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युवा वोटरों पर खास ध्यान दे रही हैं राजनीतिक पार्टियां

नई दिल्ली। देश में इस समय युवा मतदताओं की बहुत बड़ी संख्या है। युवाओं का वोट नई सरकार के गठन में अहम भूमिका निभाता रहा है। लिहाजा राजनीतिक पार्टियां युवाओं को लुभाने के लिए अपने घोषणापत्रों में उन्हें भरपूर तरजीह देती हैं। आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए युवाओं को आकर्षित करने की रणनीतियां अपनाई जाने लगी हैं।
भारतीय जनता पार्टी युवाओं के साथ ही उन नए मतदाताओं पर विशेष ध्यान दे रही है जो पहली बार वोट करेंगे। नए मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने की जिम्मेदारी युवा मोर्चा को दी गई है। बताया जाता है कि मोर्चा के कार्यकर्ता एक खास अभियान ‘मेरा पहला वोट मोदी को’ के तहत नए वोटरों को आकर्षित करेंगे। जानकारी के मुताबिक पार्टी की ओर से युवा मोर्चा के लिए एक गाइड लाइन जारी की गई है। जिसके तहत मोर्चा कार्यकर्ताओं को अभियान के पहले चरण में 18 वर्ष के नए युवा मतदाताओं से संपर्क करने के निर्देश दिये गए हैं। कार्यकर्ता घर-घर जाकर युवा वोटरों से संपर्क कर उन्हें केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के बारे में जानकारी देंगे। खासकर अत्याधुनिक योजनाओं को विस्तार से बताया जाएगा। स्टार्टअप, स्टैंडअप योजना के बारे में विशेष रूप से बताया जाएगा। ऑनलाइन ट्रेडिंग से होने वाले फायदे से भी उन्हें अवगत कराया जाएगा। युवा मोर्चा कार्यकर्ता नए वोटरों और युवाओं को अहसास कराएंगे कि उनके और देश के हित में मोदी सरकार का फिर से सत्ता में आना कितना जरूरी है।
कांग्रेस भी युवाओं को पार्टी से जोड़ने की रणनीति में है। इसके लिए साल भर पहले ही राहुल गांधी को पूरी तरह से पार्टी की कमान सौंप दी गई थी। मध्य प्रदेश और राजस्थान में पार्टी ने बेशक राजनीतिक हालात की समीक्षा करते हुए पुराने अनुभवी नेताओं को मुख्यमंत्री पद पर बिठाया है, लेकिन युवाओं की भावनाओं को भरपूर महत्व दिया। एकतरफा पुराने नेताओं को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया बल्कि ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट जैसे युवा नेताओं से भी आलाकमान ने गंभीर मंत्रणा की। सचिन पायलट को तो उपमुख्यमंत्री तक बनाया। बताया जाता है कि कांग्रेस युवा मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए खास ध्यान दे रही है।

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