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श्रमजीवी पत्रकार यूनियन और मातृ सदन आए जर्नलिस्ट अहसान के पक्ष में, CM से निष्पक्ष जांच की मांग 

पत्रकार अहसान अंसारी प्रकरण: तीन सप्ताह बाद भी DGP के आदेश हवा-हवाई

एक माह से फर्जी मामले में  जेल में बंद हरिद्वार के वरिष्ठ पत्रकार एहसान अंसारी के पक्ष में अब बहुत से लोग आने लगे हैं। जीवनदायिनी गंगा के रक्षक मातृ सदन के साथ ही प्रदेश की सबसे बड़ी पत्रकारों की संस्था श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के सदस्यों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने के लिए हुंकार भर दी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और राज्यपाल के साथ ही हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। पत्रकारों और मातृ सदन का ‘दि संडे पोस्ट’ के गढ़वाल ब्यूरो चीफ अहसान अंसारी के समर्थन में आना बहुत मायने रखता है। ऐसे में जब प्रदेश सरकार पत्रकारों के उत्पीड़न में लगी हो तो तब पत्रकारों की एकता सरकार को आईना दिखाने का काम काम करेगी।

यूनियन के पूर्व महामंत्री वरिष्ठ पत्रकार श्री अहसान अंसारी श्रमजीवी पत्रकार यूनियन हरिद्वार इकाई के पूर्व महामंत्री है तथा जनपद स्तर पर राजकीय मान्यता प्राप्त पत्रकार है तथा पत्रकारों की सम्मानित संस्था प्रेस क्लब हरिद्वार के सदस्य भी हैं। श्री अहसान अंसारी द्वारा समय-समय पर माफिया वह पुलिस गठजोड़ को लेकर समाचार प्रकाशित किए जाते रहे हैं। इसी क्रम में ‘दि संडे पोस्ट’ के न्यूज़ पोर्टल पर उनके द्वारा ज्वालापुर के निवर्तमान कोतवाल योगेश देव के संबंध में भी एक समाचार प्रकाशित किया था। जिस कारण श्री योगेश देव व उनके खास पुलिसकर्मी उनसे रंजिश रखने लगे थे।

कोतवाल द्वारा बदले की भावना से श्री अहसान अंसारी के विरुद्ध तरह-तरह की साजिश रची जा रही थी जिस के संबंध में उनके द्वारा सीएम हेल्पलाइन, ट्विटर सहित डीजीपी महोदय को ईमेल के माध्यम से अवगत भी कराया था। दिनांक 16 मई 2020 कि सुबह 11:24 बजे की घटना है भेल सेक्टर 1 से मध्य मार्ग होते हुए ज्वालापुर की ओर जा रहे थे तभी वर्कर हॉस्टल के बाहर पहुंचते ही पीछे से ज्वालापुर कोतवाली की सरकारी जीप में आए तत्कालीन निरीक्षक योगेश देव, चालक आनंद रावत, सिपाही सतेंदर यादव ने उनको जबरदस्ती रोक लिया और मोटरसाइकिल छीनते हुए जबरदस्ती उठाकर सरकारी जीप में डाल लिया और दोनों फोन भी छीन लिए गए।

इसके उपरांत श्री अहसान अंसारी को उठाकर सेक्टर 4 भेल स्थित हरिद्वार के एसओजी कार्यालय के पीछे की ओर स्थित एक छोटे कमरे में ले जाकर बंधक बना लिया गया तथा उनके बार-बार कहने के बावजूद परिजनों से बात तक नहीं करने दी। इस दौरान श्री अंसारी को अवैध हिरासत में रखते हुए विभिन्न तरीके से शारीरिक व मानसिक यातनाएं दी गई। 6-7 घंटे की अवैध हिरासत में रखने के पश्चात उनको साजिशन दर्ज किए गए फर्जी मुकदमें में 16 मई की शाम 5:30 बजे की गिरफ्तारी दिखलाई गई। जबकि तीनों पुलिसकर्मियों ने उनका का भेल मध्य मार्ग से सुबह 11:24 पर वर्कर हॉस्टल के बाहर से अपहरण किया तथा एसओजी-सीआईयू कार्यालय में अवैध हिरासत में रखा और फोन छीन कर प्रताड़ित किया गया। जिसकी फोन लोकेशन से जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।

15-16 मई के प्रकरण से पहले पहले भी एक मुकदमा फर्जी तरीके से तत्कालीन निरीक्षक योगेश देव के द्वारा दिसंबर माह में लिखा गया था जिसकी विवेचना जारी है। महोदय निरीक्षक योगेश देव की विभिन्न कारगुजारी ओ का खुलासा श्री अहसान अंसारी अपनी लेखनी के माध्यम से करते चले आ रहे थे। जिसके चलते निरीक्षक योगेश देव उनसे निजी खुन्नस रखने लगे और इस तरह 16 मई को अवैध हिरासत में रख उन्हें प्रताड़ित किया गया। श्री अहसान अंसारी तभी से जेल में बंद है। महोदय मान्यता प्राप्त पत्रकार को बिना जांच के इस तरह अवैध हिरासत में रख प्रताड़ित किया गया तथा फिर झूठा मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।

जिसकी यूनियन सीबी सीआईडी तथा उच्च स्तरीय जांच की मांग करती है। साथ ही तत्कालीन निरीक्षक योगेश देव, चालक आनंद रावत, सिपाही सत्येंद्र यादव पर यदि शीर्घ कार्रवाई नहीं की गई तो यूनियन धरना प्रदर्शन के लिए बाध्य होगी। आशा ही नहीं अपितु पूरा विश्वास है की एक सक्रिय सम्मानित पत्रकार को न्याय दिलाने हेतु आवश्यक कार्रवाई करने का कष्ट करेंगे।

जबकि दूसरी तरफ मातृ सदन के ब्रह्मचारी दयानंद द्वारा हरिद्वार के एसएसपी सेंथिल अबुदई को पत्र लिखकर कहा गया है कि पत्रकार अहसान अंसारी के खिलाफ पुलिस ने बदले की भावना से काम किया है। मातृ सदन एक आध्यात्मिक संस्था है जो पर्यावरण संरक्षण एवं भ्रष्टाचार उन्मूलन को कृतसंकल्प है। विदित है कि श्री अहसान अंसारी एक सम्मानित पत्रकार हैं और भ्रष्टाचार के मुद्दों को अपने लेखनी में प्रमुखता प्रदान करते रहे हैं ऐसे में भ्रष्ट अधिकारीगणों का उनसे नाहक द्वेष की भावना रखना कोई नई बात नहीं है।

अपनी निजी खुन्दक निकालने के लिए पुलिस अधिकारियों का लॉकडाउन का समय चुनना अत्यंत निराशाजनक है। वैसे भी भ्रष्ट पुलिस अधिकारी किस प्रकार से बिना मतलब किसी का नाम किसी केस में जोड़ दिया करते हैं। पुलिस की इस कार्यप्रणाली से हम लोग भली-भांति परिचित हैं। उसमें आप के कार्यालय में इस तरह की बात विशेष हो चली है और हमारा ऐसा कहने के पीछे तथ्यात्मक कारण है वह भी आपको भली-भांति ज्ञात है परंतु श्री अहसान अंसारी जैसे मान्य एवं प्रतिष्ठित पत्रकार के साथ इस तरह की पुलिस ज्यादती उचित नहीं है।

शिकायत करने वाली महिला ने आपको जो तहरीर दी है उसमें श्री अहसान अंसारी का नाम तक नहीं है । फिर कहां से उनका नाम आ गया? पुलिस को शक्तियां अपराधियों को पकड़ने के लिए दी गई हैं उसका दुरुपयोग कर शरीफ इंसान को परेशान करने के लिए नहीं ।जिस कथित हल्के आचरण के दोषी होने का आरोप लगाकर अहसान अंसारी जी को पकड़ा गया है, उस तरह का आचरण उनका नहीं रहा है। वह तीन सप्ताह से भी ज्यादा समय से जेल काट रहे हैं। पुलिस ने लॉकडाउन का लाभ अपने निजी वैर को निकालने के लिए किया है।

ऐसे में दूध का दूध पानी का पानी साफ करने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच गठित किया जाना आवश्यक है। जिसमें पुलिस की इस कार्रवाई के पीछे मानसिकता ही नहीं कारण को भी चिन्हित किया जाना चाहिए और तदनुकुल दोषी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। आशा है कि आप अपने पद की गरिमा रखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच बैठा कर मामले की गहनता से छानबीन करवाएंगे।

इसके साथ ही मातृ सदन के ब्रह्मचारी दयानंद ने यह पत्र मातृ सदन द्वारा उच्चाधिकारियों को भेजा और कहा कि माननीय मुख्य न्यायाधीश नैनीताल उच्च न्यायालय, नैनीताल को इस आशय से कि इस लॉकडाउन में पुलिस की ज्यादती भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाने वाले को भारी पड़ रही है। जबकि श्रीमान गृह सचिव उत्तराखंड शासन देहरादून को इस आशय से कि पुलिस की इस तरह की कार्रवाई पर आपको पैनी नजर रखनी आवश्यक है ताकि शक्तियों का दुरुपयोग ना हो। इसके अलावा पत्र की एक प्रति श्रीमान पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड पुलिस देहरादून को भेजी गई है। वह इस आशय से कि श्री अबुदई जी ऑफिस से कागजात गायब करवाने और फर्जी रिपोर्ट लगवाने मे माहिर है, ऐसे में इनसे निष्पक्ष कार्यवाई संभव नही हो सकता है। अतः किसी ईमानदार अधिकारी से मामले की त्वरित जांच करवाने का कष्ट करें।

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