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येदियुरप्पा मंत्रिमंडल का विस्तार ,लिंगायत समुदाय को प्रमुखता

कर्नाटक में भाजपा की सरकार बनने के 25 दिन बाद मुखयमंत्री बीएस येदियुरप्पा के मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ। लम्बे इंतज़ार के बाद 20 अगस्त,मंगलवार को राज्यपाल वजुभाई द्वारा 17 मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गयी। मंत्रिमंडल में शामिल किए गए नए मंत्रियों में पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार, दो पूर्व उप मुख्यमंत्री के. एस. ईश्वरप्पा, आर. अशोक, निर्दलीय विधायक एच. नागेश, लक्ष्मण सावदी (जो विधानसभा या परिषद के सदस्य नहीं हैं) और विधान पार्षद कोटा श्रीनिवास पुजारी शामिल हैं। इनके अलावा, गोविंद एम. करजोल, अश्वथ नारायण सी. एन, बी. श्रीरामुलु, एस. सुरेश कुमार, वी. सोमन्ना, सी. टी. रवि, बासवराज बोम्मई, जे. सी. मधु स्वामी, सी. सी. पाटिल, प्रभु चौहान और शशिकला जोले अन्नासाहेब ने शपथ ली। शशिकला जोले अन्नासाहेब मंत्रिमंडल में शामिल की गई इकलौती महिला हैं।

येदियुरप्पा के इस पहले मंत्रिमंडल के विस्तार में भाजपा नेतृत्व ने जातीय समीकरण को साधने की हर संभव कोशिश की है। कर्नाटक के कैबिनेट विस्तार में लिंगायत समुदाय को प्रमुखता से जगह दी गयी है ऐसा इसलिए कि लिंगायत समुदाय को कर्नाटक में भाजपा का मुख्य मतदाता माना जाता है। प्रदेश में कुल 39 लिंगायत विधायक हैं।  खुद मुख्यमंत्री भी इसी समुदाय से आते हैं। यही वजह है की लिंगायत समुदाय के 8 विधायकों को शामिल किया गया है। गौरतलब है कि राज्य में जेडीएस -कांग्रेस सरकार गिरने के बाद येदियुरप्पा द्वारा 26 जुलाई को अकेले शपथ ली गयी थी। 26 जुलाई को येदियुरप्पा ने चौथी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। कर्नाटक में इससे पहले महीनों तक सियासी नाटक चलता रहा। जिसके बाद जेडीएस और कांग्रेस की गठबंधन की सरकार गिरने के बाद बीजेपी की सरकार बनी। वही दूसरी ओर कर्नाटक में फोन टैपिंग स्कैंडल का मामला भी राज्य भर में गरमाया हुआ है, जिसे मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि फोन टैपिंग मामले में उच्च स्तरीय जांच भी की जाएगी।हाल ही में गठबंधन की सरकार के दौरान कई बीजेपी नेता ब्यूरोक्रेट्स और पत्रकारों के फोन टैप करने का मामला सामने आया है।

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