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धधकते जंगल

जसपाल नेगी
फायर सीजन में प्रत्येक साल प्रदेश के जंगलों में आग लगती है। हर साल हजारों हेक्टेयर जंगल जलकर स्वाह हो जाते हैं। करोड़ों रुपए की वन संपदा राख और वन्य जीव काल-कवलित होते हैं। मगर सरकार हमेशा देर से जागती है। राज्य गठन के अठारह साल बाद भी जंगलों को धधकने से रोकने का स्थाई समाधान नहीं निकल पाया है

उ त्तराखण्ड में बेकाबू होती जंगलों की आग ने पहाड़ से लेकर प्रवास तक राज्यवासियों की बेचैनी बढ़ा दी है। अब तक लाखों रुपए की वन संपदा जलकर राख हो गई और बड़ी संख्या में जंगली जीव भी जान गवां बैठे हैं। स्थिति बहुत ही भयावह है। राज्य सरकार आग पर काबू पाने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद लेने की तैयारी में है। इससे पहले वर्ष २०१६ में राष्ट्रपति शासन के दौरान भी हेलीकॉप्टरों की मदद ली गई थी। चमोली जिले के भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि जरूरत पड़ी तो वनों की आग बुझाने के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद ली जाएगी। हेली सेवा प्रदाता कंपनियों से सरकार ने टाइअप किया है। मुख्यमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वनाग्नि की समीक्षा भी करेंगे। इस बीच राज्य में पिछले २४ द्घंटे के दरम्यान ही वनों में आग की द्घटनाओं में ४४ का इजाफा हुआ है। आग पर काबू पाने को पूरी ताकत झोंक दी गई है। वन कर्मियों के साथ पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के जवान और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग आग बुझाने में जुटे हैं। इन सभी की संख्या ४३०६ है। यही नहीं दावानल पर नियंत्रण के मद्देनजर २४८ वाहन भी लगाए गए हैं। राज्य का शायद ही कोई क्षेत्र ऐसा होगा जहां जंगल न धधक रहे हों। अब आग गांव-द्घरों तक भी दस्तक देने लगी है। ऐसे में चिंता और बढ़ गई है। जंगल किस तेजी से धधक रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि इस फायर सीजन में अब तक तक राज्य के जंगलों में आग की ७१७ द्घटनाएं हुई हैं। २२ मई को यह आंकड़ा ७६१ पहुंच गया। सबसे अधिक आग गढ़वाल क्षेत्र के जंगलों में भड़की हुई है। हालांकि आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग, पुलिस एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवानों के साथ ही स्थानीय ग्रामीण आगे आए हैं। २९६५ विभागीय कार्मिकों के साथ १२६९ स्थानीय लोग, पुलिस के ४५ और एसडीआरएफ-एनडीआरएफ के २७ जवान आग बुझाने में जुटे रहे। राज्य के पौड़ी जिले में कंडोलिया, अद्वानी, थपलियाल गांव, टेका के जंगलों में इस फायर सीजन की सबसे भीषण आग देखने को मिली। कंडोलिया के जंगल में लगी आग देखते ही देखते कमिश्नर गढ़वाल के शिविर कार्यालय, आवास, केंद्रीय विद्यालय परिसर तक फैल गई। कार्यालय में अधिकारी-कर्मचारी और आवास में रह रहे लोग द्घरों से बाहर निकल आए। केंद्रीय विद्यालय प्रशासन परिसर में कुहासा छाने पर पहले बच्चों को कंडोलिया खेल मैदान में सुरक्षित लाया गया। आग पर काबू नहीं होता देख, कुछ देर बाद अवकाश द्घोषित कर दिया। द्घटना की जानकारी पर वन, अग्निशमन और पुलिस विभाग के कर्मी आग पर काबू पाने में जुट गए। केवी प्रधानाचार्य सतनाम सिंह ने बताया कि विद्यालय परिसर में सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे आग की लपटें आने से कुहासा छा गया। जिससे बच्चों के आंखों में जलन, श्वास लेने में परेशानी होनी शुरू हो गई। उन्होंने कहा कि आग पर समय रहते काबू नहीं पाए जाने पर अवकाश द्घोषित कर दिया गया। डीएफओ गढ़वाल वन प्रभाग लक्ष्मण सिंह रावत और अग्निशमन अधिकारी प्रेम सिंह सती ने बताया कि संसाधनों की कमी के बावजूद आग पर काबू पाने के लिए दमकल पूरी जी जान से जुटा हुआ है। जनपद में इस फायर सीजन के दौरान अभी तक आगजनी की ३२२ द्घटनाएं सामने आई हैं। जिनमें ८९४.३५ हेक्टेयर वन भूमि में वन संपदा राख हो गई है। जिससे लगभग १८ लाख रुपए के नुकसान का अनुमान है। गढ़वाल वन प्रभाग में अभी तक आगजनी की १२७ द्घटनाएं, ४०५.३५ हेक्टेयर वन भूमि में करीब सात लाख रुपए का नुकसान हुआ है। सिविल वन प्रभाग पौड़ी में १६५ द्घटनाएं, ४५८ हेक्टेयर वन भूमि में करीब १० लाख रुपए के नुकसान का आंकलन किया गया है। लैंसडाउन वन प्रभाग में १६ द्घटनाओं में ०.५० हेक्टेयर वन भूमि में ३८७४९ रुपये के नुकसान का अनुमान है। कालागढ़ वन प्रभाग में २, भूमि संरक्षण रामनगर में ३ एवं भूमि संरक्षण वन प्रभाग में आगजनी की ९ द्घटनाएं सामने आई हैं। गढ़वाल मंडल में २२ मई को आगजनी की ७९ द्घटनाएं हुईं। २५३.९५ हेक्टअर वन भूमि में वन संपदा स्वाह हो गई। वन संरक्षक गढ़वाल कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जनपद पौड़ी के गढवाल वन प्रभाग में आगजनी की ३१, सिविल में ३८, बद्रीनाथ में ४, अलकनंदा में १, रुद्रप्रयाग में ५ द्घटनाएं सामने आई। जिनमें करीब छह लाख रुपए के नुकसान का आंकलन किया गया है। जिला मुख्यालय में आगजनी की द्घटना के बाद वातावरण में धुंध छाई रही। जो दमा के रोगियों को द्घातक मानी जाती है। जिला चिकित्सालय पौड़ी के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ वीआरवी सिंह ने बताया कि आगजनी की द्घटना दमा के रोगियों को जानलेवा हो सकती है। उन्होंने कहा कि जंगलों की आग से आंखों में जलन, श्वास लेने में दिक्कत सहित तमाम परेशानियां सामने आती हैं।

 

 

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