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युवाओं को नौकरी के बदले मिल रही पुलिस की लाठियां

कोरोना महामारी और विश्व में चल रहे युद्धों का पूरी दुनिया में इसका प्रभाव देखा गया है। बढ़ती महंगाई और बेरोज़गारी के कारण विदेश ही नहीं बल्कि देश में भी बहुत बुरा हाल है। भारतीय युवा अपनी डिग्री लेने के बावजूद भी बेरोजगार हैं जिसके कारण युवाओं में क्रोध बढ़ता ही जा रहा है। बेरोजगारी और महंगाई की मार ने देश के हालातों को और भी गंभीर कर दिया है। ऐसे में देश का हर एक नागरिक सरकार से उम्मीद में बैठा है, लेकिन सरकार भी ऐसे समय में नागरिकों की कोई सहायता नहीं कर रही है।  जिस कारण युवा धरना प्रदर्शन करने पर उतारू हैं। भारत के युवा सरकार के खिलाफ रोजगार को लेकर पहले भी कई बार धरना प्रदर्शन कर चुके हैं लेकिन सरकार से न तो आश्वासन मिला बल्कि धरना कर रहे युवाओं पर पुलिस कर्मियों द्वारा लाठीचार्ज किया जाता रहा है। इसी तरह का एक मामला हालही में बिहार के पटना से सामने आया है।
शिक्षक अभ्यर्थियों का प्रदर्शन
बिहार की राजधानी पटना में बीटीईटी पास शिक्षक अभ्यर्थियों का प्रदर्शन जारी है। जिस कारण डाकबंगला चौराहे पर अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। प्रदर्शनकारी शिक्षक अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। उनका कहना है कि सातवें चरण के शिक्षक नियोजन की विज्ञप्ति निकले बगैर वे वापस नहीं जाएंगे। पुलिस के पदाधिकारी और पटना सदर एसडीएम उन्हें समझाने में लगे हैं। इस बीच मौके पर तैनात एक पदाधिकारी ने एक प्रदर्शनकारी की लाठियों से पिटाई कर दी। उनके साथ सुरक्षा में तैनात सिपाहियों ने भी सड़क पर गिरे अभ्यर्थी को लाठी से पीटा। डाकबंगला चौराहे पर दंडाधिकारी के रूप में तैनात एडीएम लॉ एंड ऑर्डर केके सिंह ने उस अभ्यर्थी की पिटाई की। एक साथी की पिटाई से प्रदर्शनकारी जब और ज्यादा उग्र होने लगे तो केके सिंह को वहां से हटा दिया गया। उनके जाने के बाद सदर एसडीएम डाकबंगला पहुंच गए हैं।
आज सोमवार को लगभग 5000  से ज्यादा शिक्षक अभ्यर्थी डाकबंग्ला चौराहे पर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का जत्था सचिवालय की ओर बढ़ रहा था जिसे इनकम टैक्स के पास रोक दिया गया। उसके बाद अभ्यर्थी डाकबंगला पर आकर सड़क पर बैठ गए।  इसी दौरान एक की पिटाई की गई।
प्रदर्शनकारी शिक्षक अभ्यर्थी सातवें चरण की बहाली की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के लिए बिना विलम्ब किये भर्ती के लिए विज्ञापन निकाले जायें।
नीतीश सरकार के शिक्षा विभाग का तर्क है अभी छठे चरण के नियोजन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इस चरण के अभी लगभग 53 हजार पद खाली हैं। इस पर टीईटी पास अभ्यर्थियों का कहना है कि खाली पदों वाले विषय में रोस्टर के अनुसार आवेदक नहीं किये गए हैं जिस कारण यह रिक्तियां बनी हुई है। इन 53 हजार पदों के लिए नई विज्ञप्ति प्रकाशित किया जाए। सरकार इस पर उन्हें आश्वासन दे रही है पर कोई बहाली नहीं हो रही है। 2019 में  एसटीईटी पास कर चुके शिक्षक अभ्यर्थियों ने बताया कि एसटीईटी का आयोजन 8 साल बाद हुआ। नोटिफिकेशन 2019 में जारी किया गया। जनवरी 2020 में ऑफलाइन मोड में परीक्षा ली गई। लेकिन, कुछ परीक्षा केंद्रों पर फर्जीवाड़े की बात सामने आने पर उसे रद्द कर दिया गया। दोबारा इस परीक्षा का आयोजन सितंबर 2020 में किया गया। तब इसे ऑनलाइन मोड में किया गया
इन अभ्यर्थी का धरना प्रदर्शन करने के पीछे नौकरी न मिलना है। यह अभ्यर्थी 3 साल से नौकरी मिलने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार इन लोगों का नियोजन नहीं कर रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस मामले में शिक्षा मंत्री कोई जवाब नहीं दे रहे हैं जिस कारण उन्हें धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर हो गए हैं। सरकार और शिक्षा विभाग हमारी मांग को अनसुनी करती रहे हैं। यही कारण है कि नई सरकार बनने के बाद आज से प्रदर्शन शुरू किया गया है। जब तक एसटीईटी उतीर्ण अभ्यर्थियों का नियोजन नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे ही प्रदर्शन जारी रहेगा।

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