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गौ सफारी से बच पाएगी किसानों की फसलें?

गत दिनों हुए विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में एक मुद्दा बड़े स्तर पर छाया रहा। यह मुद्दा था आवारा पशुओं का। आवारा पशु खासकर सांड जिस तरह से किसानों की फसलों को बर्बाद कर रहे हैं उससे अन्नदाता का जीना दूभर हो गया है। इसके चलते ही ग्रामीण क्षेत्रों में इस मुद्दे पर भाजपा के उम्मीदवारों को लोगों की खरी-खोटी सुनने को मिली थी।

शायद यही वजह थी कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपनी चुनावी रैलियों में आवारा पशुओं की समस्या को खत्म करने का वादा किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पहले कार्यकाल में इस मुद्दे पर गोवंश आश्रय स्थल बनाकर समस्या सुलझाने का दावा करते रहे हैं। लेकिन यह समस्या सुलझने की बजाय और बढ़ती ही गई । उत्तर प्रदेश में कुल 52 सौ गोवंश आश्रय केंद्र बनाये गये थे।

गोवंश यानी कि आवारा पशुओं की समस्या तब से ज्यादा बढ़ी जब योगी सरकार ने कट्टी घर बंद कराने के आदेश दे दिए । पहले आवारा पशु ज्यादातर कट्टी घर में खत्म कर दिए जाते थे । लेकिन कट्टी घर बंद होने के बाद वह खुलेआम सड़कों पर घूमते लोगों के लिए चलते फिरते दुश्मन बन गए थे।

सड़कों पर आवारा पशुओं की लड़ाई झगड़े के बीच बहुत से लोग अपनी जान गवा गए थे। यही नहीं बल्कि किसानों की फसलें तो इनका विचरण केंद्र बन गई थी। फसलों को बर्बाद करना आवारा पशुओं का पहला काम हो गया था। इसके चलते ही उत्तर प्रदेश के अधिकतर गांव में किसान रात रात भर अपनी फसलों को बचाने के लिए पहरा देते थे।

इस मुद्दे को एक बार फिर खत्म करने के लिए योगी सरकार ने इस बार गौ सफारी की परियोजना बनाई है। इस परियोजना में प्रदेश भर के वन क्षेत्र की जमीनों पर गो सफारी बनेंगे। जहां आवारा पशुओं को रखा जाएगा। पूर्व में गोवंश आश्रय स्थल इसलिए सफल नहीं हो पाए थे क्योंकि वह ऐसी जगह बनाए जाते थे जिनके चारों तरफ गड्ढे खोद दिए जाते थे।

गड्ढे इसलिए खोदे जाते थे कि आवारा पशु आश्रय स्थलों से बाहर न निकल सके । लेकिन ज्यादातर पशु भूख और प्यास से तड़प तड़प कर या तो वही मर जाते थे या उन्होंने अगर आश्रय स्थलों से निकलने की कोशिश की तो वह आश्रय स्थल के चारों तरफ बने गहरे गड्ढे में गिर कर मर गए। आवारा पशुओं को रहने के लिए बनाए गए ऐसे टापू उनके लिए मौत के घर बनकर रह गए।

फिलहाल, योगी सरकार ने अब गौ सफारी को आगे लाकर किसानों की फसलों को बचाने की योजना बनाई है। हालांकि किसानों को अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि इस गौ सफारी से उनकी फसलें सुरक्षित रह पाएंगी।

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