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क्या मनोज तिवारी दूसरी बार प्रदेश अध्यक्ष बनने में सफल होंगे ?

भारतीय जनता पार्टी की दिल्ली इकाई के संगठन का चुनाव 11 सितंबर से शुरू होने जा रहा है।
सबकी निगाहें प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी पर टिकीं हैं। क्या मनोज तिवारी दूसरी बार अध्यक्ष बनने में सफल होंगे या फिर बीजेपी किसी दूसरे चेहरे पर दांव खेलेगी?
नए साल में संभावित दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राज्य इकाई का चुनाव पूरा हो जाएगा। इसी के साथ साफ हो जाएगा कि मनोज तिवारी ही दूसरी बार प्रदेश अध्यक्ष बनेंगे या फिर बीजेपी किसी और चेहरे पर दांव चलेगी।
दिल्ली में संगठन का चुनाव 11 सितंबर से शुरू होने जा रहा है। बूथ अध्यक्षों से लेकर मंडल, जिला और प्रदेश कार्यकारिणी का चुनाव होगा।
11 सितंबर से 15 दिसंबर तक राज्य में चुनाव की प्रक्रिया खत्म हो जाएगी।
सभी की निगाहें मनोज तिवारी पर टिकी हैं कि वह कुर्सी बचाने में सफल होंगे या नहीं।
क्यों बने रह सकते हैं अध्यक्ष
उत्तर-पूर्वी दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी को नवंबर 2016 में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली की कमान सौंपी थी।
मनोज तिवारी से पहले सतीश उपाध्याय बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे।
मनोज तिवारी को प्रदेश संगठन की कमान देने के पीछे पार्टी का मकसद रहा कि वह उत्तर-प्रदेश और बिहार के मतदाताओं को अपने ‘पूर्वांचलिया चेहरे’ के जरिए बीजेपी के करीब लाने में सफल होंगे। इसमें तिवारी काफी हद तक सफल भी रहे।
मनोज तिवारी के अध्यक्ष बनने के बाद हुए 2017 के नगर निगम और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन किया।
चूंकि बीजेपी के संविधान में पूर्व में हुए संशोधन के चलते अध्यक्ष पद पर कोई व्यक्ति तीन-तीन साल के दो कार्यकाल तक रह सकता है। ऐसे में तिवारी की राह में पार्टी का संविधान भी रोड़ा नहीं बनने वाला।अगर चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन पैमाना बना तो मनोज तिवारी दोबारा बीजेपी अध्यक्ष बन सकते हैं।
क्यों हटाए जा सकते हैं तिवारी?
दिल्ली के लिए बाहरी माने जाने वाले मनोज तिवारी को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इस मकसद से भी अध्यक्ष बनाया था कि वह स्थानीय नेताओं के बीच चल रही गुटबंदी को दूर कर उन्हें एक मंच पर लाने में सफल होंगे।मगर मनोज तिवारी गुटबंदी को दूर नहीं कर पाए।
उल्टे दिल्ली में संगठन पर वर्चस्व स्थापित करने के लिए जो स्थानीय नेता एक दूसरे के विरोधी माने जाते थे, उन्होंने बाहरी बनाम स्थानीय के मुद्दे पर एकजुट होकर तिवारी के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया।
बीजेपी में लंबे समय तक संगठन की राजनीति से जुड़े रहे नेता इसलिए मनोज तिवारी के खिलाफ हैं कि उन्हें संगठन का अनुभव नहीं है। फिर भी प्रदेश अध्यक्ष बना दिए गए।
मनोज तिवारी पहले समाजवादी पार्टी में थे।
गोरखपुर में 2009 में योगी आदित्यनाथ के खिलाफ लोकसभा का चुनाव लड़कर हार गए थे। बाद में वह बीजेपी में आए।
2014 में बीजेपी के टिकट पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली सीट से पहली बार सांसद बने और फिर दो साल बाद ही पार्टी ने अचानक उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में प्रदेश अध्यक्ष बना दिया।
संघ पृष्ठिभूमि के नेता मनोज तिवारी की इस तरक्की से कुछ असंतुष्ट भी दिखे।
2017 में बीजेपी नेता विजय गोयल और मनोज तिवारी के बीच की लड़ाई सतह पर आ गई थी।
जब एमसीडी चुनाव में जीते पार्षदों के सम्मान के लिए विजय गोयल ने 16 मई 2017 को सम्मान समारोह आयोजित किया था।

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