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हंगामेदार होगा शीतकालीन सत्र

आज से शुरू हुए शीतकालीन सत्र को लेकर एक ओर जहां सरकार कई बिलों को पेश करेगी वहीं कांग्रेस के नेतृत्व में हुई विपक्षी पार्टियों की बैठक के बाद विपक्ष बेरोजगारी , महंगाई ,चीन-भारत सीमा विवाद, गरीब सवर्णों को आरक्षण जैसे मुद्दों पर बहस की मांग कर रहा है।

 

ऐसे में कहा जा रहा है कि सत्र के हंगामेदार होने के आसार हैं। दरअसल संसद की दोनों सदनों में शीतकालीन सत्र की शुरुआत हो चुकी है, जो 23 दिनों तक चलेगा। इस सत्र में केंद्र सरकार, संसद के सामने करीब 16 नए बिल पेश करने के लिए तैयार है। जिसमें डेंटल कमीशन बिल, नेशनल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी कमीशन बिल, मल्टीस्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटी अमेंडमेंट बिल, ओल्ड ग्रांट्स एडजस्टमेंट बिल, फॉरेस्ट प्रोटेक्शन रिसर्च बिल आदि शामिल हैं। ओम बिरला ( लोकसभा अध्यक्ष) ने ट्वीट करते हुए कहा है कि, ‘लोकसभा का शीतकालीन सत्र आज से प्रारंभ होगा। आशा है सदन के व्यवस्थित संचालन में सभी दलों का सहयोग मिलेगा। माननीय सदस्य सामूहिक चिंतन – मनन के माध्यम से जनता की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करेंगे। मेरी भी कोशिश रहेगी कि सदस्यों को अपना मत प्रस्तुत करने के पर्याप्त अवसर मिलें।’

 

प्रस्तावित मुद्दे

 

केंद्र द्वारा संसद के सामने प्रस्तुत किये जाने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल डेंटल कमीशन बिल के तहत नेशनल डेंटल कमीशन बनाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। साथ ही डेंटिस्ट एक्ट 1948 को निरस्त करने का भी प्रस्ताव है। जिसके तहत यह तय किया गया है कि सड़क किनारे दांत निकालना और कान का मैल साफ करना गैरकानूनी है। दूसरा मुद्दा नेशनल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी कमीशन बिल जिसमें नेशनल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी कमीशन बनाने का प्रस्ताव के साथ इंडियन नर्सिंग काउंसिल एक्ट, 1947 को निरस्त करने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी बिल 2022 में को-ऑपरेटिव सोसायटी में शासन व्यवस्था को मजबूत बनाने, व चुनावी प्रक्रिया में सुधार आदि का प्रस्ताव रखा गया है। संसद में पेश किये जाने वाले बिलों में से एक फॉरेस्ट अमेंडमेंट बिल भी है जिसके द्वारा फॉरेस्ट (कंजर्वेशन) एक्ट, 1980 में संशोधन किए जाने की मांग की गई है। इस एक्ट के अनुसार जब भी खनन या अवसंरचना विकास जैसे गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए वन भूमि का उपयोग किया जाता है तो बदले में उस भूमि के बराबर गैर-वन भूमि अथवा निम्नीकृत भूमि के दोगुने के बराबर भूमि पर प्रतिपूरक वनीकरण करना होता है। साथ ही इस बिल में जंगलों का संरक्षण और बढ़ावा दिए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार ने आर्थिक आर्थिक क्षेत्र पर भी विशेष ध्यान दिया है हालांकि बैंकिंग संशोधन और डाटा सुरक्षा जैसे बिल पेश किए जाने की कोई संभावना नहीं दिखाई दे रही है लेकिन सरकार बजट पर कुछ बिल जरूर पेश करेगी। जिसमें से एक अंतर्राज्यीय सहकारी समिति संशोधन बिल भी है जिसके द्वार सरकार सहकारिता के क्षेत्र में पुराने कानूनों को खत्म कर इस क्षेत्र में व्यापक सुधार लाना चाहती है। इसी क्षेत्र में दूसरा बिल ट्रेड मार्क संशोधन बिल है जिसके तहत महज एक आवेदन से पूरी दुनिया में ट्रेडमार्क हासिल करने का अधिकार देने की मांग की गई है।

 

इन मुद्दों पर बहस चाहता है विपक्ष

 

संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्षी पार्टियां भी कुछ मुद्दों को संसद के सामने पेश करने पर विचार कर रहीं हैं।जिसमें महंगाई, बेरोजगारी, चीन-भारत सीमा विवाद, गरीब सवर्णों को आरक्षण जैसे मुद्दे शामिल हैं। कांग्रेस पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी का कहना है कि, देश के सामने बेरोजगारी, महंगाई जैसे मुद्दें हैं जिन पर सरकार को जवाब देना होगा। रंजन के अनुसार सरकार ने चीन के साथ सीमा विवाद के बारे में विपक्ष को पूरी जानकारी नहीं दी है। इन मुद्दों के अलावा विपक्ष कश्मीरी पंडितों की हत्याओं के मामले में भी बहस चाहता है ।

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