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किसान आंदोलन में क्यों हुआ पुलिस के साथ शर्तो का उल्लघन ?

दिल्ली पुलिस और आंदोलनकारी किसानों के बीच गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले ही ट्रैक्टर परेड को लेकर कुछ शर्ते लागू हुई थी।  अगर उन्ही शर्तो पर ट्रैक्टर परेड होती तो शायद टकराव की स्थिति ना बनती।  कहते है कि किसी भी आंदोलन में जब भीड़ ज्यादा हो जाती है तो वह नेताओं के नियंत्रण से बाहर हो जाती है।  कल की ट्रैक्टर परेड में भी कुछ ऐसा ही हुआ। देखते ही देखते अचानक भीड़ अनियंत्रित हो उठी। इसके बाद जो तस्वीर सामने आई उसने देश के लोकतंत्र को शर्मसार कर दिया।  हालाँकि किसान नेता इसके लिए एक एक्टर को दोषी बताकर गैंद दूसरे पाले में गिरने की कोशिशों में जुटे है। लेकिन जो सच्चाई है उससे भी तो मुँह नहीं फैरा जा सकता है।
पुलिस और किसानों के बीच क्या हुआ था समझौता 
ट्रैक्टर परेड से एक दिन पहले की बात करे तो सोमवार की रात तक दिल्ली पुलिस ने किसान नेताओं के सामने तीन रूट प्रस्तावित किए थे। साथ ही यह भी तय हुआ था कि राजपथ की औपचारिक परेड के बाद ही किसान दोपहर 12 बजे से अपना ट्रैक्टर मार्च शुरू करेंगे औऱ तय रूट से होते हुए वापस अपने-अपने धरनास्थल पर लौट आएंगे . जबकि हुआ इसके विपरीत।  किसानों ने तय समय से लगभग साढ़े तीन घंटे पहले ही बैरीकेड्स तोड़ दिल्ली की ओर कूच करने लगे। किसानों ने दूसरा वादा यह तोड़ा कि एक ट्रैक्टर पर हद से हद तीन लोगों के रहने की बात कही गई थी। लेकिन यह अलग बात है कि एक-एक ट्रैक्टर और उससे जुड़ी ट्रॉलियों पर दसियों किसान मौजूद थे।इसके साथ ही किसानों से दिल्ली पुलिस ने कहा था कि सिर्फ 5 हजार ट्रैक्टर परेड में शामिल होंगे। लेकिन ट्रैक्टर 5000 छोड़ो कम से कम दो लाख परेड में शामिल हुए। ट्रैक्टर के साथ कार, बाइक और साइकिलों से परेड की शक्ल में लाखों किसान सड़क पर निकल पड़े।
दिल्ली पुलिस के साथ किसानों की एक शर्त यह भी बनी थी कि ट्रैक्टर रैली में शामिल किसानों के पास किसी किस्म का हथियार नहीं होगा। लेकिन रैली में देखने में आया कि सैकड़ों किसानों के हाथों में डंडों के अलावा लोहे की रॉड तो थी हीं बल्कि सिख धर्म की पवित्रता के प्रतीक निहंग हाथों में नंगी तलवारें लिए न सिर्फ बैरीकेड्स हटाते देखे गए। कई जगह किसान पुलिस वालों को धमकाते और उन्हें कहीं-कहीं पीटते भी दिखाई दिए।  दिल्ली पुलिस ने किसान नेताओं से साफ-साफ कहा था कि ट्रैक्टर परेड के दौरान ट्रैक्टर से कोई स्टंट नहीं दिखाया जाएगा। इस समझौते की भी धज्जियां उड़ाई गईं। स्टंट के फेर में आईटीओ के पास एक युवक की मौत हो गई तो उसके पहले सीमा पर स्टंट दिखाने में पलटे ट्रैक्टर की चपेट में आकर कई घायल हो गए।
क्या कहा दिल्ली पुलिस ने 
इस मामले पर दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया है कि गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के लिए दिल्ली पुलिस ने किसानों के साथ तय हुए शर्तों के अनुसार काम किया और आवश्यक बंदोबस्त किए।  दिल्ली पुलिस ने अंत तक काफी संयम का परिचय दिया, परन्तु आंदोलनकारियों ने तय शर्तों की अवहेलना की और तय समय से पहले ही अपना मार्च शुरू कर दिया और आंदोलनकारियों ने हिंसा व तोड़फोड़ का मार्ग चुना, जिसको देखते हुए दिल्ली पुलिस कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए संयम के साथ ज़रूरी कदम उठाए। इस आंदोलन से जन संपत्ति को काफी नुक्सान हुआ है और लगभग 300 पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं। आंदोलनकारियों से अपील है कि हिंसा का रास्ता छोड़ शान्ति बनाएं और तय हुए रास्ते से वापस लौट जाएं।
किसानों से कहा हुई चूक 
किसानों को निर्धारित संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर से दाएं मुड़ना था। लेकिन वह सीधा जाकर मुकरबा चौक से बाएं मुड़ना चाह रहे थे। मुकरबा चौक पर पुलिस ने इन्हें रोकने की कोशिश की तो यहां पुलिस से उनकी झड़प हो गई. तस्वीरों में दिखा कि किसानों ने यहां निहंग को आगे कर दिया। यह घोड़े पर सवार थे और आक्रामक ढंग से विरोध कर रहे थे।  पुलिस ने मजबूरन आंसू गैस के गोले छोड़े, लेकिन स्थिति अनियंत्रित रही।
इसी तरह टिकरी बॉर्डर पर किसानों को नांगलोई, नजफगढ़ होते हुए बहादुरगढ़ जाना था और यहां से वापस आना था, लेकिन उपद्रवी बैरिकेड तोड़कर सीधे पीरागढ़ी की तरफ जाने लगे। यहां नांगलोई चौक पर भी पुलिस से टकराव हुआ। इसी तरह गाजीपुर बॉर्डर पर ट्रैक्टर की टक्कर से कंटेनर हटाया गया और बैरिकेड तोड़ दी गई।
क्या कहते है किसान नेता 
हिंसा के घंटों बाद सामने आए राकेश टिकैत ने कहा कि उन्हें मालूम है कि हिंसा में किसका हाथ है। उनका सीधा इशारा एक्टर दीप संधू की ऑर्डर है। उन्होंने इसके लिए आंदोलन को बदनाम करने का दांव चलते हुए राजनीतिक पार्टी की हिंसा में संलिप्तता का आरोप मढ़ा।
एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि पंजाब, हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। उनका संयम खत्म हो गया, जिसके बाद उन्होंने ट्रैक्टर मार्च निकाला।  कानून और व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदार थी, लेकिन वो विफल रही। उन्होंने आगे कहा कि आज जो भी हुआ उसका समर्थन कोई नहीं करेगा, लेकिन इसके पीछे के कारणों को नजरंदाज नहीं किया जा सकता, सरकार समझदारी दिखाए और सही फैसले ले।
दिल्ली हिंसा पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हैरान कर देने वाले दृश्य किसान नेताओं ने ट्रैक्टर परेड से खुद को अलग कर लिया है। मैं उनसे मांग करता हूं कि वो दिल्ली को खाली करें और बॉर्डर पर लौटें।
स्वराज पार्टी के योगेंद्र यादव ने कहा कि लाल किले की घटना से मेरा सिर झुक गया है। वहां पर जो लोग थे वो सही लोग नहीं थे। वहां देशबंधु थे जो पहले दिन से हमारे साथ नहीं हैं, मगर मैं जिम्मेदारी से नहीं भाग सकता हूं।  इससे आंदोलन बदनाम होगा।

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