकार के पास उपलब्धि के नाम पर एक बड़ा ‘शून्य’ है। हर मोर्चे पर आपकी पार्टी की सरकार जनता को मायूसी और आक्रोश के सिवा कुछ दे पाने में सर्वथा विफल रही है। आपके पूर्ववर्ती ने सत्ता संभालने के साथ ही राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त कराने का संकल्प लिया था। नेशनल हाईवे-74 के चैड़ीकरण में हुए मुआवजे घोटाले की सीबीआई जांच के आदेश दे उन्होंने मुझ सरीखों तक को आश्वस्त कर डाला कि इस बार सही में एक जन सरोकारी सरकार सत्ता में आसीन हुई है। चार बरस बीत गए लेकिन सीबीआई जांच तो छोड़िए राज्य की पुलिस द्वारा भी इस घोटाले के सच से पर्दा न उठाया जा सका है। उल्टा स्वयं श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की साख पर प्रश्न चिन्ह इन चार बरसों में लगते चले गए हैं। उनके विश्वस्त सहयोगी के.एस. पंवार पर लगे मनी लाॅन्ड्रिग के आरोपों की आंच से त्रिवेंद्र झुलसे तो अपने मंत्री मण्डलीय सहयोगियों के काले कारनामों ने भी उनके ‘जीरो टाॅलरेंस’ की पोल खोल डाली। सत्ता की हनक के चलते इन चार वर्षों में त्रिवेंद्र जनता से दूर होते चले गए। नतीजा आपकी ताजपोशी होना है।

प्रिय तीरथ जी, आपके समर्थक, आपके परिजन, आपके शुभेच्छु, सभी खासे प्रसन्नचित्त होंगे, जश्न भी मना रहे होंगे कि अंततः पार्टी ने आपकी निष्ठा, सरलता, बेदाग छवि और सेवा भाव को पहचाना, आपको उसका ईनाम दिया। निःसंदेह उनका जश्न मनाना बनता है। आप लेकिन अवश्य महसूस रहे होंगे कि इस ताज में फूल कम, कांटों की भरमार हैं। मैं आपको समस्त प्रदेशवासियों की तरफ से कहना चाहता हूं कि आपके कंधों पर न केवल आपकी पार्टी के द्वारा आप पर जताए गए विश्वास को जिलाए रखने की ही जिम्मेदारी है बल्कि सवा करोड़ उत्तराखण्डियों की अपेक्षाओं, निराशाओं, हताशा और उनके भविष्य से जुड़े प्रश्नों का भार भी है। एक ऐसी व्यवस्था आपको विरासत में मिली है, जिसमें हर कोने, हर एंगल से दीमक लग चुका है। अपने मंत्रीमण्डलीय सहयोगियों को ही देख लीजिए। आपको ताज तो पार्टी ने पहना डाला लेकिन ताज के पहरेदार चुनने की छूट नहीं दी। नतीजा आपके ईद-गिर्द ऐसों की जमात का होना है जिनमें से एकाध को छोड़ सभी का दामन दागदार है। ऐसी टीम के आप कप्तान बनाए गए हैं जिसमें शामिल अधिकांश खिलाड़ी लकवाग्रस्त हैं। आपका मार्ग बेहद कठिन है। न केवल अपने साथियों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का भारी दबाव आप पर रहेगा, उनके टुच्चे लालच भी आपकी गति बाधित करने का काम करेंगे। ऐसे में आपको हर कदम सोच विचार के, विश्वस्तों के साथ कई बायर मंत्रणा कर उठाने होंगे, अन्यथा यदि आप दबाव में आ गए तो स्मरण रखिऐगा इतिहास आपको माफ नहीं करेगा। अंग्रेजी की एक कहावत आपने अवश्य सुनी-गुनी होगी-‘ए मैन इज नोन बाय द कंपनी ही कीपस्’। आपको अपनी कोर टीम में ऐसों का चयन करना होगा जिनके हृदय में उत्तराखण्ड़ी सरोकार वास करते हों। इसे इत्तेफाक कहा जा सकता है कि आप जिन हालात में सीएम बनाए गए हैं, ठीक वैसे ही हालात में आपके राजनीतिक गुरु जनरल भुवन चन्द्र खण्डूड़ी जी को ‘खण्डूड़ी है जरूरी’ कह राज्य की कमान 2011 में सौंपी गई थी। उन्होंने इस नारे को सार्थक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अपने पहले मुख्यमंत्रित्वकाल में गूंजी भ्रष्टाचार की सारंगी का राग उन्होंने एक कठोर लोक आयुक्त कानून के जरिए कम करा। इतिहास पुरुष भी इसी के चलते वे बने। लेकिन अपनों ने ही उनकी हार की बिसात बिछा उन्हें हरवा डाला। आपके साथ भी कुछ ऐसी ही बिछात अवश्य बिछाई जाएगी। आपको लेकिन इस सबसे ऊपर उठकर अपने अल्प मुख्यमंत्रित्व काल में कुछ ऐसे अवश्य करना चाहिए ताकि दशकों के संघर्ष, अनेक शहादतों, मातृशक्ति पर हुए घोर जुल्मों की बुनियाद पर बने इस राज्य की दशा और दिशा बदल पाये।

मुख्यमंत्री जी, आपके पूर्ववर्ती ने पिछले बीस बरस से राज्य हितों के लिए संघर्षरत हमारी पत्रकारिता पर हमेशा संदेह किया। वे इसे समझ न सके कि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो स्वहित से परे रहकर, बगैर राग-द्वेष, बगैर चारण-भाट बने, बगैर पद्म पुरस्कार पाने की लालसा लिए अपने कत्र्तव्य पथ पर चलते रहते हैं। यह अखबार कुछ ऐसा ही है। आपके पूर्ववर्ती हमेशा इस भ्रम, इस मुगालते में रहे कि हम उनके विरोधी हैं इसलिए निष्पक्ष नहीं हैं। मैं आपको यकीन दिलाना चाहता हूं हम हर उस शक्ति के, उस संघर्ष के, उस सोच के अनुरागी हैं, मित्र हैं, सहयात्री हैं, जो निष्काम भाव से राज्य के हितों को समर्पित है। बाकी किसी संग न हमारा बैर है, न अनुराग है। आप राज्य के लिए यदि ऐसी ही भावना लिये सत्तारूढ़ हुए हैं तो यकीन रखियेगा, हम आपके हमसफर रहेंगे। और अंत में आपका ध्यान पत्रकार मित्र वेद विलास जी की एक फेसबुक पोस्ट की तरफ आकर्षित करना चाहता हूं। जिसमें उन्होंने आपसे आग्रह किया है कि ‘तीरथ भाई! तीरथु ही बने रहना ….।’ महत्वपूर्ण पोस्ट है। इस पोस्ट को अवश्य पढ़ियेगा ताकि आपके जो भी शुभेच्छु हैं, उनकी भावनाएं आप तक पहुंच सकें, आप उनके कहे का मर्म समझ सकें। अमेरिका के चैतीसवें राष्ट्रपति आइजनहावर का एक कथन आपकी नजर-The Supreme Quality of leadership is unquestionable integrity. Without it, No real success is possible, No matter whether it is on a section gang, football field, in an army, or in an office’

यदि आप ऐसी नेतृत्व क्षमता पैदा कर पाए तो ठीक, अन्यथा आपके सामने ऐसी अंधेरी गली है जिससे पार पाना बेहद कठिन है। नहीं जानता आप फिल्मों के कितने शौकीन हैं। शायद आपने गुजरे जमाने की मशहूर फिल्म ‘मुगलेआजम’ देखी हो। उसका एक डायलाॅग खासा चर्चित हुआ था। फिल्म में शहंशाह अकबर अनारकली से कहते हैं- ‘अनारकली, हम तुम्हें जीने नहीं देंगे, सलीम तुम्हें मरने नहीं देगा।’ आपके सामने भी ठीक ऐसे ही हालात हैं। आप यदि कठोर फैसले लेते हैं तो आपके ही संगी-साथी आपकी राह में बाधाओं का अंबार लगा आपको जीने नहीं देंगे और जनता की चीत्कार आपको मरने नहीं देगी। ऐसे हालत में केवल और केवल पवित्र उद्देश्य, पवित्र साधन और कठोर संकल्प ही आपकी और राज्य की जीत का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

अशेष-अनंत शुभकामनाओं सहित

You may also like

MERA DDDD DDD DD