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दिल्ली-बिहार के मतदाताओं को क्या आज चुनावी बजट से कैश करेगी भाजपा?

दिल्ली-बिहार के मतदाताओं को क्या आज चुनावी बजट से कैश करेगी भाजपा?

चुनावी बयार में चर्चा है कि इस समय दिल्ली विधानसभा चुनाव के समीकरण मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के पक्ष में जा रहे हैं। लेकिन भाजपा इन समीकरणों को बदलने के लिए पूरी जान लगा सकती है। इसके चलते हो सकता है यह समीकरण आज बजट के बाद भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में बदल जाए। इसके पीछे दिल्ली और बिहार के विधानसभा चुनाव है।

गौरतलब है कि आज नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा बजट पेश किया जाएगा। इसमें इस साल होने वाले दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनावों को देखते हुए कई घोषणाएं की जा सकती है। मतदाताओं को लुभाने के लिए भाजपा सरकार इस बजट को कैश कर सकती है। माना जा रहा है कि आज पेश होने वाले बजट में केन्द्र सरकार द्वारा इनकम टैक्स में भरपूर छूट दी जा सकती है। इसका फायदा दिल्ली की जनता को भी मिलेगा। हो सकता है इस से दिल्ली चुनाव के समीकरण भाजपा के पक्ष में आ सकते है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में अब सात दिनों से भी कम का समय बचा है। 8 फरवरी को होने वाले इस चुनावों के लिए सभी दलों ने अपनी ताकत झोंक दी है। हालांकि, हर वर्ष की तरह इस बार भी 1 फरवरी को केंद्र सरकार के आम बजट को लेकर लोगों में काफी उम्मीदें हैं। जहां व्यापारी इनकम टैक्स स्लैब को बढ़ाने के साथ-साथ जीएसटी के स्लैब कम करने की बात कर रहे हैं। वहीं अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार को स्वास्थ्य, शिक्षा, जीडीपी रेट की तरफ ध्यान देना चाहिए ताकि हर व्यक्ति को इसका लाभ मिल सके। चाहे वह व्यापारी हो दुकानदार हो, आम नागरिक हो या फिर सरकारी अधिकारी के साथ-साथ रिटायर्ड कर्मचारी हो।

आम लोगों की राय है कि सरकार को इस बजट में गृहणियों की रसोई का भी खासकर ध्यान रखना होगा। जिससे उनकी रसोई का बजट न बिगडे। कैटरिंग का व्यापार करने वाले लोगों को सरकार के इस बजट से बहुत उम्मीदें हैं। जिससे आम आदमी भी उम्मीद रखता है कि आने वाला बजट उसके हक में हो।

बताया जा रहा है कि इस साल बजट में आयकर कटौती की उम्मीदों को झटका लग सकता है। अर्थव्यवस्था में जारी नरमी के कारण चालू वित्त वर्ष में कर से प्राप्त राजस्व लक्ष्य की तुलना में दो लाख करोड़ रुपये कम रह सकता है। इसके कारण वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पास बजट में व्यक्तिगत आयकर में कटौती के विकल्प सीमित हो गए हैं। लेकिन बावजूद इसके चुनावी बजट की भी चर्चा-ए-आम है।

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