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प्राथमिक शिक्षा पर संकट

प्राथमिक शिक्षा पर संकट

संजय स्वार

सरकार की लापरवाही से सैकड़ों प्राथमिक शिक्षकों का भविष्य खतरे में है उत्तराखण्ड में शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते विशिष्ट बीटीसी के माध्यम से नियुक्त शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ गया है। शिक्षा का अधिकार के तहत प्राथमिक शिक्षकों के लिए शैक्षणिक मानक बदल गए हैं, जिसके अंतर्गत प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए डीएलएड या ब्रिज कोर्स होना अनिवार्य है। नेशनल कौसिंल ऑफ टीचर्स एजुकेशन एनसीटीई के इस मानक के चलते १६६०० शिक्षक ३१ मार्च २०१९ को अपात्र हो जायेंगे। इन शिक्षकों को ३१ मार्च २०१९ से पहले डीएलएड या ब्रिज कोर्स करना अनिवार्य है। उत्तराखण्ड में २००३ से २०१६ के बीच सरकार ने बीएड शिक्षा प्राप्त १६६०० अभ्यर्थियों की प्राथमिक शिक्षक के रूप में नियुक्ति की है। इन शिक्षकों को नियुक्ति देने से पूर्व विशिष्ट बीटीसी एवं ६ माह का सेवारत प्रशिक्षण भी कराया, पर इस पाठ्यक्रम के लिए एनसीटीई से मान्यता नहीं ली गई। जबकि इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार पर थी। लेकिन शासन स्तर पर की गई ये लापरवाही विशिष्ट बीटीसी धारक शिक्षकों पर भारी पड़ रही है। ऐसा नहीं था कि ये शिक्षा विभाग के संज्ञान में नहीं था। २००५ से कुछ समय तक विभाग एनसीटीई से इस संबंध में अवश्य पत्र व्यवहार करता रहा। लेकिन समय के साथ अधिकारी इस गंभीर प्रकरण को भूल गए। जब एनसीटीई के नये मानक सामने आए तो शासन में अफरा- तफरी मची। एनसीटीई के नये मानकों के अनुसार ३१ मार्च २०१९ तक हर अप्रशिक्षित प्राथमिक शिक्षक के लिए दो वर्ष का डीएलएड तथा बीएड प्रशिक्षित को ब्रिज कोर्स करना अनिवार्य है। ऐसा न होने पर इन शिक्षकों को अपात्र मान सेवाएं समाप्त हो जाएंगी। विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों का कहना था कि इस प्रशिक्षण की मान्यता लेना सरकार की जिम्मेदारी है तथा विरोध स्वरूप इन शिक्षकों ने न ही डीएलएड न ही ब्रिज कोर्स के लिए पंजीकरण करवाया। शिक्षकों का कहना है उनका हर प्रशिक्षण सरकार के दिशा-निर्देश पर होता है तो इसकी मान्यता लेने की जिम्मेदारी सरकार की थी न कि शिक्षकों की। अब इस उलझे मामले में प्राथमिक शिक्षक और सरकार आमने-सामने है। अपने वृहद आंदोलन में प्राथमिक शिक्षकों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है। सरकार ने पहले इन शिक्षकों के हितों पर किसी भी प्रकार की आंच न आने देने का आश्वासन दिया था। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, वित्तमंत्री प्रकाश पंत और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर के सामने अपना पक्ष रखा था, परंतु अभी तक कोई प्रगति दिखी नहीं है। राज्य सरकार ने बैकडेट से विशिष्ट बीटीसी को मान्यता देने की गुजारिश की थी, परंतु एनसीटीई का कहना है कि बैक डेट से मान्यता संभव नहीं है। राज्य में प्राथमिक शिक्षा विभाग के वर्तमान ढांचे में प्राथमिक और जूनियर के प्राध्यपकों एवं सहायक अध्यापकों के लगभग ३५ हजार पद मंजूर हैं। वर्तमान में लगभग ३३ हजार शिक्षा कार्यरत हैं। जिनमें से १६६०० शिक्षक और प्राध्यापक विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षित हैं। अगर इस समस्या का समाधान नहीं निकलता है तो ये शिक्षक अपात्र हो जायेंगे। ऐसी स्थिति में प्राथमिक शिक्षा का ढांचा बिल्कुल चरमरा जाएगा। शिक्षकों ने आंदोलन कर सरकार से इस समस्या का तुरंत समाधान करने को कहा है। साथ ही असहयोग आंदोलन भी शुरू कर दिया है। देखना है सरकार इस समस्या का समाधान कैसे और कब तक निकाल पाती है।

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